ताज़ा खबर
 

कोरोना काल में डाकिया: डाक ही नहीं, नकदी और दवाएं भी लाया

दो लाख से ज्यादा डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों ने खुद को इस काम में झोंक दिया कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ‘भारतीय डाक भुगतान बैंक’ की मदद से वक्त पर धन मिले।

Author नई दिल्ली | Updated: May 17, 2020 2:40 AM
भारतीय डाक विभाग और पोस्टमैन।

वे सुर्खियों से गायब हैं। उन्हें कोरोना योद्धाओं के तमगे वाली सूची में नहीं ढूंढा जा सकता। लेकिन महामारी के इस दौर में उनके काम से पहचान बनी। पूर्णबंदी में वे बिना रुके पत्र, पार्सल, पेंशन, मनीआर्डर आदि के साथ सुदूर भारत के आखिरी घर तक खाकी थैले में सुख-दुख लादे पहुंचे। उनके दिलों में जगह बनाई और अपने महकमे ‘भारतीय डाक’ का डंका बजाया।

इन डाकियों ने केवल पत्र और पार्सल ही नहीं पहुंचाए बल्कि नकदी और अन्य आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने का जिम्मा उठाया। संचार मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल में इंडिया पोस्ट ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली का उपयोग करते हुए लोगों के दरवाजे तक जाकर 15 लाख लेन देन में 300 करोड़ रुपए वितरित किए। मई में ये आंकड़े दोगुने ( करीब 28 लाख लेन देन) तक पहुंचने के रुझान है।

दिल्ली जोन के पोस्टमास्टर जनरल (आपरेशन) अखिलेश पांडेय के मुताबिक पूर्णबंदी के दौरान केवल दिल्ली में चार लाख स्पीडपोस्ट व रजिस्टर्ड पोस्ट वितरित किए गए। मनीआर्डर के तौर पर सात लाख से ज्यादा लोगों तक करीब 47 लाख रुपए पहुंचाए गए। इतना ही नहीं चार लाख से ज्यादा रुपए तो दिल्ली की तीन जेलों तिहाड़, मंडोली और रोहिणी) में बंद कैदियों तक डाक विभाग ने पहुंचाए। बता दें कि जेल में भी कैदियों तक उनके घर वाले कुछ पैसे भेज सकते हैं। पांडेय बताते हैं कि पूर्णबंदी में 80,000 स्पीडपोस्ट व पार्सल दिल्ली से बाहर भेजे गए, जिनमें 40 हजार बुकिंग में केवल चिकित्सा से जुड़ी सामाग्रियां व दवाएं थी। दिल्ली डाक विभाग ने कुल मिलाकर करीब ढाई हजार टन सामग्रियों का वितरण किया।

भारतीय डाक के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी पोस्टमास्टर जनरल (मेल व बीडी) हरप्रीत सिंह ने कहा- उपलब्धि का श्रेय अगली कतार में मौजूद उनके कर्मचारी हैं। जिन्होंने इस दौर में जज्बा दिखाया, लोगों से मिले, उन तक सेवाएं पहुंचाई। खासकर तब जब बसें व ट्रेन सभी बंद थे। उन्होंने कहा- हमने विशेष पार्सल रेल गाड़ी और भाड़े के ट्रकों की सेवाएं ली। देश के सुदूर हिस्सों में समय पर सेवाएं मुहैया कराई। पुणे स्थित कोरोना टेस्ट लैब से लेकर भूटान तक चिकित्सा सामग्रियां पहुंचाई गई। सिंह ने कहा- इस क्रम में कुछ कर्मचारी कोरोना संक्रमित भी हुए, पृथकवास भेजे गए। तमाम चुनौतियों के बीच लक्ष्य को पाया गया।

डाक विभाग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा-इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की एईपीएस सुविधा किसी भी अनुसूचित बैंकों के खातों से घर बैठे पैसे निकालने में सक्षम बनाती है। इसे जोड़कर, लगभग 1.8 करोड़ डाकघर बचत बैंक लेन देन में 28,000 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया। आधार-इनेबल्ड पेमेंट सर्विस (एईपीएस) सुविधा के तहत कोई भी ग्राहक भले उसका अकाउंट किसी भी बैंक में क्यों न हो वह डाकिए के जरिए अपने घर तक पैसे मंगा सकता है।

इसके लिए डाक घर में ग्राहक के बचत खाते की जरूरत नहीं होती है। आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अलावा, दिव्यांगजन और पेंशनरों को बड़ा समर्थन देते हुए, पूर्णबंदी की अवधि के दौरान 480 करोड़ रुपए मूल्य के लगभग 52 लाख प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण भुगतान किए गए हैं। रेलवे और राज्य सड़क परिवहन पर सख्त प्रतिबंध के कारण संकट काल में भारतीय डाक ने कुछ अलग सोचा। विभाग ने अपने नेटवर्क व वाहनों के मौजूदा बेड़े को जन कल्याण के अभियान में झोंक दिया।

शायद यहीं वजह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के ट्वीट को जोड़ते हुए पोस्टल सेवा के कार्यों की प्रशंसा की। आंकड़ों के मुताबिक डाक विभाग ने पूर्णबंदी के दौरान केवल अप्रैल के महीने में 100 टन से ज्यादा केवल दवाओं और चिकित्सा से जुड़ी सामग्रियों की आपूर्ति की है। इनमें दवाएं, जांच किट और वेंटिलेटर आदि शामिल थे। विभाग ने इसके लिए मालवाहक विमानों और डिलीवरी वैन का इस्तेमाल किया है।

दो लाख से ज्यादा डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों ने खुद को इस काम में झोंक दिया कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ‘भारतीय डाक भुगतान बैंक’ की मदद से वक्त पर धन मिले। इस अवधि में राज्यों के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य तक डाक पहुंचाने के लिए विभाग ने विशेष इंतजाम किए।

रोल माडल बना दिल्ली
दिल्ली के तमाम डाकघरों में घुसते ही सादे कागज पर लिखे स्लोगन आने वाले ग्राहक के नजर खींच लेते हैं। ‘बी-पॉजिटिव : मन से ना कि तन से’, ‘कोरोना से सावधान : हम भी और आप भी’ आदि से रूबरू होते लोग काउंटर पहुंच अपना काम निपटाते देखे जा सकते हैं। ज्यादातर सेवाओं के लिए यहां के काउंटर पर ‘हां’ है। लेकिन सामाजिक दूरी सहित कुछ मापदंडों के पालन के साथ। चौंकाने वाले तथ्यों में खाकी वर्दी वाला डाकिया का हुलिया भी है। शरीर पर ग्लव्स, टोपी, चश्मा, मास्क और तौलिया धारण किए डाकिया डाक के थैले के साथ सैनेटाइजर भी लेकर निकलता है, ताकि रसीदी या पावती के दस्तखत लेने से पहले वह उनके हाथ को सैनेटाइज कर सके।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Lockdown: मजदूरों को बड़ी राहत! देश के किसी भी जिले से ‘Shramik Special’ ट्रेनें चलाने को Indian Railways तैयार- बोले रेल मंत्री
2 Lockdown:‘पैदल तो जाने दो…दो महीने हो गए, बच्चा खाना भी नहीं खा रहा है’, बॉर्डर पर पुलिस ने रोका तो आंसुओं के साथ छलक पड़ा लाचार महिला का दर्द
3 TV Debate में बोले JDU नेता -‘थोथा चना, बाजे घना’, विपक्षी मित्र बेरोजगार; RLSP नेता का जवाब- भगवान भरोसे बिहार