ताज़ा खबर
 

DRDO बना रहा हाइपरसोनिक मिसाइल, आवाज से 5 गुना रफ्तार से दुश्मनों पर करेगा वार!

भारत हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण के काम में जुटा है। यह मारक हथियार ध्वनि से पांच गुना तेज गति से अपने लक्ष्य को भेदने का माद्दा रखता है।

हाइपरसोनिक मिसाइल पर भारत काम शुरू कर रहा है।( यह तस्वीर सांकेतिक रूप में इस्तेमाल की गई है। फोटो सोर्स- द इंडियन एक्सप्रेस)

रक्षा अनुसंधान एंव विकास संगठन (DRDO) ने एक हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण का काम शुरू कर दिया है। ये मारक हथियार ध्वनि की पांच गुना तेज गति से अपने लक्ष्य को भेदने का माद्दा रखते हैं। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं होने की शर्त पर बताया है कि इनके परीक्षण के लिए एक विंड टनल और नई तकनीक जल्द ही शुरू की जाएगी। बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जल्द ही इस सुविधा का उद्घाटन करेंगे।

रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि भारत हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली की तकनीक को गंभीरता से विकसित करने में दिन-रात लगा हुआ है। दरअसल, अगली पीढ़ी के हथियारों की होड़ में हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पर कई देश काम कर रहे हैं। अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश हाइपरसोनिक हथियारों का परीक्षण विभिन्न तकनीक के आधार पर कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाने और फ्रंट-लाइन कॉम्बैट यूनिट्स को मजबूती देने के लिए विकसित किया जा रहा है।

मौजूदा वक्त में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टक मिसाइल बेहद घातक हैं। लेकिन, सुपरसोनिक टेक्नोलॉजी से लैस मिसाइल इससे कई गुना ज्यादा घातक हो जाएगी। ऐसी सूरत में इसे रोकने की क्षमता किसी के पास नहीं होगी।
हाइपरसोनिक हथियार विशेष रूप से आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के प्रतिरोध में डिजाइन किए गए हैं।

डीआरडीओ के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी ने कहा कि भारत में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, डीआरडीओ महत्वपूर्ण मिसाइल प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, और नौसेना प्रौद्योगिकी सहित 1,500 पेटेंट ऑफर कर रहा है। स्टार्टअप और मध्यम तथा छोटे विनिर्माण उद्यमों द्वारा इसे मुफ्त में हासिल किया जा सकता है। मुफ्त में दी जाने वाली कुछ पेटेंट में “मैन-माउंटेड एयर-कंडीशनिंग सिस्टम”, एयरक्राफ्ट अरेस्टर बैरियर सिस्टम, मिसाइल कंटेनरों के लिए एक स्लाइडिंग मैकेनिज्म, हल्के उच्च शक्ति वाले ब्रॉडबैंड माइक्रोवेव को अवशोषित करने वाली रबर, विस्तृत तापमान रेंज के लिए सिलिकॉन-आधारित लूब्रिकेंट शामिल हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स को डीआरडीओ के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय उद्योग जगत किसी भी पेटेंट प्रौद्योगिकी के लिए “लाइसेंस शुल्क या रॉयल्टी” का भुगतान नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘डीआरडीओ सिर्फ तकनीक की पेशकश नहीं करेगा, बल्कि उद्योग को भी बनाए रखेगा और उत्पाद बनाने में उनकी मदद करेगा।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 स्कूल में डीएम के स्वागत के लिए प्लास्टिक बैग में आई थी फूलों की माला, प्रिंसिपल पर ठोका 1000 का जुर्माना
2 मध्य प्रदेश: कैंसर से पीड़ित था 3 साल का मासूम, एंबुलेंस के लिए दौड़ता रहा परिवार और हो गई मौत
3 विभाजन, तीन बार जंग के बावजूद पाकिस्तान ने आज तक नहीं उठाया था यह कदम, इस सेवा पर लगाई रोक
IPL 2020
X