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साहस और जज्बा : पुजारा ने चोट खाई लेकिन कंगारुओं का तोड़ा घमंड

गाबा में आस्ट्रेलिया को हराकर भारत ने चार मैचों की टैस्ट शृंखला जीत ली। इस जीत में एक ऐसे बल्लेबाज की अहम भूमिका रही जिसे अपनी धीमी बल्लेबाजी के लिए अकसर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 20, 2021 10:25 AM
cricketerचेतेश्वर पुजारा। फाइल फोटो।

लेकिन यह भी सच्चाई है कि इस खिलाड़ी के बिना आस्ट्रेलिया की पैनी गेंदबाजी आक्रमण का सामना करना लगभग नामुमकिन था। हम बात कर रहे हैं मध्यक्रम बल्लेबाज और भारत की नई दीवार चेतेश्वर पुजारा के बारे में।

उन्होंने अंतिम टैस्ट में शानदार अर्धशतकीय पारी खेली और इस दौरान कई गेंदें शरीर पर खाईं। यह कहा जाए तो गलत नहीं कि अपने अदम्य साहस और बेहतरीन जज्बे के कारण उन्होंने पांचवें दिन के अहम दो सत्र में टीम को संभाले रखा।

ब्रिस्बेन टैस्ट में हर दिन कुछ न कुछ नया होता। मैच का परिणाम क्या होगा, यह बताना किसी के लिए भी कठिन था। चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद यही कयास लगाए जा रहे थे कि भारत पांचवें दिन ड्रॉ के लिए बल्लेबाजी करेगा। लेकिन हुआ इसके उलट। शुभमन गिल ने 91 रन के साथ जो नींव रखी उसे मजबूती देने में पुजारा का अहम योगदान रहा। उन्होंने 56 रन की पारी के दौरान कुल 211 गेंदें खेलीं। इस दौरान कई बार आस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के तीखे शॉर्ट पिच गेंदों ने उन्हें घायल किया लेकिन वे नहीं डिगे।

इस टैस्ट शृंखला के चार मैचों के दौरान 14 बार गेंद ने पुजारा को घायल किया। 2006 के बाद किसी भी बल्लेबाज ने अपने शरीर पर इतनी गेंदें नहीं खाईं। चौथे टैस्ट की चौथी पारी के 49वें ओवर की दूसरी गेंद ही पुजारा को चकमा दे गई। जोश हेजलवुड की यह गेंद उनकी दाएं हाथ की अंगुलियों पर लगी। वे दर्द से कराह पड़े और उनके हाथ से बल्ला छूट गया। हालांकि फिजियो के देख-रेख के बाद वे बल्लेबाजी के लिए तैयार थे।

इससे पहले मैच के 32वें ओवर की पांचवीं गेंद उनके हेलमेट पर लगी। इस ओवर में पैट कमिंस गेंदबाजी कर रहे थे। इसके बाद 51वें ओवर में जोश हेजलवुड गेंदबाजी के लिए आए और उनकी पांचवीं गेंद फिर पुजार के हेलमेट को हिला गई।

याद आई 1976 का वेस्ट इंडीड दौरा

आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थकाने की रणनीति में पुजारा काफी हद तक कामयाब हुआ। यही कारण रहा कि मैच भारत की झोली में आ गया। हालांकि जिस तरह से पैट कमिंस और हेजलवुड ने गेंदबाजी की उससे भारत का 1976 का वेस्ट इंडीज दौरा यादा आ गई। इस दौरे पर क्लाइव लॉयड की टीम ने भारतीय बल्लेबाजों पर कहर बरपाया था। माइकल होल्डिंग की अगुआई में वींडीज के तेज गेंदबाजों ने बॉडीलाइन गेंदबाजी की रणनीति अपनाई और भारतीय बल्लेबाजों को चोटिल कर दिया। आलम यह था कि भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने समय से पहले ही पारी घोषित कर दी थी।

दरअसल, मैच में टॉस जीतकर लॉयड ने क्षेत्ररक्षण चुना। भारत ने अच्छी शुरुआत की और सुनील गावसकर ने अंशुमन गायकवाड़ के साथ 136 रन की साझेदारी की। होल्डिंग की गेंद पर गावसकर 66 रन बनाकर बोल्ड हुए। इसके बाद तो लगातार भारतीय खिलाड़ी चोटिल होते चले गए।

पहले गायकवाड़ को गंभीर चोट लगी और इसके बाद वृजेश पटेल को। गायकवाड की हालत ज्यादा खराब थी और उन्हें अगले दो दिन अस्पताल में ही रहना पड़ा। पटेल को होल्डिंग की गेंद मुंह पर लगी और उन्हें भी टांके लगाने पड़े। गुंडप्पा विश्वनाथ भी चोटिल होकर अस्पताल पहुंच गए। इसके बाद बेदी ने पारी घोषित करने का फैसला कर लिया ताकि उनके गेंदबाज भी चोटिल न हो जाएं।

आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थकाने की रणनीति में पुजारा काफी हद तक कामयाब हुए। यही कारण रहा कि मैच भारत की झोली में आ गया। हालांकि जिस तरह से पैट कमिंस और हेजलवुड ने गेंदबाजी की उससे भारत के 1976 के वेस्ट इंडीज दौरे की याद आ गई। इस दौरे पर क्लाइव लॉयड की टीम ने भारतीय बल्लेबाजों पर कहर बरपाया था। माइकल होल्डिंग की अगुआई में विंडीज के तेज गेंदबाजों ने बॉडीलाइन गेंदबाजी की रणनीति अपनाई और भारतीय बल्लेबाजों को चोटिल कर दिया।

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