कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अभी भी खींचतान जारी है। राज्य कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को सीएम कुर्सी पर बैठाना चाहते हैं, ऐसे में कांग्रेस के आलाकमान की नींद उड़ी हुई है। इस मुद्दे को आलाकमान किसी भी तरह से सुलझाना चाहती है।
पार्टी के सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के आलाकमान इस मुद्दे को सुलह करने के पक्ष में हैं, जिससे दोनों नेताओं के बीच चल रही सत्ता की खींचतान और राज्य में हो रहे आपसी कलह को खत्म किया जा सके। इसलिए आलाकमान ने मंगलवार को दोनों नेताओं से बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया है।
आलाकमान और वरिष्ठ नेता दोनों से करेंगे बात
सूत्रों के मुताबिक, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल व रणदीप सिंह सुरजेवाला सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से अलग-अलग और फिर एक साथ मुलाकात करेंगे। इसके बाद नेतृ्त्व बदलाव के मुद्दे भी पर चर्चा की होगी, जहां एक और शिवकुमार के करीबी नेता रोटेशनल मुख्यमंत्री यानी बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने के फॉर्मूले के बात कही तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के आलाकमान इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप हैं।
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व बदलाव के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि यह बदलाव सभी को स्वीकार हो। इसी वजह है कि राज्यसभा और एमएलसी चुनाव और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांच नगर निगम के चुनाव नजदीक हैं। इस मुद्दे पर तब चर्चा हुई, जब पिछले सप्ताह मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और के.सी वेणुगोपाल यहां मिले थे।
शिवकुमार कई माह से बना रहे दबाव
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक ओर कैबिनेट में फेरबदल करने के पक्ष में हैं, तो डीके शिवकुमार चाहते हैं पार्टी आलाकमान पहले नेतृत्व में बदलाव पर फैसला करे। जुलाई 2020 में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रहे डीके शिवकुमार पिछले कई माह से नेतृत्व में बदलाव के लिए कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि आलाकमान इन नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हमने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। हम दोनों नेताओं की बात सुनना चाहते हैं।”
सिद्धरमैया के जवाब पर करेगा निर्भर
हालांकि सूत्रों का मानना है कि सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि सिद्धारमैया इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय से आने वाले कांग्रेस के एकमात्र मुख्यमंत्री हैं। उनका समर्थन करने वालों का मानना है कि उनकी जगह किसी वोक्कालिगा (शिवकुमार) का लाना, राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे को पटरी से उतार सकता है।
बीते कुछ वर्षों में सिद्धारमैया ने अंहिदा को खड़ा करने पर बहुत मेहनत से काम किया है। अहिंदा एक कन्नड़ भाषा का संक्षिप्त नाम है, जो अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का गठबंधन है। सिद्धारमैया के करीबियों का कहना है कि जहां एक तरह अंहिदा वोट बैंक पूरी तरह से सिद्धारमैया के साथ मजबूती से खड़ा है, वहीं, दूसरी तरह शिवकुमार को वोक्कालिगा समुदाय का भी पूरा समर्थन हासिल नहीं है, क्योंकि यह समुदाय कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच बंटा हुआ है।
खड़गे भी लगाए बैठे आस
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी एक दलित हैं, इसी वजह से वे भी मुख्यमंत्री की कुर्सी को दूर से उम्मीद की नजरों से देख रहे हैं। लेकिन कुछ नेताओं का कहना है कि उम्र अब उनके हक में नहीं है। 83 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे पिछले तीन दशकों में तीन बार मुख्यमंत्री की दौड़ में पीछे रह चुके हैं। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से राज्यसभा के उन चार सांसदों में से एक हैं जो अगले माह रिटायर हो रहे हैं।
क्या है शिवकुमार गुट का तर्क?
जब मल्लिकार्जुन खड़गे से हाई कमान की दोनों नेताओं के साथ हुई बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा, मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता है। राहुल गांधी इस बारे में बात करेंगे। वहीं सीएम कुर्सी के लिए उम्र भी एक पहलू है, जिसकी चर्चा शिवकुमार गुट भी करता है। उनका तर्क है सिद्धारमैया 78 वर्ष के हैं और 2028 में जब कर्नाटक में चुनाव होंगे, तब तक उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक हो चुकी होगी। ऐसे में पार्टी किसी ऐसे 80 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सकती, जिसने पहले ही यह साफ कर दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं है।
शिवकुमार गुट पूछते हैं कि क्या उनसे भाजपा के खिलाफ जोरदार लड़ाई की उम्मीद की जा सकती है, जबकि उन्हें इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है? जो लोग नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में हैं, उनका कहना है कि शिवकुमार काफी काबिल हैं और मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पास बनाए रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया कई मंत्रियों और विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें अभी अधिकतर विधायकों का समर्थन हासिल हैं लेकिन अगर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें हटाने का फैसला करता है को वे किसी भी तरह की बगावत की संभावना से इनकार कर सकते हैं।
मुझे दिल्ली बुलाया गया- सिद्धारमैया
बेंगलुरु में पत्रकारों ने जब सिद्धारमैया से पूछा तो उन्होंने कहा, “मुझे दिल्ली बुलाया गया है। कल (26 मई) सुबह 11 बजे एक बैठक है। बैठक का विषय मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे बुलाया गया है। कल रात के.सी. वेणुगोपाल ने मुझे कॉल किया और बैठक की तारीख और समय की जानकारी दी।” हाईकमान के साथ बैठक को लेकर चल रही अटकलों से जुड़े एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा, “यह तो हमेशा ही होता रहता है।”
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देश के 5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके चलते कांग्रेस पार्टी अपने दलित और अल्पसंख्यकों के वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। इसीलिए पार्टी ने अपने अल्पसंख्यक और दलित विभाग के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक संयुक्त अभियान शुरू करने की प्लानिंग में जुटी हुई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
