ताज़ा खबर
 

स्मृति शेष डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: ताउम्र जमीन से जुड़े रहे, बेबाकी से कही अपनी बात

यूपीए-1 में सिंह के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहने के दौरान ही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) लागू की गई थी। उनके व्यक्तित्व में गंवई आक्रामकता व विद्वता का सम्मिश्रण था।

Author ऩई दिल्ली | September 14, 2020 5:03 AM
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह। (फोटो- प्रेम नाथ पांडेय, इंडियन एक्सप्रेस)

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का रविवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। सिंह के करीबी रहे केदार यादव के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे सांस लेने में कठिनाई और अन्य जटिलताओं के कारण उनका देहांत हुआ।

यूपीए-1 में सिंह के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहने के दौरान ही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) लागू की गई थी। उनके व्यक्तित्व में गंवई आक्रामकता व विद्वता का सम्मिश्रण था। उन्होंने बिहार की राजनीति में जमीन से जुड़े रहकर अपने लिए एक खास जगह बनाई और बेबाकी से अपनी बात कहने के लिए जाने जाते रहे।

शुक्रवार रात तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें आइसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। सिंह 74 वर्ष के थे। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। सिंह का अंतिम संस्कार पटना में होगा। वैशाली में पूर्व केंद्रीय मंत्री के प्रतिनिधि अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि उनका पार्थिव शरीर रविवार रात करीब आठ बजे पटना पहुंचा। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ वैशाली जिले में उनके गांव शाहपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर गंगा के किनारे हसनपुर घाट पर किया जाएगा।

जून में सिंह के कोरोना विषाणु से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और वह पटना के अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। कोविड-19 से उबरने के बाद की जटिलताओं को देखते हुए उन्हें हाल ही में दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था।

रघुवंश बाबू को जानने वाले बताते हैं कि संसद की कार्यवाही के दौरान जब कभी उनके सामने कोई उलझाव वाला विषय आता तो वह संदर्भ के लिए बेझिझक एमएन कौल और एसएल शकधर लिखित ‘संसद की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया’ का संबद्ध पृष्ठ खोलते और अपने अनूठे अंदाज में उसे पढ़ना शुरू कर देते।

वे लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में थे। लेकिन जीवन के अंतिम दिन आते-आते तक उनका भी राजद से मोह भंग हो गया था। उन्होंने एम्स- दिल्ली में इलाज के दौरान गुरुवार को अपना इस्तीफा राजद प्रमुख लालू प्रसाद को रिम्स- रांची भेजा था। राजद प्रमुख ने सिंह का इस्तीफा अस्वीकार कर दिया, लेकिन दोनों नेताओं- पुराने साथियों को साथ बैठ कर इस पर चर्चा करने का मौका नहीं मिला।

पेशे से प्रोफेसर रहे सिंह ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरूआत संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से की थी और 1977 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बने। कई बार बेलसंड विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया और 1996 में लोकसभा के सदस्य के तौर पर अपनी पारी की शुरुआत करने से पहले वह बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष भी रहे। सिंह ने वैशाली का 2014 तक पांच बार प्रतिनिधित्व किया।

बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा, ‘रघुवंश बाबू समाज के गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सदैव तत्पर रहते थे।’ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘वे जमीन से जुड़े राजनेता थे।’ नीतीश कुमार ने उनके पुत्र सत्यप्रकाश सिंह से दूरभाष पर बात कर उन्हें सांत्वना दी। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, ‘उन्होंने सिद्धांत की राजनीति की, राजनीति के लिए सिद्धांत नहीं छोड़ा।’

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 जीवन जीने का नाम: खुद को न जानना आत्महत्या है
2 जगन्माता: रामकृष्ण की प्रेरणा रहीं मां शारदा देवी
3 मठ परंपरा: ध्यानपुर से पहले हुआ चेन्नई स्थित बैरागी मठ का निर्माण
यह पढ़ा क्या?
X