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पटना भगदड़ मामला: सरकारी जांच दल ने जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया

बिहार सरकार की जांच पैनल ने सुनियोजित भीड़ प्रबंधन योजना की कमी, मूलभूत सुविधाओं का खराब इंतजाम और जिलाधिकारी का ड्यूटी पर ना होना आदि को पटना में तीन अक्तूबर को हुई भगदड़ का कारण बताया है। प्रदेश की राजधानी में हुई इस भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गई थी। गृहमंत्रालय के प्रधान […]
Author November 29, 2014 16:37 pm
तीन अक्टूबर को गांधी मैदान में हुई भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गई थी।

बिहार सरकार की जांच पैनल ने सुनियोजित भीड़ प्रबंधन योजना की कमी, मूलभूत सुविधाओं का खराब इंतजाम और जिलाधिकारी का ड्यूटी पर ना होना आदि को पटना में तीन अक्तूबर को हुई भगदड़ का कारण बताया है। प्रदेश की राजधानी में हुई इस भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गई थी।

गृहमंत्रालय के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘जांच के दौरान हमने इंतजाम में तमाम खामियां पायीं जिसके कारण भगदड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सका। हादसे के सभी पहलूओं पर ध्यान देने के बाद हमने पाया कि जिला प्रशासन, जिला पुलिस प्रशासन, पटना नगर निगम परिषद् और यातायात पुलिस इसके लिए जिम्मेदार थे।’’

राज्य सरकार की ओर से गठित दो सदस्यीय टीम में सुभानी के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) गुप्तेश्वर पांडेय शामिल हैं।
सुबहानी ने बताया कि समारोह के लिए सुनियोजित भीड़ प्रबंधन योजना नहीं थी। घटनास्थल के पास ऊंचाई पर लगी बड़ी लाइट काम नहीं कर रही थी, अतिरिक्त लाइटें नहीं लगायी गयी थीं, तैनात किए गए मजिस्ट्रेटों की संख्या कम थी और कुछ ड्यूटी पर अनुपस्थित थे।

गृहमंत्रालय के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने यह भी कहा कि लोगों की गतिविधियों को निर्देशित करने के लिए लाउडस्पीकर नहीं लगाए गए थे और गांधी मैदान से भीड़ को निकालने के लिए यातायात को नहीं रोका गया था।

भगदड़ के कारणों पर सुभानी ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और जांच के दौरान अन्य तथ्यों से पता चला है कि बाहर निकलने वाले द्वार पर केबल का एक तार गिर गया था और अफवाह फैल गयी कि तार में बिजली की करंट है।

उन्होंने कहा, ‘‘गांधी मैदान के दक्षिणी दरवाजे से उस वक्त बड़ी संख्या में लोग निकल रहे थे और अफवाह के कारण भगदड़ मच गयी। लोग एक-दूसरे पर गिर गए और कुचल कर मारे गए।’’

गृहमंत्रालय के प्रधान सचिव ने यह भी कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों और मृतकों तथा घायलों के रिश्तेदारों ने बताया कि भगदड़ का एक कारण असामाजिक तत्वों द्वारा छेड़खानी और यौन उत्पीड़न का प्रयास भी था। दशहरे वाले दिन तीन अक्तूबर को रावण वध के बाद लोग गांधी मैदान से बाहर निकल रहे थे उसी दौरान दक्षिणी द्वार पर भगदड़ मच गयी।

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