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PM नरेंद्र मोदी ने की थी संसद में हाजिर रहने की अपील, फिर भी कम अटेंडेंस के चलते गिर गया सरकार का विधेयक

आम विधेयक सामान्य बहुमत से पारित हो जाता है लेकिन संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई वोट चाहिए थे।

Narendra Modi, Completion of Three Years of Narendra Modi Government, Suresh Prabhu, Radha Mohan Singh, Arun Jaitley, Flop Ministers of Modi government, Agriculture Minister Radha Mohan Singh, Finance Minister Arun Jaitley, Railway Minister Suresh Prabhuप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo: PTI)

महज एक हफ्ते पहले राष्ट्रपति चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी सांसदों के संग बैठक में उनसे संसद के मॉनसूत्र में अपनी पूरी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कहा था लेकिन सोमवार (31 जुलाई) को मोदी सरकार को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब राज्य सभा में सरकार के संविधान संशोधन विधेयक के एक महत्वपूर्ण प्रावधान को हटाना पड़ा क्योंकि उसके पर्याप्त सांसद सदन में नहीं मौजूद थे। सरकार ने नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज (एनसीबीसी) को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संविधान संशोधन बिल पेश किया था।

संविधान संशोधन (123वां संशोधन) विधेयक 2017 में क्लॉज 3 को हटाना पड़ा जो कमीशन के संगठन से जुड़ा हुआ था। राज्य सभा में इस क्लॉज के अस्वीकार हो जाने का मतलब हुआ कि सरकार को फिर से लोक सभा में इसके लिए नया विधेयक पेश करके पारित कराना होगा और फिर उसे राज्य सभा में पारित कराना होगा। सोमवार को राज्य सभा में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, बीके हरिप्रसाद और हुसैन दलवई ने सरकार के विधेयक में कई संशोधन पेश किए। कोई आम विधेयक सामान्य बहुमत से पारित  हो जाता है लेकिन ये विधेयक संविधान संशोधन विधेयक था इसलिए इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई वोट चाहिए थे।

सदन के सभापति ने कई बार याद दिलाया कि एक बार विधेयक गिर गया तो उसकी पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होगी। सभापति ने ये भी कहा कि विधेयक को पारित कराने की एक ही सूरत है कि सदन में मौजूद सभी सांसद एकजुट होकर उसका समर्थन करें। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एका बनाने के लिए सदन की कार्यवाही को कुछ मिनटों के लिए स्थगित किया गया। लेकिन आखिरकार सत्ता पक्ष के पर्याप्त सांसदों के न होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।

कांग्रेसी सांसदों के बर्खास्तगी के विरोध में विपक्ष ने सदन के गलियारों को खोलने नहीं दिया और सत्ता पक्ष द्वारा सदन के बाहर से सांसदों को बुलाने का मौका नहीं मिला। वित्त मंत्री और राज्य सभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा, “अगर वो ओबीसी आरक्षण विधेयक गिराना चाहते हैं तो इसे गिर जाने दें।” जेटली के बयान पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी खड़े होकर ओबीसी मुद्दे के लिए अपनी प्रतिबद्धता जतायी लेकिन दोनों ने विधयेक को लेकर अपना रुख नहीं बदला।

बीके हरिप्रसाद ने सदन में सवाल उठाया कि देश की “50 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करने वाले विधेयक को पारित करने की हड़बड़ी क्या है?” हरिप्रसाद ने याद दिलाया कि लोक सभा में ये विधेयक पांच दिनों में पारित हुआ था। बाद में विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया जिसके प्रमुख बीजेपी राज्य सभा सांसद भूपेंद्र यादव हैं। जदयू नेताओं रामनाथ ठाकुर और शरद यादव ने विधेयक में क्रीमी लेयर (प्रभु वर्ग) क्लॉज डालने का विरोध करते हुए उसे हटाने की मांग की।

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