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पर्रिकर ने डीआरडीओ से कहा: मिसाइल तो बना ली, असॉल्ट राइफल क्यों नहीं?

डीआरडीओ ने अपने बजट को बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि चीन अपने रक्षा व्यय का करीब 20 प्रतिशत अनुसंधान एवं विकास पर खर्च कर रहा है..

Author नई दिल्ली | Updated: September 23, 2015 10:07 PM
केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (पीटीआई फाइल फोटो)

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज अपने बजट को बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि चीन अपने रक्षा व्यय का करीब 20 प्रतिशत अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) पर खर्च कर रहा है, जबकि भारत में यह खर्च महज पांच-छह प्रतिशत ही है जो बढ़ती रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है।

संगठन ने अधिक श्रमशक्ति की भी वकालत की और कहा कि किसी शीर्ष संस्थान का संकरा आधार होना कोई आदर्श स्थिति नहीं है और आने वाले कल की तकनीकी जरूरतों पर काम करने के लिए युवा वैज्ञानिकों की आवश्यकता है।

डीआरडीओ के महानिदेशक एस क्रिस्टोफर ने कहा कि कुछ मुद्दे हैं जो लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं और ये संस्थान की प्रगति के रास्ते में आड़े आ रहे हैं। उन्होंने यहां डीआरडीओ के 39वें निदेशक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘अधिक बजट और अधिक वैज्ञानिक श्रमशक्ति की आवश्यकता है। अनुसंधान एवं विकास के लिए रक्षा बजट का महज पांच-छह प्रतिशत भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब चीन अपने रक्षा बजट का करीब 20 प्रतिशत आर एंड डी पर खर्च करता है।’’

क्रिस्टोफर ने कहा कि श्रमशक्ति 2001 से ही स्थिर है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे डीआरडीओ लंबे समय से उठाता रहा है और वर्तमान में 436 वैज्ञानिकों का मामला मंजूरी के लिए सरकार के पास है।’’

संगठन के महानिदेशक ने कहा कि कोई भी अनुसंधान एवं विकास संस्थान भविष्य की प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं पर काम करने के लिए नये खून यानी युवाओं पर निर्भर करता है।

डीआरडीओ महानिदेशक ने कहा, ‘‘आज डीआरडीओ में वैज्ञानिकों की औसत आयु 40 साल से ऊपर है। शीर्ष का भारी होना और आधार संकरा होना अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिए स्वस्थ ढांचा नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार स्थिति की गंभीरता पर ध्यान देगी और श्रमशक्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी।’’

वहीं, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने डीआरडीओ को सभी तरह की मदद का आश्वासन दिया, लेकिन कहा कि वैज्ञानिकों को स्वयं को लगातार उन्नत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अपनी विकसित प्रौद्योगिकियों के उत्पादन के लिए उद्योगों के साथ तालमेल करना चाहिए।

पर्रिकर ने कहा, ‘‘आपने कुछ प्रौद्योगिकियां विकसित की होंगी, उनके उत्पादन के लिए उद्योगों से हाथ मिलाएं।’’ उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी उत्पाद विकसित करने में नौसेना के साथ डीआरडीओ का तालमेल भलीभांति परिपक्व है। डीआरडीओ को इस तरह का तालमेल सेना और वायु सेना के साथ विकसित करना चाहिए।

पर्रिकर ने डीआरडीओ के शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि वृहद आर्थिक क्षमताओं के लिए गतिविधियों के दोहराव से बचना चाहिए। इस संबंध में क्लस्टर प्रमुखों की महती भूमिका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि वह श्रमशक्ति की जरूरत के विषय को देखेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मेरा मानना है कि आईआईटी जैसे और अन्य संस्थानों के छात्रों की भागीदारी बढ़ाकर आप खुद ही इस कमी को दूर कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने बहुत कुछ किया है, लेकिन इसे खासकर साइबर तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक काम करने की आवश्यकता है। रक्षामंत्री ने कहा कि डीआरडीओ ने जहां मिसाइल प्रौद्योगिकी में काफी अच्छा काम किया है, वहीं ‘‘अन्वेषण प्रौद्योगिकी में हम अब भी काफी पीछे हैं जिसके लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है।’’

उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अगले पांच-दस वर्षों में प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होने की दिशा में काम करना चाहिए। पर्रिकर ने हैरानी जताते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के लिए असॉल्ट राइफल या सैनिकों के लिए अच्छी बुलेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं बनाई जा सकती।

यह उल्लेख करते हुए कि भारत का रक्षा निर्यात करीब 15 करोड़ डॉलर का है, उन्होंने कहा कि हम अगले दो-तीन साल में ज्यादा नहीं तो ‘‘एक अरब डॉलर का लक्ष्य क्यों नहीं रख सकते।’’ रक्षामंत्री ने कहा कि यदि वैज्ञानिक ‘‘कुछ छोटे मुद्दों’’ को सुलझा लेते हैं तो हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) में निर्यात की क्षमता है।

बैठक में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर के धवन और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ जी सतीश रेड्डी भी शामिल हुए। इस मौके पर राहा ने कहा कि डीआरडीओ पिछले सात दशकों में काफी हद तक आत्मनिर्भर होने के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम रहा है।

राहा के अनुसार डीआरडीओ के कंधों पर सशस्त्र बलों को बहुआयामी क्षमता के साथ रणनीतिक बलों में बदलने की जिम्मेदारी है। क्रिस्टोफर ने कहा कि साल 2014-15 में प्रत्येक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां अर्जित की गयी हैं।

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