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पीएम मोदी ने पायलटों की जिंदगी खतरे में डाली, उड़ाने पड़ रहे पुराने जगुआर- राहुल गांधी के आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए न सिर्फ राफेल विमान सौदे में गड़बड़ी की गई बल्कि फ्रांसीसी कंपनी दसॉ पर रिलायंस को पार्टनर बनाने का दबाव डाला।

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (18 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पायलटों की जिंदगी को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार का ध्यान यूपीए काल के रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने से ज्यादा इसे दोबारा तय करने पर था, जिस वजह से भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के पायलटों की जिंदगी खतरे में पड़ गई, क्योंकि वे पुराने विमानों को उड़ाने के लिए बाध्य हैं। राहुल ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा, “2014 के बाद से, कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के सौदे को अंतिम रूप देने के स्थान पर मौजूदा सरकार ने सिर्फ अपने उद्योगपति दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए सौदे को दोबारा तय करने पर ध्यान केंद्रित किया।”

राहुल ने आगे कहा, “और इसलिए हमारे पायलटों को प्रत्येक दिन अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ता है- उन्हें पुराने जगुआर को उड़ाना पड़ता है, जिसे फ्रांस और विश्व के अन्य भागों के जंक यार्डो में इसके कुछ पार्ट्स के दोबारा प्रयोग के लिए रखा जाता है।” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “यह न केवल शर्मनाक है, बल्कि इससे भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में धूमिल होती है। इस वजह से हमारे पायलट की जान को खतरा उत्पन्न होता है।” यूपीए सरकार के कार्यकाल के समय राफेल सौदे की तरफदारी करते हुए राहुल ने कहा, “यूपीए कार्यकाल में 126 राफेल विमानों के लिए किए गए सौदे को आगे बढ़ाने से भारतीय वायुसेना का कायाकल्प हो जाता और हम जगुआर जैसे पुराने विमानों को बदलने में सक्षम होते।”

उन्होंने कहा, “उस सौदे में एचएएल को तकनीक हस्तांतरित किया जाना था, ताकि हम भविष्य में ज्यादा आत्मनिर्भर हो सकें।” राहुल ने कहा, “इसके बदले अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल खरीद सौदे को दोबारा तय किया गया और इसे घटाकर केवल 36 विमानों तक सीमित कर दिया गया, जो सभी फ्रांस में बनेंगे! इन विमानों को भारत में आने में वर्षो का समय लगेगा।” कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए न सिर्फ राफेल विमान सौदे में गड़बड़ी की गई बल्कि फ्रांसीसी कंपनी दसॉ पर रिलायंस को पार्टनर बनाने का दबाव डाला।

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