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बीजेपी सांसदों ने खड़े हो किया अभिवादन, पर अमित शाह ने नहीं दिया कोई भाव, अनदेखा कर निकल गए

जब अमित शाह सदन से बाहर निकल रहे थे तब बीजेपी के कई सांसद उनके सम्मान में खड़े हो गए और उन्हें अभिवादन करना चाहते थे लेकिन शाह ने एक-दो के लिए सिर हिलाया जबकि बाकियों को नजरअंदाज कर बाहर निकल गए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Express photo by Anil Sharma)

राज्यसभा में नागरिक संशोधन बिल पेश करने और उस पर चर्चा करने के करीब एक घंटे बाद जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोपहर 1.40 बजे सदन से निकल रहे थे तब गलियारे के दोनों ओर सदन में सदस्यों की संख्या कम हो चुकी थी जबकि उस वक्त सदन में लंच ब्रेक नहीं था। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, जो बहस शुरू होने के बाद से लगातार बैठे थे, कुछ मिनट पहले ही सदन से बाहर निकले थे।

जब अमित शाह सदन से बाहर निकल रहे थे तब बीजेपी के कई सांसद उनके सम्मान में खड़े हो गए और उन्हें अभिवादन करना चाहते थे लेकिन शाह ने एक-दो के लिए सिर हिलाया जबकि बाकियों को नजरअंदाज कर बाहर निकल गए। हालांकि सदन छोड़ने से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से हाथ जरूर मिलाया।

नागरिकता संशोधन बिल पेश करने से लेकर उस पर बहस और वोटिंग के दौरान भी पीएम मोदी सदन में नहीं थे, इसलिए अमित शाह ही संसद में CAB का चेहरा थे। हालांकि, राज्यसभा में चर्चा उतनी जुझारू नहीं थी, जितनी लोकसभा में थी। अधिकांश समय ट्रेजरी और विपक्षी बेंच के सदस्य एक-दूसरे को रोकने-टोकने या हस्तक्षेप करने से बचते रहे। हालांकि, एक वक्त ऐसा भी आया जब गृह मंत्री की बात पर प्रतिक्रिया स्वरूप विपक्षी सांसद विरोध में उठ खड़े हुए।

बिल पर चर्चा के दौरान शाह ने कहा कि यह संभवत: एक “संयोग” है कि जो बयान कांग्रेस द्वारा दिए गए, ठीक वैसे ही बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तरफ से थे, “घुल-मिल जाते हैं।” इस पर कांग्रेस के कई सदस्यों ने आपत्ति की लेकिन शाह ने अपनी बात जारी रखी। इस दौरान शाह के साथ टीएमसी सांसदों की भी गर्मागरम बहस हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री ने साल 2005 में लोकसभा में ममता बनर्जी के एक बयान का उल्लेख किया। इस पर टीएमसी सांसदों ने कहा कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं।

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