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1.8 लाख घरों में नहीं मनेगी दिवाली: सैलरी संकट से परेशान BSNL, MTNL कर्मी घेरेंगे PM आवास, भूख हड़ताल की भी दी चेतावनी

financialexpress.com से कृष्णांनद त्रिपाठी की रिपोर्ट। 22 हजार एमटीएनएल कर्मचारियों का पिछले दो महीने (अगस्त व सितंबर, 2019) से वेतन नहीं मिला है। वहीं, 1.58 लाख बीएसएनएल कर्मचारियों को पिछले माह तनख्वाह नहीं मिल पाई है।

Author नई दिल्ली | Updated: October 14, 2019 11:17 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। (फोटो सोर्स: फाइनैंशल एक्सप्रेस)

सैलरी संकट से बुरी तरह जूझ रहे BSNL और MTNL कर्मचारियों के घर इस साल दिवाली पर खुशियां रोशन होना मुश्किल ही है। दरअसल, त्यौहारी मौसम में तनख्वाह न मिलने और टेलीकॉम सेक्टर में कर्ज के बोझ तले दबे इन दोनों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद करने की आशंकाओं से परेशान इन कर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

एमटीएनएल कर्मचारियों ने इंडिया गेट से पीएम आवास यानी कि 7 लोक कल्याण मार्ग तक विरोध मार्च निकालने को लेकर नोटिस दिया है, जबकि बीएसएनएल कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल पर रहेंगे। बता दें कि इन कर्मचारियों को अक्टूबर की तनख्वाह फिलहाल नहीं मिली है। वह भी तब, जब इस महीने में दो अहम त्यौहार (दशहरा और दीपावली) पड़े हैं।

22 हजार एमटीएनएल कर्मचारियों का पिछले दो महीने (अगस्त व सितंबर, 2019) से वेतन नहीं मिला है। वहीं, 1.58 लाख बीएसएनएल कर्मचारियों को पिछले माह तनख्वाह नहीं मिल पाई है। एमटीएनएल एग्जीक्यूटिव्स एसोसिएशन के महासचिव वीके तोमर ने बताया, “हमने विरोध मार्च निकालने को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। बुधवार (16 अक्टूबर) शाम इंडिया गेट से पीएम आवास तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा।”

इसी दौरान मुंबई में ये कर्मचारी मोमबत्तियां लेकर विरोध मार्च निकालेंगे, जो कि आजाद मैदान से राज्यपाल निवास तक जाएगा। तोमर ने आगे कहा- जुलाई की तनख्वाह में 20 दिन की देरी की गई और वह हमें 20 अगस्त को मिली। एमटीएनएल कर्मियों को इसके बाद से कोई सैलरी नहीं मिली है।

BSNL व MTNL में सूत्रों ने बताया कि इन दोनों कंपनियों के लगभग 1.8 लाख कर्मचारियों के वेतन का भुगतान न होना बेहद आश्चर्यजनक है, क्योंकि हाल ही में सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (DA) में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की है। केंद्र के इस कदम से सरकारी खजाने पर तकरीबन 16 हजार करोड़ रुपए प्रति साल अतिरिक्त बोझ आएगा।

सूत्रों की मानें तो सरकार पर एमटीएनएल कर्मियों की सैलरी के रूप में 180 करोड़ रुपए प्रति माह का बोझ है, जबकि बीएसएनएल के कर्मचारियों को दी जाने वाली सैलरी के हिस्से की रकम 1200 करोड़ रुपए के आस-पास है।

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