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आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम: गोबर से बर्तन ही नहीं, बनने लगीं मूर्तियां भी

गोबर से मूर्ति बनाने के पीछे तर्क यह भी है कि इसमें रोजगार की संभावनाए ज्यादा और लागत कम है। इस काम में दिव्यांगजनों और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का प्रयास बताया जा रहा है।

यूपी के बांदा जिले के जखनी गांव में पाथकर रखा हुआ गोबर और उससे बना उपड़ौर।

कोरोना की वजह से मिट्टी के बर्तन बनाने वालों का धंधा मंदा हुआ तो उन्होंने अब गोबर मिट्टी से बने बर्तनों की तरफ रुख कर लिया है। यह मिट्टी के बर्तनों से सस्ता भी है और पर्यावरण के लिहाज के बेहतर है। मार्च में कोरोना की वजह से हुए पूर्णबंदी के बाद मिट्टी के बर्तन बनाने वालों को इस काम में एक संस्था बनाकर शामिल किया गया। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों के लोग इसमें जुड़ गए हैं। खासकर महिलाओं और दिव्यांगों को इसमें शामिल किया गया है।

पूर्वी दिल्ली से लेकर दक्षिणी और बाहरी दिल्ली तक मिट्टी के सामान बनाने के काम से जुड़े लोगों ने गोबर से बर्तन और त्योहारी मूर्ति बनाने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। गोबर से मूर्ति बनाने के पीछे तर्क यह भी है कि इसमें रोजगार की संभावनाए ज्यादा और लागत कम है। इस काम में दिव्यांगजनों और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का प्रयास बताया जा रहा है।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के पटपड़गंज मैक्स अस्पताल के पास सामुदायिक केन्द्र में इन दिनों गोबर से मूर्ती बनाने वाले दिव्यांगजनों और महिलाओं की भीड़ दिख रही है। पूर्वी दिल्ली के कुंडली, दल्लूपुरा, घरौली, कल्याणपुरी, त्रिलोकपुरी और शशि गार्डेन की महिलाएं शामिल हैं। सुबह से शाम तक कुछ लोग गोबर लाने और कुछ लोग उसे सांचें पर मूर्ती का रूप देने में सक्रिय हैं। स्कूल कॉलेज की कुछ लड़कियां इंटरनेट की मदद से दीया और मूर्तियों के बर्तनों पर नए-नए डिजाइन बनाकर उन्हें आकर्षक बनाते हैं। यहां त्योहारी जरूरत और घरेलू उपयोग की सभी चीजें मिल रही हैं।

नवगठित भारत गौसंवर्धन केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार इसका नेतृत्व कर रहे हैं। वे कहते है कि गोबर से मूर्ती बनाने का यह एक ऐसा प्रयोग है जिससे कोरोना में मिट्टी से बर्तन बनाने वाले मूर्तिकार के मंदे हुए पेशे को नया स्वरूप दिया जा सकता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आगे बढ़ाने की एक छोटी सी कोशिश भी है। पटपड़गंज की निगम पार्षद अपर्णा गोयल ने उन्हें सामुदायिक केंद्र उपलब्ध कराने में सहयोग किया है।

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