देशभर के पेट्रोल पंपों पर अब E20 पेट्रोल तेजी से उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने इसे तय समय से पहले लागू कर दिया है। इसका मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और देश में बनने वाले एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या जमीन पर लोगों का अनुभव भी ऐसा ही है? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने दिल्ली के जामिया नगर इलाके में बाइक और कार चालकों, खासकर ई-कॉमर्स डिलीवरी करने वाले युवाओं से बात की, जो रोज कई घंटे सड़क पर रहते हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट में कई लोगों ने दावा किया कि ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों में पहले जैसी परफॉर्मेंस नहीं रही। एक डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि उसकी 2023 मॉडल की बाइक कई बार चलते-चलते बंद हो जाती है। उसका कहना था कि बाइक पूरी तरह ई20 के लिए तैयार नहीं है। हालांकि वह यह भी मानता है कि जब सरकार ने इसे लागू किया है तो आम लोगों के पास इसे इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उसका कहना है कि रोज काम पर निकलना मजबूरी है, इसलिए जो पेट्रोल पंप पर मिलेगा, वही भरवाना पड़ेगा।

हालांकि सभी लोगों का अनुभव एक जैसा नहीं था। एक अन्य डिलीवरी बॉय ने कहा कि उसे ई20 पेट्रोल से कोई परेशानी नहीं हुई। उसके मुताबिक बाइक पहले की तरह चल रही है और माइलेज भी ठीक मिल रहा है। उसने कहा कि उसे तो ई20 से फायदा ही महसूस हुआ है। इससे यह साफ होता है कि अलग-अलग गाड़ियों और उनकी तकनीक के अनुसार लोगों का अनुभव भी अलग हो सकता है।

लेकिन ज्यादातर लोगों ने माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस को लेकर शिकायत की। एक युवक ने बताया कि पहले उसकी बाइक एक टैंक पेट्रोल में करीब तीन दिन चलती थी, लेकिन अब दो दिन में ही दोबारा पेट्रोल भरवाना पड़ता है। उसका कहना है कि पहले बाइक 65 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती थी, जबकि अब 60 किलोमीटर प्रति लीटर से भी कम मिल रहा है। उसने यह भी कहा कि बाइक में पहले जैसी पिकअप नहीं रही और ज्यादा वजन होने पर इंजन कमजोर महसूस होता है।

सरकार का कहना है कि नुकसान का कोई प्रमाण नहीं

कई वाहन मालिकों ने बताया कि जब उन्होंने अपनी गाड़ियों को मैकेनिक के पास दिखाया तो उन्हें बताया गया कि ई20 पेट्रोल की वजह से इंजन पर असर पड़ रहा है। कुछ मैकेनिकों का कहना है कि स्पार्क प्लग जल्दी खराब हो रहे हैं, फिल्टर चोक हो रहे हैं और इंजन की सफाई पहले की तुलना में ज्यादा करनी पड़ रही है। उनका दावा है कि पहले जिन इंजनों को कई साल तक खोलने की जरूरत नहीं पड़ती थी, अब उनमें कम समय में ही दिक्कतें आने लगी हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि ई20 पेट्रोल से इंजन को स्थायी या गंभीर मैकेनिकल नुकसान होता है।

सरकार की ओर से ई20 पेट्रोल को लेकर कई बड़े दावे किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति से वर्ष 2014-15 से अब तक 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है। साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में करीब 700 लाख टन की कमी आई है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों को भी बाजार मिलता है और “मेक इन इंडिया” अभियान को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि इसका कच्चा माल देश में ही उपलब्ध होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा (एनर्जी कंटेंट) थोड़ी कम होती है। इसी वजह से कुछ गाड़ियों में माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है। सरकार भी मानती है कि ई20 के इस्तेमाल से इंजन की कार्यक्षमता में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन उसका दावा है कि ई20 के अनुरूप बने बीएस-6 और नए मॉडल के इंजन इसके लिए डिजाइन किए जा रहे हैं। वहीं पुरानी गाड़ियों में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, खासकर अगर वे ई20 के अनुकूल नहीं हैं।

दिलचस्प बात यह है कि हाल में 315 जिलों के 36,000 लोगों पर किए गए एक सर्वे में करीब दो-तिहाई लोगों ने ई20 पेट्रोल को लेकर चिंता जताई, जबकि केवल 12 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया। लोगों की सबसे बड़ी शिकायत माइलेज में कमी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने की रही। दूसरी ओर, ब्राजील, अमेरिका, चीन, थाईलैंड और कई मध्य अमेरिकी देशों में भी लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है। भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में ई20 पेट्रोल का उद्देश्य भले ही पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाना हो, लेकिन ग्राउंड पर वाहन मालिकों के अनुभव अलग-अलग हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि नई तकनीक और लोगों के भरोसे के बीच का यह अंतर कैसे कम किया जाए।

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एथेनॉल सप्लाई का कोटा बढ़ाने के लिए कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और शील नागू की बेंच ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने उस पहले के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें 2025-26 के लिए एथेनॉल का कोटा बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक