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इबोला संकट: सरकार ने कहा कि पुख्ता तैयारी, घबराने की जरूरत नहीं

भारत में इबोला का पहला मामला सामने आने के एक दिन बाद सरकार ने आज इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए और इसके मामलों का पता लगाने के लिए अपनी तैयारी और पुख्ता करने का फैसला किया तथा हवाईअड्डों पर खामियों को दूर करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन […]

Author Updated: November 19, 2014 9:21 PM

भारत में इबोला का पहला मामला सामने आने के एक दिन बाद सरकार ने आज इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए और इसके मामलों का पता लगाने के लिए अपनी तैयारी और पुख्ता करने का फैसला किया तथा हवाईअड्डों पर खामियों को दूर करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

इबोला मामले में चिंता बढ़ने के साथ स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि स्थिति ‘पूरी तरह से नियंत्रण’ में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
मंत्री ने हालात की समीक्षा के लिए मंगलवार को एक अंतर-मंत्रालयीन बैठक की अध्यक्षता की थी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय विशेषज्ञों का दल गठित करेगा जो राज्यों का दौरा करेंगे तथा इबोला के मरीजों का उपचार करने वाले अस्पतालों में तैयारियों का जायजा लेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने जम्मू में संवाददाताओं से कहा कि दिल्ली हवाईअड्डे की तरह की व्यवस्था 24 अन्य हवाईअड्डों पर की गई है। दिल्ली हवाईअड्डे पर दुरुस्त बंदोबस्त के कारण लाइबेरिया से लौटे 26 साल के एक भारतीय नागरिक को इबोला वायरस के संक्रमण का पता चला था।

हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि हवाईअड्डों पर आने वाले यात्रियों में घातक वायरस का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग के दिशानिर्देशों का उचित तरीके से पालन नहीं किया जा रहा जिनमें उनकी 21 दिन की यात्रा के विवरण की पड़ताल करना शामिल है। प्रक्रिया में कुछ खामी सामने आई हैं।

जिन 14 हवाईअड्डों को चिह्नित किया गया है उनमें से 12 में इबोला संक्रमित लोगों को अलग से रखने की सुविधा स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है और भारत में फिलहाल इस तरह की सुविधाओं का इस्तेमाल दिल्ली और मुंबई में ही हो रहा है।

आज जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, ‘‘खामियों का पता लगाने के लिहाज से सभी हवाईअड्डों पर निरीक्षण के लिए तीन सदस्यीय दल बनाया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन और आव्रजन विभागों के अधिकारी होंगे।’’

बयान के मुताबिक समिति एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। नड्डा ने कहा, ‘‘घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।’’
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि हवाईअड्डों पर मरीजों को अलग से रखने की सुविधाओं में सभी दिशानिर्देशों और नियमों का पालन किया जाए। नड्डा ने कहा कि लाइबेरिया से 10 नवंबर को यहां आने वाले व्यक्ति में विषाणु का पता लगाना सरकार की ओर से ‘अतिरिक्त सतर्कता’ का परिणाम है।

मंत्री ने कहा कि यात्री में बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं। उसे अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप निगरानी में रखा गया है। जब तक उसके सभी परीक्षण नकारात्मक नहीं आते तब तक उसे निगरानी में रखा जायेगा।

गौरतलब है कि उस व्यक्ति का लाइबेरिया में इबोला का उपचार किया गया था और अधिकारियों ने प्रमाणपत्र दिया था कि वह ठीक हो गया है।
मंत्री ने कहा, ‘‘दूसरे देश से आने वाले सभी लोगों की पूरी तरह से जांच परख की जा रही है। हवाईअड्डों पर यात्रियों के यात्रा और चिकित्सकीय इतिहास की जांच की जा रही है।’’

उन्होंने कहा कि 24 हवाई अड्डों पर अलग थलग रखने की व्यवस्था स्थापित की गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा नागर विमानन मंत्रालय संयुक्त रूप से पहल कर रहे हैं। सेना के डॉक्टरों की भी मदद मांगी गई है।

एम्स एवं अन्य अस्पतालों, डब्ल्यूएचओ, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अलावा कई मंत्रालयों के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमन के तहत भारत में क्षमता विस्तार की जरूरत के संबंध में मंत्रालय की कार्य योजना को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि इस महीने के अंत तक 10 प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है।

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