केरल हाई कोर्ट ने 16 साल पुराने एक मामले में सुनवाई करते हुए 10 साल की बच्ची की मौत के आरोपी दो डॉक्टरों के खिलाफ अहम फैसला सुनाया है। दरअसल, आरोपी डॉक्टरों ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल पर रोक लगाई जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि डॉक्टर भी कानून से ऊपर नहीं हो सकते। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दोनों आरोपी डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही का आरोप है तो मुकदमे का सामना तो करना पड़ेगा।

’16 साल में ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ’

हाई कोर्ट की जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की बेंच ने डॉक्टरों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि घटना को 16 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में और देरी होने से लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कम होता है। बता दें कि आरोपी डॉक्टरों ने याचिका दाखिल कर मेडिकल एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए ट्रायल रोकनी की अपील की थी।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि यह मामला 2 अगस्त 2010 का है जब एक 10 साल की बच्ची की मौत अस्पताल में हो गई थी। बच्ची को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसे दवाएं दी गईं, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे आईसीयू और फिर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना सामने आया था।

एक्सपर्ट पैनल की जांच में आरोपियों को मिल गई थी राहत

बच्ची की मौत को लेकर उसके पिता ने डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। जांच के दौरान यह मामला मेडिकल एक्सपर्ट पैनल के पास गया तो वहां पैनल ने डॉक्टरों को राहत दी थी, लेकिन बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर दोबारा जांच हुई। नई रिपोर्ट में पैनल ने कहा कि दोनों डॉक्टरों की ओर से गंभीर मेडिकल लापरवाही हुई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसे अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

डॉक्टरों की चुनौती वाली याचिका में क्या कहा गया था?

हाईकोर्ट में डॉक्टर्स की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि एक्सपर्ट पैनल के पास उनके खिलाफ गंभीर लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पैनल में बच्चों के रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) नहीं थे, इसलिए उसकी राय को सही नहीं माना जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने दलील खारिज करते हुए क्या कहा?

हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की दलील खारिज करते हुए कहा कि एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट सिर्फ एक विशेषज्ञ राय (Expert Opinion) है, अंतिम फैसला नहीं। ट्रायल के दौरान डॉक्टरों को इस रिपोर्ट को चुनौती देने का पूरा मौका मिलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉक्टरों ने पहले कभी पैनल की संरचना पर सवाल नहीं उठाया था, जबकि शुरुआती रिपोर्ट उनके पक्ष में थी। अब रिपोर्ट उनके खिलाफ आई तो उन्होंने पैनल की योग्यता पर सवाल उठाए, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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मां के लिए उसके बच्चे का दुनिया से चले जाना बहुत दर्दनाक होता है, इंसान ही नहीं जानवर भी इस तकलीफ की गहराई को समझते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखकर दुनिया भर के लोग रो पड़े। ऑस्ट्रेलिया की संस्था जियोग्राफ़ मरीन रिसर्च ने ड्रोन से एक डॉल्फिन का वीडियो रिकॉर्ड किया है, इसका नाम फ्रैगल है, इसकी कहानी लोगों को भावुक कर रही है। यहां पढ़ें पूरी खबर…