Tamil Nadu Politics: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पूर्व विधायक हसन मौलाना पर तीन साल के लिए संसदीय और राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई इसलिए हुई है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने चुनावी खर्च का सही और सटीक विवरण जमा नहीं किया था, और यह साबित भी हो गया।

दरअसल, 28 अगस्त के निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार मौलाना ने शुरुआती तौर पर 17 लाख रुपये का चुनावी खर्च घोषित किया था। हालांकि, आयोग की जांच में 32 लाख रुपये की अतिरिक्त अघोषित राशि का पता चला, जिससे उनका कुल चुनावी खर्च बढ़कर 49 लाख रुपये हो गया।

कानून के उल्लंघन का मामला

चुनाव आयोग का कहना है कि पूर्व विधायक ने तत्कालीन तय सीमा (30 लाख रुपये) से काफी अधिक खर्च किया था। इसके चलते आयोग ने कहा है कि मौलाना ने कानून का उल्लंघन किया था।

प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन पर सख्त रुख

आयोग ने स्पष्ट किया कि हसन मौलाना अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लगभग 30 लाख रुपये का हिसाब देने में विफल रहे, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।

निर्वाचन आयोग ने जोर देकर कहा, “चुनाव में किए गए वास्तविक खर्च का सही ब्योरा न सौंपना चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता को प्रभावित करता है।”

सुनवाई में नहीं हुए शामिल, आयोग ने सुनाई सजा

चुनावी खर्च में गड़बड़ी और विसंगतियों पर सफाई देने के लिए निर्वाचन आयोग ने हसन मौलाना को जनवरी और फरवरी में कई बार सुनवाई के लिए बुलाया था, लेकिन वे अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुए।

अंततः आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि उन्होंने जानबूझकर सही खाते छिपाए और चुनावी कानूनों का उल्लंघन किया, जिसके बाद उन्हें तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया।

यह भी पढ़ें: सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान के सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने पर हुआ विवाद, पुलिस ने दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर में समाजवादी पार्टी (SP) के जिला उपाध्यक्ष और पूर्व जिलाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान द्वारा नमाज पढ़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय बजरंग दल सहित कई हिंदू संगठनों ने सरकारी परिसर में धार्मिक गतिविधि को लेकर कड़ा विरोध किया है। पढ़िए पूरी खबर…