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विशेष: इधर चिंता, उधर ममता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस कह चुके हैं कि कोविड-19 महामारी ने इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे लंबा अवरोध पैदा किया है, जिससे सभी देशों और महाद्वीपों के करीब 1.6 अरब छात्र प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 2.38 करोड़ बच्चे अगले साल स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं।

child in class

संत कबीर ने गुरु के बारे में बात करते हुए उन्हें ईश्वर से भी ऊपर माना है। नए समय में गुरु की यह हैसियत जरूर पेशेवर संस्कार में बदल गई है, पर आज भी लोग यह स्वीकार करते हैं कि ज्यादातर शिक्षक अपने छात्रों के शिक्षण और उनके भविष्य को लेकर संवेदनशील और जिम्मेदार तरीके से सोचते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस कह चुके हैं कि कोविड-19 महामारी ने इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे लंबा अवरोध पैदा किया है, जिससे सभी देशों और महाद्वीपों के करीब 1.6 अरब छात्र प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 2.38 करोड़ बच्चे अगले साल स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं। ऐसे में उन शिक्षकों के जज्बे को सलाम करना चाहिए जो इस संकटपूर्ण दौर में भी न सिर्फ अपने बच्चों की फिक्र कर कर रहे हैं बल्कि इसके लिए ईमानदारी से हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं।

गाजियाबाद के हिंडन क्षेत्र में स्थित केंद्रीय विद्यालय, क्रमांक-एक की प्रधानाध्यापिका और प्रसिद्ध कवयित्री ममता श्री बताती हैं कि बिलकुल विपरीत परिस्थिति में अपने आपको ढालना बच्चों के साथ हमारे लिए भी बड़ी चुनौती रही। वे कहती हैं- जब अचानक से पूर्णबंदी हुई तो उस समय परीक्षा का वक्त था। अचानक पैदा हुए हालात से हम सब स्तब्ध थे कि आगे क्या होगा। अभी तक ‘आनलाइन क्लास’ हमारे लिए सुना-सुनाया अनुभव होता था। हम इस पर पूरी तरह निर्भर हो जाएंगे यह हमारी सोच से परे था। लेकिन इंसान खुद को परिस्थिति के अनुसार ढालने की कोशिश तो करता ही है। सो धीरे-धीरे आॅनलाइन शिक्षा के तौर-तरीकों में हम पूरी तरह ढलते चले गए।

अलबत्ता वह यह कहना नहीं भूलतीं कि स्कूल में बच्चों और शिक्षक का रिश्ता बहुत ही आत्मीय और भावपूर्ण होता है। स्कूल में हम पढ़ाई से जुड़ी बातों को बच्चों को आसानी से समझा सकते हैं। बच्चे भी पढ़ने के क्रम में सहज रहते हैं। इसलिए आनलाइन शिक्षा हमेशा के लिए उपयुक्त नहीं है। ममता को एक शिक्षिका के तौर पर लगता है कि कोरोना संकट के दौरान शिक्षण का जो अभ्यास अपनाया गया, वह अगर लंबे समय तक जारी रहता है तो यह छात्र और शिक्षक के स्वाभाविक संबंध और संवाद को तो बदलकर रख ही देगा, इस कारण दोनों ही तरफ तनावपूर्ण हालात भी पैदा होंगे।

ममता जो बात अपने अनुभव से कह रही हैं, वही बात गुतारेस भी अपनी तरह से कहते हैं। वे कहते हैं, ‘शिक्षा व्यक्तिगत विकास और समाज के भविष्य की कुंजी है। यह अवसर खोलती है और असमानता को दूर करती है। यह ज्ञानवान, सहिष्णु समाज का मेरुदंड तथा सतत विकास का प्राथमिक संचालक होती है। पर कोविड-19 महामारी ने अब तक के इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे लंबा अवरोध पैदा किया है।’ एक और आहम बात गुतारेस कहते हैं कि इस महामारी ने शिक्षा में असमानता को बढ़ाया है और लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने से पढ़ाई को हुए नुकसान से पिछले कुछ दशकों में हुई प्रगति के बेकार होने का खतरा है।

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