ताज़ा खबर
 

समय से पहले डीएलएफ ने छोड़ा पार्किंग का संचालन, चार करोड़ सिक्योरिटी मनी जब्त

डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया को नोएडा प्राधिकरण ने एक फरवरी 2018 को सेक्टर-18 सात साल के लिए बहुमंजिला पार्किंग संचालन के लिए निविदा अनुमति दी थी। कंपनी ने यह निविदा उस समय न्यूनतम मूल्य (बेस प्राइज) 45 लाख रुपए प्रतिमाह से 30 लाख अधिक पर हासिल की थी, लेकिन कंपनी दो साल भी ठीक से पार्किंग का संचालन नहीं कर सकी।

Author नोएडा | July 26, 2020 7:17 AM
गौतम बुद्धनगर (नोएडा) स्थित डीएलएफ का पार्किंग स्थल।

समय से पहले सेक्टर-18 की बहुमंजिला पार्किंग संचालन छोड़ने पर डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया पर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है। जमानत राशि (सिक्योरिटी मनी) के रूप में कंपनी का जमा चार करोड़ रुपए जब्त कर लिया गया है। निविदा शर्तों के अनुसार तीन माह का किराया जीएसटी सहित करीब तीन करोड़ रुपए और मांगा गया है। साथ ही कंपनी से जल-सीवर समेत बिजली निगम के नो ड्यूज सार्टिफिकेट (एनडीसी) देने को कहा गया है। हालांकि डीएफएफ प्रबंधन का कहना है कि हमने प्राधिकरण को पार्किंग वापस (सरेंडर) कर दी है।

डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया को नोएडा प्राधिकरण ने एक फरवरी 2018 को सेक्टर-18 सात साल के लिए बहुमंजिला पार्किंग संचालन के लिए निविदा अनुमति दी थी। कंपनी ने यह निविदा उस समय न्यूनतम मूल्य (बेस प्राइज) 45 लाख रुपए प्रतिमाह से 30 लाख अधिक पर हासिल की थी, लेकिन कंपनी दो साल भी ठीक से पार्किंग का संचालन नहीं कर सकी। तीन फरवरी को कंपनी ने नोएडा प्राधिकरण में पार्किंग वापस करने का आवेदन कर दिया। हालांकि कंपनी को पार्किंग संचालन करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने आग्रह किया था, लेकिन कंपनी ने संचालन करने से मना कर दिया।

इसके बाद कंपनी की निविदा को लेकर लेखा विधि विभाग फाइल भेज दी गई थी। जहां कंपनी के निविदा नियम व शर्तों के आधार पर हिसाब किताब लगाया गया। 15 जुलाई को यह फाइल वर्क सर्किल दो के कार्यालय भेज दी गई है। जिसमें डीएफएल मॉल आॅफ इंडिया से क्या-क्या लिया जाना है, विस्तार से अंकित किया गया है। वर्क सर्कल दो के वरिष्ठ प्रबंधक राहुल शर्मा के मुताबिक कंपनी की समयसीमा दो मई समाप्त हो चुकी है। कंपनी का पूरा हिसाब निर्धारित हो चुका है। उसे तीन माह का किराया चुकाना होगा और जमानत राशि भी जब्त होगी।

पूर्णबंदी के दौरान का किराया नहीं देना चाहती कंपनी कंपनी पूर्णबंदी का किराया नहीं देना चाहती है, इसलिए प्राधिकरण से अनुरोध किया है कि इस दौरान करीब 50 दिन का किराया नहीं लिया जाए। सिर्फ 35 से 40 दिन का किराया दिया जा सकता है। हालांकि प्राधिकरण इसे छोड़ना भी चाहती है लेकिन निविदा शर्तों के नियम इसके आड़े आ रहे हैं। चूंकि कंपनी तीन फरवरी को पार्किंग संचालन छोड़ चुकी है, तब पूर्णबंदी भी नहीं लागू हुई थी। लिहाजा कंपनी को दो मई तक का किराया चुकाना होगा।

डीएलएफ को छोड़ना होगा ढाई करोड़ का सामान: डीएलएफ ने प्राधिकरण को बताया है कि पार्किंग संचालन के दौरान बूम बैरियर और वाहन स्कैनर खुद लगवाए गए हैं। इस पर कंपनी का ढाई करोड़ रुपए का खर्च आया है। इसे समायोजित किया जाए, लेकिन प्राधिकरण ने हवाला दिया है कि नियम शर्त में अंकित है कि जिस समय कंपनी पार्किंग छोड़ेगी, तब उसे लगाए गए सभी सामान को वहीं छोड़ना होगा। जो प्राधिकरण की संपत्ति होगी।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 26 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन 2005 में मुंबई की भीषण बारिश में गई थी एक हजार से ज्यादा लोगों की जान
2 शमा मोहम्मदः कुवैत से लौट डेंटिस्ट की पढ़ाई कर बनीं पत्रकार, फिर चलीं राजनीति की राह पर, अब Congress ने बनाया राष्ट्रीय प्रवक्ता
3 जमातियों के कारण फैला कोरोना- शिवराज सिंह के COVID-19 पॉज़िटिव पाए जाने पर लोग शेयर करने लगे पुराना बयान
राशिफल
X