सरकार ने लोकसभा में कहा है कि E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को बताया कि अब तक के परीक्षणों और वाहनों के इस्तेमाल से ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि E20 पेट्रोल से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा हो या वाहन के प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ा हो।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गडकरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि E20 ईंधन लागू करने से पहले फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, विभिन्न पुर्जों की कंपैटिबिलिटी, उत्सर्जन और उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता जैसे सभी पहलुओं की टेस्टिंग की गई थी। इसके बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया।
उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में ऑटोमोबाइल कंपनियां, ऑटो पार्ट्स निर्माता, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), वाहन परीक्षण एजेंसियां, तेल विपणन कंपनियां, एथेनॉल उत्पादक, चीनी और अनाज उद्योग समेत सभी संबंधित पक्षों को शामिल किया गया।
ऐथनॉल मिक्स की वजह से इंजन नहीं हो रहे फेल
गडकरी ने कहा कि पिछले साढ़े तीन सालों से E15+ और ढाई वर्षों से E19-E20 मिश्रित पेट्रोल का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ईंधनों पर चली हैं। लेकिन एथेनॉल मिक्स की वजह से इंजन फेल होने या बड़े पैमाने पर वाहन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड भी बताते हैं कि E20 पेट्रोल के कारण इंजन में असामान्य जंग, घिसाव या वाहन की उम्र कम होने जैसी समस्या नहीं मिली है। वाहन निर्माता कंपनियां E20 मानकों के अनुरूप ईंधन इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को पहले की तरह वारंटी भी दे रही हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें करीब 1.5 करोड़ पुराने (लीगेसी) वाहन भी शामिल थे। जांच में E20 ईंधन से जुड़े इंजन नुकसान, अतिरिक्त जंग या पुर्जों की उम्र घटने जैसी कोई समस्या नहीं पाई गई। इसी तरह एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी E20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में नुकसान की दर सामान्य से अधिक नहीं होने की जानकारी दी है।
माइलेज पर क्या बोली सरकार?
माइलेज में कमी के सवाल पर सरकार ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और वाहन निर्माताओं के अध्ययनों के अनुसार E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता करीब 2 से 6 प्रतिशत तक घट सकती है। हालांकि यह अंतर सड़क की स्थिति, वाहन चलाने के तरीके और रखरखाव जैसे कई अन्य कारणों पर भी निर्भर करता है।
अब पेट्रोल पंपों पर मिल रहा है सिर्फ E20
गडकरी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के अनुसार देशभर के उनके पेट्रोल पंपों पर फिलहाल सामान्य पेट्रोल के रूप में E20 पेट्रोल ही उपलब्ध है। E0 या E10 पेट्रोल खुदरा स्तर पर नहीं बेचा जा रहा है। इसलिए रसीद पर एथेनॉल की मात्रा अलग से छापने या कम मिश्रण वाले ईंधन का अलग बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं समझी गई।
पुराने BS-III वाहनों पर क्या असर?
एक दिन पहले राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में गडकरी ने कहा था कि 2005 से 2016 के बीच बने BS-III वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर कुछ रबर के पुर्जे और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अध्ययनों में ऐसे वाहनों के समग्र प्रदर्शन, ड्राइवेबिलिटी, स्टार्ट होने की क्षमता और धातु या प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया।
