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कोमा में पति, डॉक्टर पत्नी मांग रही है प्रॉपर्टी बेचने का अधिकार

महिला डॉक्टर ने आग्रह किया कि उसे पति की संपत्ति का मैनेजर बनाया जाए ताकि कुछ अचल और चल संपत्तियों को बेचकर इलाज के खर्चे को पूरा कर सके। बच्चों की पढ़ाई पर कुछ पैसे खर्च कर सकें।

Author Published on: April 9, 2019 6:15 PM
तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (AP Photo/File)

महाराष्ट्र के मुंबई की रहने वाली एक महिला डॉक्टर ने बाम्बे हाई कोर्ट से अपने पति की संपत्ति का मैनेजर और देखरेख करने वाली के रूप में नियुक्त करने की गुहार लगाई है। महिला के पति भी एक डॉक्टर ही हैं लेकिन वर्ष 2013 से वे कोमा में हैँ। जस्टिस अभय ओका और एमएस संकलेचा की खंडपीठ ने बीवाईएल नायर चैरिटेबल हॉस्टपीटल के डीन को महिला के पति की जांच के लिए एक न्यूरोसर्जन नामित करने का आदेश दिया है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, महिला डॉक्टर ने आग्रह किया कि उसे पति की संपत्ति का मैनेजर बनाया जाए ताकि कुछ अचल और चल संपत्तियों को बेचकर इलाज के खर्चे को पूरा कर सके। बच्चों की पढ़ाई पर कुछ पैसे खर्च कर सके।

महिला डॉक्टर के आग्रह पर जजों ने कहा कि डीन एक न्यूरो-फिजिशियन या न्यूरोसर्जन को नामित करें ताकि वे घर जाकर महिला के पति की जांच करें और कोर्ट को वर्तमान स्थिति की जानकारी दें। यदि न्यूरो-फिजिशियन या न्यूरोसर्जन को लगता है कि कुछ ऐसे टेस्ट करने की जरूरत है, जो घर पर नहीं हो सकता है, उस स्थिति में कोमा में पड़े व्यक्ति को एंबुलेंस की सहायता नायर अस्पताल ले जा सकते हैं। कोर्ट ने डीन को इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में देने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई की अगली तारीख 30 अप्रैल निर्धारित की है।

याचिकाकर्ता की वकील सिद्धार्थ रोंघे ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं था जिससे कि कोमा में पड़े व्यक्ति की संपत्ति का मैनेजर या देख-रेख की जिम्मेदारी के लिए किसी को नियुक्त किया जाए। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत किसी अन्य (करीबी परिजन) को यह अधिकार तब मिलता है, जब व्यक्ति की मौत हो जाती है। संरक्षक और वार्ड अधिनियम एक नाबालिग के लिए देखरेख की नियुक्ति से संबंधित है, जबकि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम में ‘मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति’ की संपत्ति का प्रबंधन करने के लिए एक देखरेख करने वाले की नियुक्ति के प्रावधान हैं।

महिला डॉक्टर के पति एक पैथोलॉजिस्ट हैं। वर्ष 2013 के सितंबर महीने में पोंटीन हेमरेज की वजह से वे अचेत हो गए थे और कोमा में चले गए थे। याचिका में यह लिखा गया है कि उनके नाम पर दहिसर और भायंदर में आवासीय और व्यवसायिक संपत्ति है। साथ ही बैंक और डीमेट अकाउंट भी हैं। परिवार में कॉलेज जाने वाले दो बच्चे हैं जो दहिसर के एक छोटे से फ्लैट में रहते हैं, जहां लिफ्ट की सुविधा नहीं है। यदि उन्हें (कोमा में पड़े व्यक्ति) तत्काल किसी मेडिकल सहायता की जरूरत होती है तो अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाएगा। याचिका के माध्यम से महिला डॉक्टर ने कहा कि वह कुछ संपत्तियों को बेचना चाहती है, जिसमें फ्लैट शामिल है ताकि वह एक बड़ा फ्लैट खरीद सके, जिसमें लिफ्ट की सुविधा हो। दोनों बच्चे भी अनापत्ति प्रमाणपत्र (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) देने के लिए राजी हैं।

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