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Shiv Sena Dussehra Rally: 56 साल बाद दशहरा पर मुंबई में दो रैलियां, बाला साहेब की विरासत पर कब्जे को लेकर शिवाजी पार्क में जुटे उद्धव तो शिंदे का BKC में डेरा

Maharashtra News, Dussehra Rally at Shivaji Park in Mumbai ………रैली से पहले शिंदे ने अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंशराय बच्चन के विचार को साझा कर उद्धव पर तंज कसा।

Shiv Sena Dussehra Rally: 56 साल बाद दशहरा पर मुंबई में दो रैलियां, बाला साहेब की विरासत पर कब्जे को लेकर शिवाजी पार्क में जुटे उद्धव तो शिंदे का BKC में डेरा
शिवाजी पार्क दशहरा रैली 2022,Shiv Sena Dussehra Rally बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स के मैदान पर सजा शिंदे गुट का स्टेज। (एक्सप्रेस फोटो)

Uddhav Thackeray vs Eknath Shinde Dussehra rally: 56 साल पहले शिवसेना का जन्म हुआ तो अपने अंतिम समय तक पार्टी सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे ने हर साल दशहरा पर मुंबई के शिवाजी पार्क में रैली की। दशहरा रैली के दौरान होने वाला उनका भाषण सुनने के लिए शिवसैनिक महाराष्ट्र के कोने-कोने से शिवाजी पार्क में जमा होते थे। साल भर का उनका प्रोग्राम बाला साहेब के भाषण से तय होता था। शिवसेना के लिए दशहरा रैली एक प्रतीक बन गया था। लेकिन ये पहली बार है कि दशहरा पर शिवसेना के दो दिग्गज नेता अलग-अलग रैलियां कर रहे हैं। दोनों का दावा है कि बाला साहेब की विरासत के सच्चे हकदार वही हैं।

शिवाजी पार्क में रैली को उद्धव ठाकरे अपना हक मानते हैं। यही वजह रही कि रैली के आयोजन स्थल को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने उद्धव ठाकरे को शिवाजी पार्क में रैली करने की अनुमति दी जबकि महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे को इसके लिए बीकेसी (बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स) का MMRDA मैदान मिला। इसकी खासियत है कि ये मैदान उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के नजदीक है। पुलिस भी रैली को लेकर खासी संजीदा है। शिवाजी पार्क के साथ बीकेसी पर खासी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई।

दोनों ही धड़े बाला साहेब की विरासत पर कब्जे के साथ खुद को हिंदू विचारधारा के सबसे बड़े अलंबरदार के तौर पर पेश कर रहे हैं। उद्धव बाला साहेब की विरासत पर कब्जे का आरोप लगातर शिंदे कैंप पर खासे हमलावर रहे हैं। वहीं रैली से पहले शिंदे ने अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंशराय बच्चन के विचार को साझा कर उद्धव पर तंज कसा। हरिवंश राय ने कहा था कि मेरे बेटे, बेटे होने से मेरे उत्तराधिकारी नहीं होंगे, जो मेरे उत्तराधिकारी होंगे, वो मेरे बेटे होंगे। उनकी रैली के मंच पर एक पोस्टर भी दिखा, जिसमें लिखा था कि गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं।

बाला साहेब की विरासत पर अपने दावे को मजबूत करने को लेकर दोनों ही गुट आमादा हैं। बाला साहेब की दशहरा रैली में धनुष बाण के साथ दहाड़ते हुए टाइगर का चित्र दिखता था। खास बात है कि दोनों ही गुट इस बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों रैलियों का भाषण रात 8 बजे के बाद शुरू होगा। उद्धव की रैली में उनके बेटे आदित्य पहली बार दशहरा पर बोलते दिखेंगे।

ध्यान रहे कि बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना में दो फाड़ होने की वजह से शिवसैनिक एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच बंट चुके हैं। ऐसे में दशहरा रैली का खासा महत्व है। दोनों गुटों में से जो भारी पड़ा वो खुद के असली होने का दावा करेगा। लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं है। बीएमसी का चुनाव नजदीक है। यहां अभी तक शिवसेना का वर्चस्व रहा है। दशहरा रैली से बीएमसी चुनाव की पटकथा भी लिखे जाने के आसार हैं।

बीएमसी का 40,000 करोड़ रुपये का बजट है। पिछले 20 सालों से शिवसेना ही चुनाव को जीतती आ रही है। लेकिन सूबे की सत्‍ता में साझीदार बनने के बाद भाजपा की निगाह इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। हालांकि चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन भाजपा उसके लिए बनाई रणनीति पर काम करना शुरू कर चुकी है। दशहरे के आयोजन को भाजपा एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है।

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First published on: 05-10-2022 at 06:06:38 pm
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