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वाकई में ऐसा ही मानते हैं BJP के कुछ नेता? COVID-19 से न होने वाला सियासी नुकसान

एक वर‍िष्‍ठ पत्रकार ने बीजेपी के बड़े नेताओं से 'ऑफ द र‍िकॉर्ड' बातचीत के आधार पर ल‍िखा है क‍ि बीजेपी नेताओं को लगता है क‍ि व‍िपक्ष में नरेंद्र मोदी की छव‍ि कमजोर करने की ताकत नहीं है और जनता आने वाले वक्‍त में सब भूल जाएगी।

Coronavirus, Infectionsगुजरात के अस्पताल के बाहर दयनीय हालत में कोरोना मरीज (एक्सप्रेस फोटो निर्मल हरिंद्रन)

कोरोना से लड़ने में सरकार की कमजोर तैयार‍ियों और जनता की बढ़ती मुसीबतों की तस्‍वीरें अब आम हैं। ऐसी स्‍थ‍ित‍ि के ल‍िए केंद्र की मोदी सरकार देश-व‍िदेश में जबरदस्‍त आलोचनाओं की श‍िकार हो रही है। पर क्‍या बीजेपी को इसकी च‍िंता है? वर‍िष्‍ठ पत्रकार मनीष छ‍िब्‍बर ने बीजेपी के बड़े नेताओं से ‘ऑफ द र‍िकॉर्ड’ बातचीत के आधार पर इंड‍िया अहेड न्यूज पोर्टल पर एक र‍िपोर्ट ल‍िखी है। उनका कहना है क‍ि भाजपा के कुछ बड़े नेताओं का जवाब था कि इन बातों से पार्टी को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा।

छ‍िब्‍बर से बातचीत करने वालों में दो मंत्री भी थे। नाम न खोले जाने की शर्त पर उन्होंने जो कहा उसका आशय यही था कि लंबे समय के दौरान सावधानी से बनी और पोषित मोदी जी की छवि ऐसी है कि विपक्षी दल हल्की-सी खरोंच भी न लगा पाएंगे। विपक्ष लाशों की राजनीति कर रहा है। उसके हमलों से बाल भी बांका नहीं होगा। पूरा देश जानता है कि मौजूदा समस्या को हल करने के लिए मोदी से बेहतर कोई नहीं है।

लेकिन, जब सीनियर मंत्री और पार्टी पदाधिकारी असंवेदनशील बयान देते हैं, तब क्या छवि खराब नहीं होती? इस सवाल पर इन नेताओं ने माना कि कभी-कभी ऐसी बातों से ऐसी छवि बन जाती है कि मानो हम परवाह नहीं करते। लेकिन, ऐसा जब कभी होता है, बोलने वालों की क्लास ली जाती है। भले ही वह व्यक्ति कोई मंत्री क्यों न हो।

क्या कोरोना जनित मानव त्रासदी की हृदय विदारक खबरों, फोटोग्राफों और वीडियोज़ का जनता पर कोई फर्क न पड़ेगा? इस सवाल पर एक मंत्री ने कहा कि हालात सामान्य होते ही लोग सब भूल जाएंगे। एक बड़ी बात और कि इन विपरीत स्थितियों का फायदा लेने के लिए विपक्ष मौजूद ही नहीं। सोशल मीडिया हमारे साथ है। चिंता की कोई बात नहीं। मंत्री ने कहाः राजनीति में सफलता का एक ही पैमाना है और वह है चुनाव जीतना। और, मोदी जी यह बात जानते हैं।

ये हैं बीजेपी नेताओं के विवादित वक्तव्य

कुछ दिन पहले कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल कुछ ऐसा बोल पड़े जिसका अर्थ था कि लोग बहुत ऑक्सीजन खर्च कर रहे हैं। वह बोलेः राज्य सरकारों को ऑक्सीजन की डिमांड को काबू में रखना चाहिए। किसी वस्तु की उपलब्धता के लिए जितना जरूरी सप्लाइ प्रबंधन होता है, उतना ही जरूरी होता है डिमांड का प्रबंधन। उन्होंने कोविड संक्रमण रोकने का जिम्मा राज्य सरकारों पर डाला और कहा कि ऑक्सीजन का फालतू खर्च और बरबादी बहुत हो रही है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी एक रैली में कहा कि ऐसा जनसमुद्र उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्हें अपना खुद का गढ़ा नारा भी न याद रहा…दो गज़ की दूरी…। ट्रॉल्स ने उनकी जमकर खबर ली। कहा गया कि पीएम दिन में भीड़ इकट्ठा करवाते हैं और शाम को कोरोना की समीक्षा में जुगत भिड़ाते हैं कि भीड़ के इकट्ठा होने पर किस तरह अंकुश लगाया जाए।

उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा था- कुंभ मां गंगा के तट पर हो रहा है। गंगा की धारा खुद एक आशीर्वाद है। यहां कोई कोरोना-वरोना नहीं हो सकता। उनके इस बयान की घोर आलोचनाा हई। कुंभ से लौटने वालों की खासी संख्या कोरोना-पॉजिटिव भी निकली।

मध्य प्रदेश के मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने दार्शनिकों की तरह कह डाला था- आया है सो जाएगा…। चर्चा कोविड से बढ़ती मौतों पर हो रही थी। मंत्री जी बोल पड़ेः इन मौतों को कोई रोक नहीं सकता। कोरोना से बचने के लिए हर आदमी सहयोग की बात कर रहा है…। आपका कहना है कि लोग अनेक लोग मर रहे हैं। अरे भाई, लोग बूढ़े होते हैं और फिर उनको मरना ही होता है।

आपको असम के मंत्री हेमंत बिश्व शर्मा, गुजरात के विधायक गोपाल पटेल की बातें भी याद होंगी। जब मार्च में कोरोना उभरने लगा था, शर्मा जी लगता था कि अब मास्क की जरूरत नहीं। और, पटेल को यह विश्वास था कि जो हार्ड वर्किंग भाजपाई हैं, उन्हें कोरोना नहीं होगा।

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