कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की नई रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। संसद में 12 अगस्त को पेश CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पीने के पानी के सैंपल में ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया। इसके अलावा 90 फीसदी से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर बैठने की व्यवस्था, टॉयलेट, पंखे और साइनेज जैसी एक या ज्यादा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सफाई, पेयजल उपलब्धता और चिकित्सा सहायता से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं यात्री सुविधाओं से जुड़े 59 प्रतिशत काम तय समय से पीछे रहे और इन सुविधाओं के लिए आवंटित पैसे का भी पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया। यह ऑडिट 2019-20 से 2023-24 की अवधि का है।

रिपोर्ट के बाद हरकत में सरकार

CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने सुधार के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को देशभर में करीब 20 हजार जगहों पर टैंक टू टैप (Tank To Tap) फिल्टरेशन सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए जिनमें वाटर कूलर भी शामिल हैं।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”अब से रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी रेलवे बोर्ड स्तर पर की जाएगी। पानी के स्टोरेज टैंकों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पानी की गुणवत्ता और प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी।”

आपको बता दें कि पिछली बार साल 2016 में CAG ने स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की ऑडिट किया था। करीब एक दशक बाद नेशनल ऑडिटर ने यह पाया कि पिछली रिपोर्ट पर दिए गए बार-बार के आश्वासनों के बावजूद रेलवे स्टेशनों पर कमियां अब भी बनी हुई हैं। ताजा रिपोर्ट में यात्री सुविधाओं, पेयजल, सफाई और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाया गया है। जानें रिपोर्ट में पता चली बड़ी बातें:

जरूरी बुनियादी सुविधाएं (Minimum Essential Amenities – MEA)

रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए अनिवार्य बुनियादी सुविधाएं (Minimum Essential Amenities – MEA) उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहली बार 2003 में रेलवे बोर्ड ने शुरू की थी। बाद में अप्रैल 2018 में इन मानकों को संशोधित किया गया।

इन सुविधाओं में पीने के पानी के नल, बैठने की व्यवस्था, यूरिनल, शौचालय, प्रतीक्षालय, वाटर कूलर, पंखे, घड़ियां, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, पार्किंग व आवागमन क्षेत्र और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सूचना बोर्ड शामिल हैं। रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया था कि 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर ये सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं।

हालांकि, CAG की रिपोर्ट में सामने आया कि MEA मानकों को लागू किए जाने के दो दशक से अधिक समय बाद भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। ऑडिट में पाया गया कि जांच किए गए केवल 11 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों पर ही इन बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी जबकि 89 प्रतिशत से ज्यादा स्टेशनों पर एक या एक से ज्यादा जरूरी सुविधाओं का अभाव था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 710 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना आय और 1.03 करोड़ से 11.47 करोड़ तक सालाना यात्रियों वाले बड़े रेलवे स्टेशन भी यात्रियों को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहे। जिन प्रमुख स्टेशनों पर कमियां पाई गईं उनमें- नई दिल्ली, हावड़ा, हजरत निजामुद्दीन जंक्शन, सिकंदराबाद, एमजीआर चेन्नई सेंट्रल, अहमदाबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), केएसआर बेंगलुरु, सूरत और आनंद विहार टर्मिनल शामिल हैं।

CAG ने अपने ऑडिट के लिए 5900 से ज्यादा गैर-उपनगरीय (Non-suburban) रेलवे स्टेशनों में से कुल 512 स्टेशनों (करीब 8.66%) का चयन किया। जांच में पाया गया कि सिर्फ 54 स्टेशन (11% से भी कम) ही निर्धारित मानकों के अनुसार सभी न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं (MEA) उपलब्ध करा पाए। ये 54 स्टेशन 13 रेलवे जोनों में फैले हुए हैं।

रिपोर्ट में पता चले बड़े आंकड़े:

-188 स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में पीने के पानी के नल उपलब्ध नहीं थे।
-21 स्टेशनों पर प्रतीक्षालय (Waiting Hall) नहीं थे।
-111 स्टेशनों पर निर्धारित संख्या में यूरिनल नहीं थे।
-59 स्टेशनों पर मानक के अनुरूप टॉयलेट उपलब्ध नहीं थे।
-62 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म शेल्टर या ढके हुए प्लेटफॉर्म का एरिया निर्धारित न्यूनतम मानक से कम था।
-60 स्टेशनों पर घड़ियां नहीं लगी थीं।
-128 स्टेशनों पर निर्धारित संख्या से कम वाटर कूलर थे।
-149 स्टेशनों पर नियमों के अनुसार डस्टबिन उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

दिव्यांग यात्रियों के लिए भी गंभीर कमियां

-राष्ट्रीय लेखा परीक्षक ने दिव्यांगजनों (Divyangjan) के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी बड़ी खामियां पाईं। रिपोर्ट में पता चला है:
-44% स्टेशनों पर रेलिंग वाले मानक रैंप नहीं थे।
-55% स्टेशनों पर दिव्यांगों के लिए रिजर्व पार्किंग की व्यवस्था नहीं थी।
-32% स्टेशनों पर फिसलन-रहित (Non-slippery) रास्ते नहीं थे।
-58% स्टेशनों पर प्रत्येक प्लेटफॉर्म के वैकल्पिक जल बिंदुओं पर दिव्यांग-अनुकूल पेयजल नल उपलब्ध नहीं थे।

यात्री सुविधाओं के लिए मिला बजट भी पूरा खर्च नहीं हुआ

CAG ने यह भी पाया कि 2019-20 से 2023-24 के दौरान यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, हर साल बजट का 36% से 44% हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया जिससे यात्री सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध धन का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो सका।

सफाई और पेयजल व्यवस्था में भी गंभीर खामियां

CAG ने रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता, सफाई और यात्री सुविधाओं के रखरखाव का भी आकलन किया। ऑडिट में वाटर कूलरों के रखरखाव, कचरा इकट्ठा करना, कीट और चूहे नियंत्रण, स्टेशनों पर नालियों या शौचालयों से निकलने वाले सीवेज के निपटान के अलावा शौचालय, यूरिनल और बाथरूम की देखरेख में कई कमियां पाई गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोयंबटूर, पलक्कड़ जंक्शन, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर स्टेशनों के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया।

CAG ने कहा कि 11 रेलवे जोनों के 179 स्टेशनों पर स्वास्थ्य निरीक्षकों ने पेयजल की केमिकल टेस्टिंग ही नहीं कराई। वहीं 6 जोन के 77 स्टेशनों पर निर्धारित अवधि (साल में दो बार) के अनुसार पानी की जांच नहीं की गई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ‘यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी प्रोटोकॉल’ में निर्धारित सभी स्टैंडर्ड के अनुसार चयनित 512 में से किसी भी स्टेशन पर पानी की पूरी जांच नहीं की गई।

हर साल 700 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद बनी रहीं खामियां

रिपोर्ट बताती है कि रेलवे स्टेशनों की सफाई और स्वच्छता पर हर साल करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद ये कमियां दूर नहीं हो सकीं। इतना ही नहीं स्टेशन स्वच्छता पर 2022-23 में बजट से 72.66 करोड़ रुपये अधिक और 2023-24 में 9.20 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया गया। लेकिन इसके बावजूद सफाई और रखरखाव की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा।

CAG ने रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता, सफाई और यात्री सुविधाओं के रखरखाव का भी आकलन किया। इसमें वाटर कूलर के रखरखाव, कचरा उठाने, कीट और चूहों पर नियंत्रण, स्टेशनों पर नालियों या टॉयलेट से निकलने वाले सीवेज की निकासी और शौचालय, यूरिनल व बाथरूम के रखरखाव में कई खामियां पाई गईं।

इसके अलावा कोयंबटूर, पलक्कड़ जंक्शन, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर स्टेशनों के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया।

CAG ने कहा कि 11 जोन के 179 स्टेशनों पर स्वास्थ्य निरीक्षकों ने पीने के पानी का रासायनिक विश्लेषण नहीं किया। वहीं 6 जोन के 77 स्टेशनों पर निर्धारित समय-सीमा के अनुसार पानी की जांच नहीं हुई। नियमों के मुताबिक पेयजल की जांच साल में दो बार होनी चाहिए।

ऑडिट में यह भी पाया गया कि ‘यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी प्रोटोकॉल’ में निर्धारित सभी मानकों की जांच 512 में से किसी भी चयनित स्टेशन पर नहीं की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता बनाए रखने पर हर साल करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद ये कमियां बनी हुई हैं। स्टेशन स्वच्छता पर 2022-23 में बजट आवंटन से 72.66 करोड़ रुपये अधिक और 2023-24 में 9.20 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए गए।

निगरानी कमजोर, शिकायतों में बढ़ोतरी

CAG ने पाया कि जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव काउंसिल (ZRUCC) और डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव काउंसिल (DRUCC) को यात्रियों की सुविधाओं की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। निर्धारित समय के अनुसार साल में तीन बार बैठक नहीं कर रहे थे।

इसके अलावा, RailMadad के जरिए दर्ज यात्री सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों में भी बढ़ोतरी देखी गई। इनमें चिकित्सा सहायता, सफाई, खराब इलेक्ट्रिसिटी डिवाइसेज और रेलवे स्टेशनों पर पानी की उपलब्धता से संबंधित शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

शिकायत या सुझाव दर्ज कराने वाले यात्रियों में से 2022-23 में 37 प्रतिशत और 2023-24 में 42 प्रतिशत ने अपनी शिकायतों के समाधान से असंतुष्टि जताई।