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जानिए कौन हैं कारोबारी सीसी थंपी और रॉबर्ट वाड्रा से कनेक्शन, ED ने किया है गिरफ्तार

कई देशों से विदेशी बैंकिंग लेनदेन की रसीद की वजह से ईडी ने थम्पी को गिरफ्तार किया और दावा किया कि अब उनके पास वाड्रा और भंडारी के साथ मनी लॉन्ड्रिंग और संपत्ति अधिग्रहण सौदों से जुड़ने के सबूत हैं।

रॉबर्ट वाड्रा (Express Photo)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एनआरआई व्यवसायी सीसी थंपी को कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले के गिरफ्तार किया है। ईडी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और हथियार डीलर संजय भंडारी के खिलाफ जांच कर रही है। इसी मामले में थंपी के संबंध की भी जांच की जा रही है। थंपी को वाड्रा का करीबी सहयोगी बताया जाता है। आरोप है कि थंपी ने लंदन में अचल संपत्ति की खरीद में निवेश करने में वाड्रा की मदद की। थंपी दुबई में स्काईलाइट एफजेडई नाम से एक कंपनी चलाता है, जो भारत में वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनी के साथ अपना नाम साझा करती है।

कई देशों से विदेशी बैंकिंग लेनदेन की रसीद की वजह से ईडी ने थम्पी को गिरफ्तार किया और दावा किया था कि अब उनके पास वाड्रा और भंडारी के साथ मनी लॉन्ड्रिंग और संपत्ति अधिग्रहण सौदों से जुड़ने के सबूत हैं। वाड्रा के वकील केटीएस तुलसी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामला विचाराधी है, इसलिए वे ईडी के दावों पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं। ईडी थंपी को अदालत में सबूत के तौर पर पेश कर सकती है। लंदन में ब्रायनस्टन स्क्वायर संपत्ति का मालिक थंपी है। इसे लेकर एजेंसी ने आरोप लगाया था कि पहले इस संपत्ति को वाड्रा के लिए भंडारी द्वारा अधिग्रहण किया गया था।

2007 में भंडारी ने सेंटेक इंटरनेशनल एफजेडसी कंपनी की स्थापना की थी। कथित तौर पर ओएनजीसी के साथ अपनी कंपनी के एक कांट्रैक्ट लिए भंडारी ने 49 लाख डॉलर की दलाली दी थी और इसी पैसे से लंदन में संपत्ति खरीदी गई थी। ईडी संपत्ति खरीद और दलाली के पैसों के बीच संबंध स्थापित कर रही है। ईडी के अनुसार, कथित दलाली यूपीए सरकार के दौरान 2009 में ओएनजीसी द्वारा सैमसंग इंजीनियरिंग को दिए गए एक पेट्रोलियम अनुबंध के लिए थे।

एजेंसी के अनुसार 2009 के बाद से कई देशों में बैंकिंग लेनदेन की जांच ईडी द्वारा की गई और 25 जून 2010 को इस मामले में थंपी की भूमिका सामने आई। यह तब हुआ जब ब्रायनस्टन स्क्वायर की संपत्ति को भंडारी की कंपनी ने दुबई में थंपी के स्वामित्व वाली कंपनी को बेच दिया था।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर ED के प्रमुख आरोप ये हैं:

– भंडारी के पास सेंटेक इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी थी और 10 दिसंबर 2009 को 1.92 मिलियन पाउंड यूके में स्थानांतरित किए गए थे। फंड का इस्तेमाल बीवीआई कंपनी वर्टेक्स होल्डिंग के दो शेयरों की खरीद के लिए भी किया गया था, जिसके अगले दिन एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह कंपनी ब्रायनस्टन स्क्वायर की संपत्ति संभाल रही थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि फंड 2009 के पेट्रोलियम सौदे की दलाली से आए थे।

– ईडी का दावा है कि एक बार घर के अधिग्रहण के बाद 60,000 पाउंड की लागत से वाड्रा के इशारे पर मकान की मरम्मत की गई और वाड्रा ने भी उस जगह का दौरा किया। भंडारी पर आयकर की तलाशी के दौरान संपत्ति मरम्मत के लिए वाड्रा कनेक्शन को लेकर एक ईमेल का पता चला।

– ईडी के अनुसार, एक बार मरम्मत कार्य पूरा हो जाने के बाद संपत्ति टेम्पी के स्वामित्व वाले वर्टेक्स होल्डिंग बीवीआई से स्काइलाइट इन्वेस्टमेंट एफजेडई के हाथों में दे दी गई। 25 जून 2010 को वर्टेक्स होल्डिंग्स बीवीआई द्वारा प्राप्त 1.9 मिलियन पाउंड 30 जून, 2010 को सैंटेक इंटरनेशनल के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर कर दिया गया था और इसके बाद दो अन्य कंपनियों च्वाइस प्वाइंट ट्रेडिंग और जैन ट्रेडिंग को पैसे भुगतान कर दिए गए। इन दो फर्मों में से एक के मालिक को हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया है और लेनदेन के बारे में पूछताछ की गई है।

– इसके बाद, 30 मार्च 2013 को स्काईलाइट इंवेस्टमेंट एफजेडई का नाम बदलकर Mayfair Investment FZE कर दिया गया और थंपी ने भी अपने शेयर अपने रिश्तेदारों को ट्रांसफर कर दिया। ईडी का मामला यह है कि ब्रायनस्टन स्क्वायर की संपत्ति वर्तमान में Skylight Investment FZE (अब Mayfair Investment FZE) के पास है।

ईडी का दावा है कि उसने यह पाया गया है कि इन दोनों कंपनियों में स्थापना के समय से कोई भी व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी लेकिन संपत्ति की खरीद से पहले 1.9 मिलियन पाउंड के बराबर बड़ी जमा राशि इसके बैंक खातों में डाल दी गई थी। ईडी के पास 9 जून 2010 से 25 जून 2010 के बीच फंडों के ट्रांसफर (यूएई दिरहम) का विवरण है।

फरवरी 2019 में जब इंडियन एक्सप्रेस ने पहली बार ईडी की जांच पर रिपोर्ट की, तो ओएनजीसी और ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) ने फोन कॉल, संदेशों और ईमेल पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी। सैमसंग इंजीनियरिंग के प्रवक्ता जिन हार्टमैन ने तब कहा था, “सैमसंग इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट अवार्ड प्रोसेस सहित अपने अपने व्यवसाय के संचालन में कानून और नियमों का पालन करता है।”

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