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कांग्रेस फर्जी कागजों के जरिए हमें फंसा रही है, सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी के उपर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बदनाम करने का आरोप लगाया है। कहा कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में सुधार किया गया था। बावजूद कांग्रेस ने पहले की गलतियों के सहारे एक प्रतिष्ठित संस्था को बदनाम करने की कोशिश की।

भोपाल के पुलिस होमगार्ड मुख्यालय की कैंटीन की टेबल पर मिले लिफाफा बंद डाक मतपत्रों को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी.एल कांताराव ने वास्तविक मतपत्र मानते हुए बुधवार को सफाई दी और कहा है कि वह पूरी तरह सुरक्षित थे।

चुनाव आयोग ने सोमवार (8 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। आयोग ने आरोप लगाया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में सुधार किया गया था, लेकिन कांग्रेस बोगस वोटर का अारोप लगा परेशान और बदनाम करने का प्रयास कर रही है। आयोग ने कहा था कि उसने खुद जून महीने में मतदाता सूची में सुधार किया गया था। इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका के माध्यम से जांच की मांग की गई थी। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने जस्टिस एके सिक्री और अशोक भूषण की खंडपीठ से कहा कि 3 जून को कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग को फर्जी मतदाता से संबंधित जानकारी दी गई थी। इसके बाद पार्टी को 8 जून को यह सूचित किया गया कि समस्या का सामाधान हो गया है। विकास ने आगे बताया, “31 जुलाई को मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था। इसमें साफ्टवेयर द्वारा गलितयों को चिन्हित कर सुधार भी किया गया था। वोटर मतदाता सूची ठीक होने के बावजूद भी कांग्रेस ने पहले की गलतियों के सहारे एक प्रतिष्ठित संस्था को बदनाम करने की कोशिश की। चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जाना जाता है, लेकिन कांग्रेस ने जाली दस्तावेजों का उपयोग कर आयोग की छवी धूमिल की।”

वहीं, कमलनाथ और सचिन पायलट के मामलों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और विवेक तनखा ने काफी संख्या में मध्य प्रदेश और राजस्थान में फर्जी मतदाताओं को दिखाने के लिए एक वोटर लिस्ट को दिखाया, जिसमें 36 वोटरों के लिए एक ही तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। सिब्बल ने कहा, “हम डुप्लीकेट वोटर्स मामले में सीबीआई जांच चाहते हैं और इन फर्जी मतदाताओं को शामिल करने वाले अधिकारियों पर जिम्मेदारी चाहते हैं। चुनाव आयोग किसके लिए काम कर रही है? हम अारोप लगा रहे हैं कि 60 लाख फर्जी वोटर हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि 24 घंटे के अंदर ऐसे वोटर्स को हटा दिया गया। हम इस मामले की जांच चाहते हैं।” सिब्बल की दलील के बाद चुनाव आयोग के वकील खड़े हो गए और जांच की मांग का समर्थन किया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो अरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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