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भगत सिंह को आतंकवादी बताने वाली किताब ‘Indian Struggle for independence’ की बिक्री पर रोक

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल एक किताब, जिसमें भगत सिंह को क्रांतिकारी-आतंकवादी (रिवाल्यूशनरी टेररिस्ट) करार दिया गया है, पर पैदा हुए विवाद के बाद डीयू प्रशासन ने इस किताब के हिंदी अनुवाद की बिक्री और वितरण को रोकने का फैसला किया।

Author नई दिल्ली | April 30, 2016 04:33 am
अंग्रेजी में ‘इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस’ की भगतसिंह की किताब की ब्रिकी पर रोक

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल एक किताब, जिसमें भगत सिंह को क्रांतिकारी-आतंकवादी (रिवाल्यूशनरी टेररिस्ट) करार दिया गया है, पर पैदा हुए विवाद के बाद डीयू प्रशासन ने इस किताब के हिंदी अनुवाद की बिक्री और वितरण को रोकने का फैसला किया। डीयू के प्रवक्ता मलय नीरव ने बताया कि बिपन चंद्रा, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, सुचेता महाजन और केएन पणिकर की ओर से लिखी गई और डीयू की ओर से प्रकाशित किताब ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ के बिक्री और वितरण को रोक दिया गया है।

अंग्रेजी में ‘इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस’ नाम की यह किताब पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से डीयू के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है( इस किताब के 20वें अध्याय में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सूर्य सेन और अन्य को क्रांतिकारी आतंकवादी (रिवाल्यूशनरी टेररिस्ट) बताया गया है। इस किताब में चटगांव आंदोलन को भी आतंकवादी कृत्य कहा गया है जबकि ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सैंडर्स की हत्या को भी आतंकवादी कृत्य करार दिया गया है। इस किताब का हिंदी संस्करण भारत का स्वतंत्रता संघर्ष 1990 में डीयू के हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय की ओर से प्रकाशित किया गया था।

विश्वविद्यालय के मुताबिक यह फैसला तब किया गया है जब भगत सिंह के परिवार ने इस शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर मांग की थी कि किताब में उचित बदलाव किए जाएं। उनके रिश्तेदारों ने डीयू के कुलपति योगेश त्यागी से भी इस बाबत मुलाकात की थी। ईरानी ने मंत्रालय के अधिकारियों से कहा था कि वे डीयू को इस मुद्दे पर फिर से विचार करने को कहें।

उन्होंने पत्रकारों को बताया, हमने दो दिन पत्र लिखकर कहा कि आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल सम्मान की भावना नहीं दर्शाता। हमने भी अनुरोध किया है, क्योंकि डीयू एक स्वायत्त संस्था है, इस शब्द के इस्तेमाल पर फिर से विचार किया जाए। डीयू के अधिकारियों ने कहा कि इस किताब के अंग्रेजी संस्करण की बिक्री और वितरण पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है, क्योंकि उसका प्रकाशन डीयू ने नहीं किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह किताब एक संदर्भ पुस्तक है, पाठ्य पुस्तक नहीं।

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