ताज़ा खबर
 

डोकलाम विवाद पर संसद में बोलीं सुषमा स्‍वराज- तीनों देश मिलकर सुलझाएंगे, 2012 वाला समझौता प्रभावी

सुषमा ने सदन में कहा कि 'पीएम मोदी का काबुल से लाहौर जाना डिप्‍लोमेसी का हिस्‍सा था।'

Author Updated: August 4, 2017 10:40 AM
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर के कहा, हम आपकी सात वर्षीय बेटी की ‘ओपन हार्ट सर्जरी’ के लिए वीजा दे रहे हैं। (PTI)

विदेश मामलों की मंत्री सुषमा स्‍वराज ने गुरुवार (3 अगस्‍त) को संसद में डोकलाम मुद्दे पर बयान दिया। विपक्ष के हंगामे के बाद बयान देने पहुंची सुषमा ने केंद्र सरकार द्वारा पड़ोसी देशों के लिए उठाये गए कदमों का जिक्र करते हुए कांग्रेस व अन्‍य विपक्षियों के तर्कों को नकार दिया। सुषमा ने कहा कि ‘नेहरू (जवाहर लाल) ने निजी सम्‍मान कमाया, मोदी ने विश्‍व में भारत को सम्‍मान दिलाया।’ सुषमा ने श्रीलंका में आई बाढ़ के दौरान की गई मदद का जिक्र किया और इसके बाद नेपाल की चर्चा की। उन्‍होंने कहा, ”नेपाल में भूकंप आया तो सबसे पहले हमारी सरकार मदद लेकर पहुंची। 17 साल तक कोई प्रधानमंत्री वहां नहीं गया था, उस दौरान आपकी (यूपीए) सरकार थी। आपका काम हम पूरा कर रहे हैं।” सुषमा ने कहा, ”आप किन पड़ोसी देशों की बात कर रहे हैं कि हमारे साथ खड़ा है या नहीं। आप बताइए कौन देश हमारे साथ नहीं है। नेपाल से हमारे संबंध अच्‍छे हैं, श्रीलंका से बेहतर संबंध हैं, बांग्‍लादेश से इससे बेहतर संबंध कभी नहीं रहे। भूटान हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है।’

चीन के मुद्दे पर सुषमा ने लिखित बयान पढ़ते हुए कहा, ”भारत की स्थिति इस मामले में वही है जो विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है। भारत और चीन के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार बात होती रहती है। भारत, चीन और भूटान के बीच ट्राई-जंक्‍शन पर बात हो रही है। सीमांकन को लेकर आपसी सहमति है। 2012 वाला समझौता अभी प्रभावी है। चीन ने सिक्किम क्षेत्र में सीमांकन का प्रस्‍ताव दिया है। चीन ने नेहरू के कई पत्रों का उल्‍लेख इस संबंध में किया है। हाल के दिनों में चीन ने भारत-चीन बॉर्डर पर शांति बनाये रखने की बात कही है। हम भूटान से परंपरागत सहयोग बनाए रखेंगे।”

सुषमा ने राज्‍यसभा में कहा कि ‘पीएम मोदी का काबुल से लाहौर जाना डिप्‍लोमेसी का हिस्‍सा था। 25 दिसंबर को नवाज शरीफ का जन्‍मदिन था। कोई ये कहे कि हमने पाकिस्‍तान के साथ दोस्‍ती की पहल नहीं की। हां, पठानकोट के बाद हमने बातचीत के लिए शर्त रख दी। स्थितियां खराब हुईं बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद, जब नवाज शरीफ ने संसद में उसे शहीद बताया। तब से चीजें खराब हुईं। जिस दिन आतंकवाद को पोसना बंद कर देंगे, बातचीत शुरू हो जाएगी।’

विदेश मंत्री ने डोकलाम मुद्दे पर कहा कि ‘सबसे बड़े प्रमुख विपक्षी दल के नेता (राहुल गांधी) ने चीन की स्थिति जानने के लिए भारत के नेतृत्‍व को पूछने के बजाय, चीनी राजदूत से मुलाकात की। आप (आनंद शर्मा) भी उस मीटिंग में मौजूद थे।’ इस पर शर्मा ने कहा कि चीनी राजदूत ने खुद विपक्ष के लोगों से बातचीत की गुजारिश की थी। सुषमा ने आगे कहा कि ‘पहले विपक्ष को भारत का दृष्टिकोण समझाना चाहिए था, उसके बाद चीनी राजदूत को बताना चाहिए था कि ये हमारा पक्ष है।’

सुषमा ने कहा, ”किसी भी समस्‍या का समाधान युद्ध से नहीं निकलता। युद्ध के बाद भी संवाद करना पड़ता है। तो बुद्धिमत्‍ता ये है कि बिना लड़े सब सुलझा लो। सेना है, युद्ध के लिए तैयार है मगर युद्ध से समाधान नहीं निकलता। आपने कहा कि अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाइए तभी पड़ोसियों को लगेगा कि हम मजबूत हैं। आज सामरिक क्षमता नहीं, आर्थिक क्षमता से तय होता है कि कौन ज्‍यादा मजबूत है। मैं चाहती हूं कि भारत के विकास में पड़ोसी देशों को भी लाभ हो। हमारी जो आर्थ‍िक क्षमता बढ़ रही है, उसमें बड़ा हिस्‍सा चीन से आता है। अगर द्विपक्षीय चर्चा होगी तो निश्चित तौर पर समाधान निकलेगा।”

सुषमा ने अमेरिकी एच1 वीजा की बात करते हुए कहा कि ‘जब दिसंबर 2004 में यूपीए की सरकार थी तो एक बिल पारित हुआ और संख्‍या 65,000 कर दी गई, इसके अलावा वहां से पीएचडी करते हुए 20 हजार यानी कुछ 85 हजार लोगों को वीजा मिलता था। ये स्‍पाउज वीजा की जो बात कर रहे हैं, यह मोदी सरकार ने दिलाया है। ये मोदी सरकार की सफलता है कि आज रूस भी भारत के साथ है और अमेरिका भी हमारे साथ है।”

सुषमा ने सदन में कहा, ”इजरायल के बारे में उनकी पूरी हिस्‍ट्री रामगोपाल (यादव) जी ने दी। मैं खड़े होकर पूरी दृढ़ता से कहना चाहती हूं कि इजरायल हमारा मित्र जरूर है मगर फलस्‍तीन कॉज के लिए भी हम काम कर रहे हैं। मैं स्‍वयं फलस्‍तीन गई और वहां बैठक गई, मैं पहले फलस्‍तीन गई फिर इजरायल। हमारे राष्‍ट्रपति भी पहले फलस्‍तीन गए फिर इजरायल, प्रधानमंत्री जी इजरायल के साथ संबंधों की 25वीं वर्षगांठ पर गए थे इसलिए वह फलस्‍तीन नहीं गए। जब मैं गईं तो फलस्‍तीनी विदेश मंत्री ने मुझसे कहा कि मैं चाहता हूं कि मसला सुलझ जाए और इजरायल का झंडा पूरे अरब वर्ल्‍ड पर फैले। उन्‍होंने कहा कि इजरायल के साथ आपकी दोस्‍ती है, उसका लाभ उठाकर के आप हमारा मसला सुलझाने में हमारी मदद कीजिए।”

सदन में आगे बोलते हुए सुषमा ने कहा, ”मोदी सरकार आने से पहले पश्चिम एशिया के लोगों को चिंता थी कि मोदी के आने के बाद भारत से उनके रिश्‍ते खराब हो जाएंगे क्‍योंकि वहां मुस्लिम ज्‍यादा हैं। मगर आज अरब वर्ल्‍ड के साथ किसी के सबसे अच्‍छे रिश्‍ते हैं तो वो भारत है। जब सऊदी अरब के दौरे पर हमारे प्रधानमंत्री गए तो वहां के राजा ने सर्वोच्‍च सम्‍मान उन्‍हें दिया। हमने यमन से लोगों को निकाला तो झगड़ा सऊदी और यमन के बीच था। प्रधानमंत्री ने मेरे सामने सऊदी नरेश से बात की और दो घंटे रोज के लिए गोलीबारी बंद करने पर सहमत किया। पूरे यमन में लड़ाई हो रही थी, कोई बस चल नहीं सकती थी। समुद्र में लुटेरे थे सिर्फ हवा का रास्‍ता था। 9 से 11 रोज, सऊदी गोलीबारी रोकता था और हवाई अड्डे खुलता था। साढ़े चार हजार लोग हम अपने निकाल कर लाए और करीब 2000 विदेशियों को सकुशल बाहर निकाला।”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 GST काउंसिल सुप्र‍िटेंडेंट पर व्‍यापारियों से रिश्‍वत लेने का आरोप, CBI ने दो को किया अरेस्‍ट
2 संसद में मीनाक्षी लेखी ने बताए गौ-मूत्र के फायदे, कहा- इससे पूर्व अफसर की बीमारी ठीक हुई