ताज़ा खबर
 

JNU: बल प्रयोग के दौरान लहुलुहान हो गए स्टूडेंट्स, फिर भी पुलिस कह रही- नहीं किया लाठी चार्ज

सोमवार को जेएनयू छात्रों द्वारा किए गए प्रोटेस्ट मार्च के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज किए। कई छात्र लहुलुहान हो गए। लेकिन, पुलिस लाठी चार्ज की बात को खारिज कर रही है।

सोमवार (18 नवंबर) को लाठी चार्ज के दौरान घायल जेएनयू का छात्र। (फोटो सोर्स: रॉयटर्स)

सोमवार को हॉस्टल फीस बढ़ोतरी समेत कई मुद्दों को लेकर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्रों ने कैंपस से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की और लाठी चार्ज की। लाठी चार्ज में कई विद्यार्थी बुरी तरह जख्मी हो गए। लहुलुहान छात्रों की तस्वीरें सामने आने के बावजूद पुलिस यह मानने को तैयार नहीं है कि उसने कोई बल प्रयोग किया। प्रोटेस्ट- मार्च के दौरान पुलिस ने करीब 100 छात्रों को हिरासत में लिया, जबकि बल प्रयोग के दौरान कई छात्र घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि छात्रों की तरफ से भी पुलिस पर हमला किया गया। इसमें पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस प्रोटेस्ट-मार्च निकालने वाले अज्ञात छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज करने की बात कह रही है।

जेएनयू छात्र संघ के द्वारा बुलाए गए इस प्रोटेस्ट मार्च में काफी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आयशी घोष, जनरल सेक्रेटरी सतीश यादव और पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया और उन्हें कथित रूप से दिल्ली कैंट, कालकाजी और बदरपुर थाने ले जाया गया। छात्रों ने आरोप लगाया है कि यहां पुलिस ने उनकी पिटाई की।

लहूलुहान हुए जेएनयू छात्र, नीचे तस्वीर पर क्लिक करके देखिए फोटोज 

गौरतलब है कि 8 घंटे के लंबे विरोध-प्रदर्शन के बाद आखिरकार जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) के संयुक्त सचिव जीसी होसुर से मिलने की इजाजत दी गई। आयशी घोष ने बताया, “हमने अपना मेमोरेंडम सौंप दिया है। हमारी मांग है कि हॉस्टल मैन्युअल को पूरी तरह वापस लिया जाए। उन्होंने (संयुक्त सचिव) कहा कि वे हमें इस मामले में नियुक्त उच्च समिति से मुलाकात करने देंगे।” गौरतलब है कि जेएनयू प्रशासन ने बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) वाले छात्रों को फीस बढ़ोतरी में राहत देने की बात कही है। लेकिन, छात्र इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

सोमवार को जैसे ही छात्र संसद मार्च के लिए कैंपस से निकलने लगे, तभी कई जगहों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया। छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने के लिए नई रणनीति अपनाई और सभी तीतर-बीतर हो गए। दोपहर 1.45 के करीब छात्रों ने योजना के मुताबिक तय रूट को छोड़ मुनिरका गांव होते हुए मार्च को आगे बढ़ाया। करीब साढ़े 3 बजे छात्रों का हुजूम सफदरजंग मकबरे के पास पहुंचा। यहां पर पुलिस ने पहली बार छात्र एवं छात्राओं पर लाठी चार्ज किया।

जैसे ही लाठी चार्ज की सूचना चारो तरफ फैली, तब जेएनयू टीचर एसोसिएशन भी मौके पर करीब शाम साढ़े 6 बजे पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान छात्र हिरासत में लिए गए छात्रों की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हुजूम को संबोधित करते हुए जेएनयू छात्र संघ के वाइस प्रेसिडेंट साकेत मून ने कहा, “हम यहां से तब तक नहीं हटेंगे, जब तक की हिरासत में बंद हमारे साथियों को वापस नहीं लाया जाता। हम चाहते हैं कि एचआरडी मंत्रालय अपने एक नोटिफिकेशन के जरिए कहे कि जब तक कमेटी अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर देती, तब तक हॉस्टल मैनुअल स्थगित अवस्था में रहेगा।”

7 बजे के करीब आयशी घोष और यादव को पुलिस वापस लेकर आई। गौरतलब है कि इस दौरान कई पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं को हिरासत में लिया। वहीं, लाठी चार्ज की खबरों का पुलिस लगातार खंडन कर रही है। उसका कहना है कि उन्होंने सुरक्षा को लेकर थोड़ा कड़ा रुख इख्तियार किया, लेकिन लाठी चार्ज नहीं की।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 टीएमसी सांसद नुसरत जहां की तबीयत में सुधार, अस्पताल से मिली छुट्टी
2 इंदिरा का मंत्री सीआईए का जासूस, बांग्लादेश युद्ध के समय लीक कर रहा था जानकारी- राजनारायण ने नाम लेकर किया था दावा
3 Rajasthan Local Body Election Results 2019: जबर्दस्त उलटफेर से उथल-पुथल, गायब हो रहे BJP-Congress के उम्मीदवार
IPL 2020
X