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अंग्रेजों के खिलाफ जिस आंदोलन की गांधी, नेहरू और पटेल ने की थी शुरुआत, हिन्दू महासभा ने नहीं दिया था साथ

महात्मा गांधी और अन्य नेताओं के नेतृत्व में शुरू किए गए इस आंदोलन को भारतीय उपमहाद्वीप से ब्रिटिश साम्राज्य के अस्तित्व को कमजोर करने के क्षण में देखा गया।

Author नई दिल्ली | Updated: November 14, 2019 3:28 PM
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी।

भारत इस साल अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किए गए ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 76वीं वर्षगांठ मना रहा है। आठ अगस्त, 1942 को कांग्रेस ने अंग्रेजों के खिलाफ इस आंदोलन की शुरुआत उस वक्त की थी जब दूसरे विश्व युद्ध की आग दुनियाभर में धधक रही थी। विश्वयुद्ध के चलते जापानी सेनाएं भारत के पूर्वी तट तक पहुंच चुकी थी और कांग्रेस ने अंग्रेजों द्वारा सुझाई ‘क्रिप्स योजना’ को खारिज कर दिया था।

महात्मा गांधी और अन्य नेताओं के नेतृत्व में शुरू किए गए इस आंदोलन को भारतीय उपमहाद्वीप से ब्रिटिश साम्राज्य के अस्तित्व को कमजोर करने के क्षण में देखा गया। इसी दौर में भारतीय सैनिकों को ब्रिटिश युद्धों में झोंकने के खिलाफ कांग्रेस के प्रांतीय मंत्रालयों ने पहले ही साल 1939 में इस्तीफा दे दिया था। आंदोलन के उस दौर में महात्मा गांधी ने अन्य मुद्दों के अलावा हिंदुवादी नेता बीएस मूनजे और वीडी सावरकर की निंदा की जो हिंदुत्व आंदोलन के प्रतीक थे।

हालांकि आंदोनल शुरू होने के कुछ दिनों बाद महात्मा गांधी और कांग्रेस के बड़े नेता जवाहरलाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। 10 अगस्त, 1942 को अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस खबर को प्रमुखता से छापा था। अखबार लिखता हैं, ‘महात्मा गांधी, मौलाना आजाद और नेहरू गिरफ्तार।’ अखबार आगे लिखता है कि ‘कांग्रेस के अन्य सदस्यों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी’।

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट द वायर ने अपनी एक खबर में लिखा है कि उस आंदोलन को मुख्य रूप से तीन संगठनों ने समर्थन नहीं किया। ये थे कम्युनिस्ट, मुस्लीम लीग और हिंदू महासभा, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग जारी रखा।

हिंदू महासभा की ‘व्यावहारिक राजनीति’
वेबसाइट ने आगे लिखा है कि हिंदू महासभा के प्रमुख नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी साल 1941 में बंगाल में फजलुल-हक की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में शामिल हुए थे। खास बात है कि इस घटना से एक साल पहले और मुस्लिम लीग संग विवाद से पहले फजलुल-हक मशहूर रिजॉल्यूशन ‘पाकिस्तान रिजॉल्यूशन’ के समर्थन में थे, जिसने मुस्लिम लीग को एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के लिए प्रतिबद्ध किया था।

हजलुल-हक के इस रवैये को कांग्रेस ने सांप्रदायिक बताया था। इस दौरान सिंध और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन सरकारें चलाईं। 3 मार्च, 1943 में सिंध असेंबली में जब ‘भारत के मुस्लिम अलग राष्ट्र हैं’ में प्रस्ताव पारित किया, तब महासभा के नेता सरकार में थे। हालांकि महासभा के मंत्रियों ने प्रस्ताव का विरोध किया और इसके खिलाफ मतदान किया, लेकिन वे सरकार का हिस्सा बने रहे।

गौरतलब है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का आज 130वां जन्मदिन भी है। उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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