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नसबंदी मामला: न्यायिक जांच का आदेश: संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं के कारण हुई महिलाओं की मौत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित चिकित्सा शिविर में नसबंदी सर्जरी में पैदा जटिलताओं के कारण 13 महिलाओं की जान जाने के बाद आलोचना के घेरे में आए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने गुरुवार को घटनाओं की न्यायिक जांच का आदेश दिया। इस बीच राज्य के खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक रवि प्रकाश गुप्ता ने […]
Author November 14, 2014 12:48 pm
संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं के कारण हुई महिलाओं की मौत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित चिकित्सा शिविर में नसबंदी सर्जरी में पैदा जटिलताओं के कारण 13 महिलाओं की जान जाने के बाद आलोचना के घेरे में आए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने गुरुवार को घटनाओं की न्यायिक जांच का आदेश दिया। इस बीच राज्य के खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक रवि प्रकाश गुप्ता ने गुरुवार को बताया कि विभाग ने रायपुर स्थित महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के दफ्तर को सील कर दिया है।

राज्य के बिलासपुर जिले के सकरी (पेंडारी) गांव में बीते शनिवार को एक निजी अस्पताल में शासकीय परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिविर में कुछ घंटों के भीतर 83 महिलाओं का नसंबदी आपरेशन किया गया था। इन आपरेशन को करने वाले डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। राज्य के खाद्य व दवा प्रशासन अधिकारियों ने उस निर्माण इकाई को सील कर दिया है जिसने पीड़ितों को दी गई घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं की आपूर्ति की थी।

मुख्यमंत्री सिंह ने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (सीआइएमएस) में संवाददाताओं से कहा, घटनाओं की न्यायिक जांच करवाई जाएगी और दोषी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री बिलासपुर के उन अस्पतालों में गए जहां पेंडारी व पेंडारा इलाकों के शिविरों में नसबंदी का आपरेशन करवाने वाली 138 महिलाओं को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

उन्होंने कहा, अपोलो अस्पताल में भर्ती कराई गई 52 महिलाओं में से दो जीवनरक्षक प्रणाली पर हैं जबकि पांच की डायलिसिस चल रही है। पांच को नान इनवेसिव वेंटिलेटर प्रणाली पर रखा गया है जबकि अन्य सामान्य हैं। इसके अलावा सीआइएमएस व जिला अस्पताल में भर्ती अन्य महिलाओं की स्थिति सामान्य है।

पीड़िताओं को घटिया दवाएं दिए जाने के आरोपों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि नमूनों को कोलकाता की केंद्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा गया है और रिपोर्ट मिल जाने के बाद ही निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे।

हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के 16 डाक्टरों का एक दल गुरुवार को यहां पहुंच गया और उसने रोगियों की जांच की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक मरीज ठीक नहीं हो जाते यह दल बिलासपुर में ही रहेगा।

दवा नियंत्रण प्राधिकार ने महावर फार्मा की एक इकाई को सील कर दिया जिसने उन सिप्रोक्सिन 500 एमजी गोलियों को बनाया था जिनका इस्तेमाल शिविर में सर्जरी के दौरान किया गया था। एफडीए के नियंत्रक रविप्रकाश गुप्ता ने बताया, गुरुवार की सुबह महावर फार्मा की दवा निर्माण इकाई पर छापा मारा गया और दवाओं के नमूने लेने के बाद उसे सील कर दिया गया।

गुप्ता ने बताया कि उनके विभाग ने कंपनी के उत्पादों की आपूर्ति एवं बिक्री पर राज्य भर में रोक लगा दी है और इस सिलसिले में दवा दुकानदारों व दवा आपूर्तिकर्ताओं को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

इधर, सूत्रों ने बताया कि जब औषधि प्रशासन विभाग का छापा महावर फार्मा कंपनी में मारा गया तब वहां परिसर में कुछ दवाआेंं को जला दिया गया था। बाद में अधिकारियों ने इसकी जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को दी।

राज्य में जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें टेबलेट आईब्रूफ्रेन 400, टेबलेट सिप्रोसीन 500, इंजेक्शन लिग्नोकेन और लिग्नोकेन एचसीएल, एब्जारबेंट कॉटन वुल और जिलोन लोशन शामिल हैं।

इस बीच, पेंडारी गांव में 83 महिलाओं का नसबंदी आपरेशन करने वाले डॉ आरके गुप्ता को पड़ोसी बलोदाबाजार जिले से उनके एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया गया। अभी तक अपने पेशेवर जीवन के दौरान 50 हजार नसबंदी आपरेशन कर चुके लेप्रोस्कोपिक सर्जन ने दावा किया कि सरकार द्वारा आपूर्ति की गई घटिया दवाओं के चलते आपरेशन के बाद उत्पन्न जटिलताओं से मौतें हुई।

गुप्ता ने कहा कि जो भी दवाइयां खरीदी गई थी उनकी जांच नहीं की गई थी। मरीजों को अच्छी कंपनी की दवाइयां नहीं दी गर्इं। यदि अच्छी कंपनी की दवाइयां दी जाती तब इस घटना को रोका जा सकता था। डाक्टर केवल देखकर यह नहीं बता सकता है कि दवा असली है कि नकली। दवाइयों के परीक्षण के बाद ही इसे चिकित्सक को दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, खबरों के मुताबिक शिविर में आपूर्ति की गई दवाओं की समुचित जांच नहीं हुई थी। स्थानीय रूप से निर्मित दवाओं की आपूर्ति कर दी गई। यदि अच्छी दवाएं दी गई होती तो इस तरह की घटना कभी नहीं होती।

डॉक्टर ने कहा कि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है जबकि जिला चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी और अन्य अधिकारियों और चिकित्सकों, जो निलंबित हैं, सभी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और गैर इरादतन हत्या का मामला चलाया जाना चाहिए।

 

 

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