West Bengal News: रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुब्रता गुप्ता को शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का सलाहकार नियुक्त किया गया है। उन्होंने इससे पहले पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान स्पेशल ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया था।
हावड़ा के नबन्ना स्थित कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की तरफ से एक अधिसूचना जारी की गई है। इसमें कहा गया, “राज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में डॉ. सुब्रता गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) को नियुक्त किया है। यह नियुक्ति लोक सेवा के हित में की जा रही है।”
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के सफल समापन के बाद चुनाव आयोग ने गुरुवार को गुप्ता को स्पेशल ऑब्जर्वर के पद से हटा दिया। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के लिए आदर्श आचार संहिता को भी हटा दिया है। केवल साउथ 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में आचार संहिता अभी जारी है। यहां पर 21 मई को फिर से वोटिंग होगी और उसके बाद 24 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पूर्व केंद्रीय सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव
डॉ. गुप्ता पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। अपने तीन दशकों से अधिक के विशिष्ट करियर के दौरान, डॉ. गुप्ता ने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने जल संसाधन जांच एवं विकास विभाग में प्रधान सचिव के रूप में भी कार्य किया और जलपाईगुड़ी और बर्धमान के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यभार संभाले।
शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के सीएम
शनिवार को शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। वे एक छोटे से मंत्रिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह राज्य में भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार होगी और 55 सालों में पहली बार ऐसा होगा कि सरकार का नेतृत्व कोलकाता के बाहर का कोई व्यक्ति करेगा।
शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले से हैं और उन्होंने अपना ज्यादातर कार्य इसी क्षेत्र में और इसके आसपास ही किया है। कोलकाता के बाहर से अंतिम मुख्यमंत्री अजय कुमार मुखर्जी थे। वह भी पूर्वी मेदिनीपुर से ही थे और उनका कार्यकाल जून 1971 में समाप्त हुआ था।
नंदीग्राम से सत्ता के केंद्र तक: शुभेंदु अधिकारी का सफर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में टकराव अगर किसी एक चेहरे से पहचाना जाता है, तो वह शुभेंदु अधिकारी हैं। यह वह नेता नहीं हैं जो बयान देकर माहौल संभालते हैं, बल्कि वह हैं जो सीधे मैदान में उतरकर लड़ाई तय करते हैं। नंदीग्राम से निकली उनकी राजनीति ने सिर्फ जमीन का विवाद नहीं बदला, बल्कि सत्ता की दिशा भी मोड़ दी। और फिर वही शुभेंदु, जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपाही माने जाते थे, 2020 में पाला बदलकर उसी सत्ता के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता बन गए। पढ़ें पूरी खबर…
