ताज़ा खबर
 

एमपी, राजस्थानः बीजेपी में भी ‘नामदारों’ की कमी नहीं, कांग्रेस से ज्यादा हैं बड़े नेताओं के परिवार से जुड़े विधायक

राजनीति में वंशवाद की राजनीति की खूब चर्चा होती है। भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहती है। लेकिन राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हुए या हो रहे चुनावों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भाजपा में भी कई 'नामदार' हैं।

भाजपा, कांग्रेस पर वंशवाद की राजनीति के आरोप लगाती है, लेकिन भाजपा में भी नामदार कम नहीं हैं!

दीपांकर घोष, दीप मुखर्जी

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सभी चुनाव प्रचार बुधवार को समाप्त हो गए। प्रचार के दौरान एक मुद्दे पर बहुत ज्यादा बात हुई, जो है राजनीति में परिवारवाद। पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कांग्रेस और गांधी परिवार पर यह आरोप लगाते हैं कि वे परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी तेलंगाना के सीएम केसीआर राव पर आरोप लगाया है कि सीएम सरकारी नौकरियों में अपने परिवार को तरजीह देते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस ने राजस्थान, एमपी और छत्तीसढ़ के विधानसभा का आकलन किया है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में बड़े नेताओं के परिवार से जुड़े वंशवादी विधायकों की तादाद बीजेपी में कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस इस मामले में बीजेपी से आगे है। वंशवादी विधायक वे हैं, जिनके परिवार का कोई नजदीकी सदस्य सक्रिय राजनीति में हो। ये नजदीकी खून के रिश्ते या शादी की वजह से हो सकता है।

मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। इनमें बीजेपी के 165 विधायक हैं। इनमें से 20 का वंशवादी कनेक्शन है। वहीं, 58 सदस्यों वाली कांग्रेस में ऐसे विधायकों की संख्या 17 है। संख्याबल में बीजेपी विधायक भले ही ज्यादा हों, लेकिन जब विधायकों में प्रतिशतता की बात आती है तो कांग्रेस 29 प्रतिशत के साथ बीजेपी के 12 प्रतिशत ऐसे विधायकों से कहीं आगे है। अब बात करते हैं राजस्थान की। 200 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में बीजेपी के 160 विधायकों में 23 का ‘नामदार’ कनेक्शन है। वहीं, 25 सदस्य वाले कांग्रेस में ये संख्या 8 है। छत्तीसगढ़ में 90 सीट वाली विधानसभा में बीजेपी के 49 विधायकों में 3 ‘नामदार’ जबकि कांग्रेस के 39 विधायकों में 6 ‘नामदार’ हैं।

इन ‘नामदार’ विधायकों से अधिकतर मानते हैं कि उन्हें अपने पिता या मां के ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से अच्छी शुरुआत मिली। वहीं, कुछ की शिकायत है कि अन्य के मुकाबले उनसे ज्यादा अपेक्षाएं की जाती हैं। हेमंत खंडेलवाल बेतुल से बीजेपी विधायक हैं। उनके पिता दिवंगत विजय खंडेलवाल बीजेपी से चार बार सांसद रह चुके थे। हेमंत का मानना है कि अगर आपका खुद का वजूद नहीं तो सब कुछ धीरे धीरे खत्म हो जाता है। उनके मुताबिक, किसी का बेटा होने से पहचान तो मिल जाती है लेकिन आपसे ज्यादा उम्मीद करते हैं। अगर आप उम्मीदों पर खरा उतरते हैं या अपेक्षा से बेहतर करते हैं तो लोग स्वीकार कर लेते हैं। हेमंत का मानना है कि राजनीतिक परिवार से न होने पर लोगों की अपेक्षाएं भी कम होती हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App