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रामदेव ने मिलाया DRDO से हाथ, भारतीय सिपाहियों को मिलेगा पतंजलि का खाना

अब जल्द ही भारतीय सैनिकों को योग गुरु बाबा रामदेव के ट्रस्ट पतंजिल की ओर से खाना खिलाया जाएगा। क्योंकि हाल ही बाबा रामदेव के ट्रस्ट पतंजिल योग पीठ ट्रस्ट और डीआरडीओ के बीच करार हुआ है।
Author August 24, 2015 11:25 am
रामदेव ने मिलाया DRDO से हाथ, भारतीय सिपाहियों को मिलेगा पतंजिल का खाना

अब जल्द ही भारतीय सैनिकों को योग गुरु बाबा रामदेव के ट्रस्ट पतंजिल की ओर से खाना खिलाया जाएगा। क्योंकि हाल ही बाबा रामदेव के ट्रस्ट पतंजिल योग पीठ ट्रस्ट और डीआरडीओ के बीच करार हुआ है।

बाबा रामदेव और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी में लेह में इस करार पर हस्ताक्षर किए गए। करार के मुताबिक रामदेव का ट्रस्ट ऊंचे पर्वतों पर तैनात जवानों को खाना तैयार करेगा।

ये विशेष खाना डीआरडीओ की लेह स्थित डिफेंस हाई एल्टीटयूड रिसर्च लैब ने तैयार किया है और इसका प्रोडक्शन पतंजलि ट्रस्ट करेगा। योगपीठ पांच तरह के विशेष पेय और खाद्य-पदार्थ सैनिकों के लिए तैयार करेगा। इसमें हर्बल चाय, डाइट स्पलीमेंट कैप्सूल और खूबानी का जूस भी शामिल है।

इंटरनैशनल योगा डे के बाद अब भारत के रक्षा प्रतिष्ठान ने बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ से हाथ मिलाया है। पतंजलि योगपीठ डीआरडीओ द्वारा तैयार कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स और फूड प्रॉडक्ट्स की मार्केटिंग करेगा।

इस बारे में रविवार को लेह में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग, डीआरडीओ प्रमुख एस क्रिस्टोफर और रामदेव की मौजूदगी में एक समझौता किया गया। समझौता पतंजलि योगपीठ और डीआरडीओ के डिफेंस इंस्टिट्यूट ऑफ हाई ऐल्टिट्यूड रिसर्च (DIHAR) के बीच हुआ।

इस समझौते के तहत डीआरडीओ की अनुषांगी प्रयोगशाला डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टिट्यूड रिसर्च (डीआईएचएआर) द्वारा तैयार सीबकथोर्न (एक प्रकार का फल) पर आधारित उत्पादों की तकनीक का हस्तांतरण किया जाएगा।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस तकनीक का हस्तांतरण डीआरडीओ फिक्की एटक कार्यक्रम के तहत किया गया है. इस कार्यक्रम के तहत ऐसी प्रौद्योगिकियों की पहचान की जाती है जिनका भारत और विदेश में वाणिज्यिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता हो। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य तकनीकों का सामाजिक फायदा उठाना है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि सीबकथोर्न एक अनोखा उत्पाद है. इसके अलावा सीबकथोर्न से जुड़ी कई अन्य विधियां भी हैं जिसका पतंजलि आयुर्वेद दोहन कर सकता है. पर्रिकर चाहते हैं कि डीआईएचएआर द्वारा विकसित किए गए उत्पाद के अलावा भी पतंजलि आयुर्वेद अन्य स्वास्थ्य उत्पाद लेकर आए।

डीआईएचएआर, डीआरडीओ की एक प्रमुख प्रयोगशाला है, जो लेह में स्थित है। इसका मुख्य कार्य ठंडे क्षेत्र में कृषि और पशु आधारित उत्पादों की तकनीक विकसित करना ताकि ऐसे क्षेत्रों में ताजा खाना स्थानीय तौर पर उपलब्ध हो सके।

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  1. Babubhai Bhanushali
    Aug 24, 2015 at 4:05 pm
    बाबा रामदेवजी आप से एक विनंती है जब आप DRDO के लिए खाना बनाते है , तो रेलवे के मुसाफिरों के लिए भी खाना बनाये, क्यों की IRCTC के अफसर अभी भी विदेशी कंपनी KRC से हाथ मिलरही है,
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    1. S
      S Dehati
      Aug 25, 2015 at 6:47 am
      अरबी इस्लाम से जो मुस्लिम सम्राज्य्वाद निकला उसने जिहादी विचारधारा का गलत इस्तेमाल किया.हिन्दू/मुस्लिम समस्या इसी की देन है.हिन्दूजन नॉन-मुस्लिम नहीं है बल्कि "आदि-मुस्लिम" हैं जब कि अरब के लोग नौ-मुस्लिम हैं.फिलस्तीन और वहां के तीनों धर्म भारतवर्ष की मूल परंपरा पर ही आधारित हैं.उनमें नया कुछ भी नहीं है.लेकिन जिहादी विचारधारा के गलत इस्तेमाल और मध्ययुग में हिन्दू भारत को सोल टारगेट बनाने के कारण तमाम समस्याएं बनीं हैं और पाकिस्तान जैसा घोर हिन्दू-विरोधी नकली राष्ट्र पैदा हुआ.
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