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दहेज की वजह से देश में हर घंटे होती है एक मौत, जानें कैसे बदल गया है शादियों में लेन-देन का खेल

पिछले महीने अहमदाबाद की रहने वाली आयशा (24) ने साबरमती नदी में कूद कर खुदकुशी करने से पहले एक वीडियो बनाया था।

dowryNCRB के मुताबिक देश में हर एक घंटे में एक महिला दहेज की वजह से मारी जाती है। (Indian Express)।

पिछले महीने अहमदाबाद की रहने वाली आयशा (24) ने साबरमती नदी में कूद कर खुदकुशी करने से पहले एक वीडियो बनाया था। आयशा ने वीडियो में बताया था कि वे अपने पति द्वारा दहेज के लिए सताई जा रही हैं। यही नहीं दहेज के ही एक मामले में 25 वर्षीया रसिका अग्रवाल कोलकाता में अपने ससुराल में मृत पाई गईं थीं। रसिका के घरवालों ने ससुराल वालों पर दहेज के लिए परेशान किए जाने का आरोप लगाया था। दहेज के लिए महिलाओं को सताए जाने की खबरें समाज के हर तबके से सामने आ रही हैं। जहां दहेज को कई साल पहले ही अपराध घोषित किया जा चुका है। वहीं पुलिस में आज भी इसकी शिकायत कम ही रिपोर्ट की जाती हैं।

समाज में जब तक दहेज के चलते किसी की जान नहीं चली जाती है तब तक समाज में इस पर बात भी नहीं होती है। दहेज के लिए यातनाएं देने जैसी खबरें आपको इंटरनेट पर कई सारी मिल जाएंगी। बदकिस्मती की बात ये है कि आज दहेज ने शादियों में ‘गिफ्ट’ की शक्ल ले ली है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2019 के डेटा के मुताबिक देश में हर एक घंटे में एक महिला दहेज की वजह से मारी जाती है। हर चार मिनट में महिलाओं को पति या ससुराल वालों से दहेज के लिए उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक पिछले साल दिल्ली में दहेज के लिए 94 महिलाओं को जान गंवानी पड़ी। NCRB के 2010 के डेटा के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा दहेज के लिए जानें जाती हैं।

दहेज शुरू में समस्या नहीं थी: इतिहासकार वीणा तलवार ओल्डनबर्ग के मुताबिक दहेज शुरुआत में एक समस्या नहीं थी लेकिन अंग्रेजों के शासनकाल में भूमि कानून में बदलाव ने स्थिति को बदल दिया। बाद में चलकर दहेज जो कि महिलाओं को सुरक्षा देने का काम करता था वह हिंसा और दुल्हनों की आत्महत्या से जुड़ गया।

सिनेमा में दहेज: 2014 की फिल्म ‘2 स्टेट्स’ में, 2019 की वेब सीरीज ‘मेड इन हैवन’, इससे पहले राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘लज्जा’ (2001) में दहेज की समस्या को दर्शाया गया है।

दहेज के खिलाफ जंग: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया, ‘कुछ लोगों को यह पता नहीं है कि यह एक अपराध है। दूसरी बात ये कि परिवार महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर देने के बजाय केवल दहेज देते हैं, खासकर जब संपत्ति की बात आती है। आमतौर पर जिसका विभाजन बेटों और बेटियों के बीच समान रूप से होना चाहिए लेकिन परिवार को लगता है कि दहेज देकर उन्होंने इसकी बराबरी कर ली है।’

उन्होंने कहा, ‘शादियां सादगी से होनी चाहिए। जब आप अपनी बेटियों की शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं, तो उन्हें पैसा कमाने का मौका दें; जिसे लोगों को सिखाने की जरूरत है।’

शर्मा ने बताया कि दहेज को लेकर पुलिस से शिकायत की जा सकती है। अगर पुलिस नहीं सुनती है तो महिला आयोग जैसी संस्थाएं हैं जिनसे संपर्क किया जाना चाहिए।

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