डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर झूठ क्यों बोला? भारत को परेशान कर सकती है ये बात

अफगानिस्तान को लंबे समय से गृहयुद्ध में फंसा है और अब अमेरिका भी इसमें फंस गया है। अमेरिका को इससे निकलने के लिए पाकिस्तान के साथ की जरुरत है।

Author नई दिल्ली | Updated: July 25, 2019 3:57 PM
donald trump narendra modiट्रंप का कहना है कि पीएम मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था। (file/AP photo)

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा था कि जी20 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी कहा कि उन्हें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करके काफी खुशी होगी। ट्रंप का यह बयान आते ही भारतीय राजनैतिक हलकों में हंगामा हो गया। दरअसल कश्मीर मुद्दे पर भारत का हमेशा से स्टैंड रहा है कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच का मसला है और इसका हल भी द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही होगा और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन जानकार ट्रंप के कश्मीर मुद्दे पर दिए बयान के कई मायने निकाल रहे हैं। उनका मानना है कि ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर बयानबाजी शायद किसी रणनीति के तहत की है!

पाकिस्तान को खुश करने की कोशिशः माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दा पाकिस्तान को खुश करने के लिए उठाया है। बता दें कि अमेरिका लंबे समय से अफगानिस्तान से निकलने की कोशिशों में जुटा है। ऐसे में वह तालिबान के साथ बातचीत करना चाहता है। अब तालिबान के साथ बातचीत करने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान की जरुरत है, क्योंकि तालिबान और पाकिस्तानी सेना और खूफिया एजेंसी आईएसआई सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई में साथ थे, इसलिए कह सकते हैं कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ही तालिबान को बातचीत की मेज पर ला सकते हैं।

रणनीति तौर पर पाकिस्तान, अमेरिका के लिए अहमः पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति मौजूदा राजनैतिक हालात के हिसाब से काफी अहम है। दरअसल पाकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान और ईरान दोनों देशों से मिलती है। इसके साथ ही पाकिस्तान की चीन से भी नजदीकी है और दोनों देशों के बीच ताल्लुकात भी काफी अच्छे हैं। साथ ही पाकिस्तान से सेंट्रेल एशिया की दूरी भी बहुत ज्यादा नहीं है। यही वजह है कि अमेरिका, पाकिस्तान की इस भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे अहमियत देता है।

अफगानिस्तान को लंबे समय से गृहयुद्ध में फंसा है और अब अमेरिका भी इसमें फंस गया है। अमेरिका को इससे निकलने के लिए पाकिस्तान के साथ की जरुरत है। वहीं ईरान के साथ भी अमेरिका के संबंध इन दिनों काफी खराब दौर से गुजर रहे हैं और परमाणु करार टूटने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस मामले में भी अमेरिका पाकिस्तान में अपने लिए संभावनाएं देख रहा है।

ट्रंप की चुनावों पर नजरः अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं। ऐसे में ट्रंप कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जिसे वह बतौर उपलब्धि जनता के सामने रख सकें। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है? ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप पाकिस्तान को खुश कर अफगानिस्तान में तैनात 14 हजार अमेरिका सैनिकों की वतन वापसी की जुगत में भिड़े हैं, जिन पर सालाना 30 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम खर्च हो जाती है। इसलिए ट्रंप अफगानिस्तान से अमेरिका सेना को निकालकर यह पैसा भी बचाना चाहते हैं।

भारत के लिए चिंताजनक बातः अफगानिस्तान में जिस तरह से अमेरिका और पाकिस्तान, तालिबान के साथ बातचीत की मेज पर जाने को उत्सुक है, उससे अफगानिस्तान में भारत के हित प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल भारत वहां लंबे समय से विकास कार्यों में लगा है और इससे अफगानिस्तान की सरकार और आम जनता के बीच भारत की एक अच्छी छवि बनी है। अब जब अमेरिका, पाकिस्तान को अहम भूमिका में लेकर तालिबान के साथ बातचीत करने जा रहा है, उस स्थिति में वहां भारत के साइड लाइन हो जाने की आशंका है। साथ ही यदि बातचीत के बाद तालिबान फिर से अफगानिस्तान में मजबूत हुआ तो उसकी मदद से पाकिस्तान, भारत में अपने आतंकी नेटवर्क को बढ़ा सकता है।

असल बातचीत अमेरिका और पाकिस्तानी सेना के बीच!: इमरान खान पाकिस्तान की सरकार का, कह सकते हैं कि सिर्फ, एक मुखौटा हैं और पाकिस्तान में असल ताकत सेना और आईएसआई के पास ही है। जानकारों का कहना है कि इमरान खान अमेरिका में सिर्फ पाकिस्तान के राजनैतिक नेतृत्व का चेहरा बनकर गए हैं और असल में बातचीत अमेरिकी सरकार और पाकिस्तानी सेना के बीच हुई है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन भी अफगानिस्तान के नजरिए से ताजा बातचीत को लेकर आशावान नजर आ रहा है।

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