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देशद्रोह नहीं है असहमति, मुस्लिमों पर हमले ठीक नहीं- 114 पूर्व सैन्य अफसरों ने पीएम को लिखी चिट्ठी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्रियों के नाम सेना के दिग्गज अफसरों ने एक खुला खत लिखा है।

बीते महीने कैम्पेन Not In My Name के दौरान जंतर-मंतर पर इक्ट्ठा हुए लोग। (PTI Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्रियों के नाम सेना के दिग्गज अफसरों ने एक खुला खत लिखा है। इस खत के जरिए अफसरों ने देशभर में हुई लिंचिंग की वारतादों के खिलाफ आवाज बुलंद की है और मुसलमानों और दलितों पर हो रहे हमलों की आलोचना की है। 114 पूर्व अफसरों ने इस खत पर दस्तखत कर “Not In My Name” कैम्पेन का भी समर्थन किया है। वहीं खत में यह भी लिखा गया है कि असहमति रखना या मतभेद होने को देशद्रोह करार नहीं दिया जा सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक खत में लिखा गया है, “असहमत होना देशद्रोह नहीं होता बल्कि यह लोकतंत्र का सार होता है। हम इस मुद्दे से आंख नहीं मूंद सकते। हमारे लिए उदार और धर्मनिरपेक्ष उसूलों के लिए नहीं बोलना, देश पर अपकार करने जैसा होगा। हमारी विवधता ही हमारी ताकत है।”

इसके अलावा सैन्य अधिकारियों ने और भी कई बाते कही हैं। खत में लिखा गया है कि आज जो हो रहा है (लिंचिंग) वह सुरक्षा बलों के उसूलों और देश के संविधान के खिलाफ वार करता है। चिट्ठी में लिखा गया है, “हम हिंदुत्व के स्वयं सिद्ध ठेकेदारों की हिंसा के गवाह नहीं बन सकते। हम मुस्लिमों और दलितों के खिलाफ हो रही हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं।” खत में आगे लिखा गया है, “हम ‘Not In My Name’ कैम्पेन के साथ हैं जो हजारों लोगों को डर और नफरत के खिलाफ लड़ाई में एकजुट करता है।”

गौरतलब है बीते महीने भी कुछ रिटायर्ड नौकरशाहों ने लिंचिंग के मुद्दे को लेकर एक खुला खत लिखा था। पूर्व सुरक्षा बल अधिकारियों का यह खत हाल ही में हुई लिचिंग की घटनाओं के खिलाफ आया है। बता दें बीते महीने 16 साल के जुनैद की ट्रेन में पीट-पीट कर हत्या करने के बाद देश के कई राज्य में लिंचिंग के खिलाफ ‘Not In My Name’ कैम्पेन के जरिए आवाज उठाई गई। हत्या की ऐसी कई वारदात लगातार बीते कुछ समय में सामने आई हैं। जुनैद से पहले अलवर में पहलू खान नाम के शख्स की गौ-तस्कर होने के आरोप में भीड़ द्वारा पीटा गया था जिसके कुछ दिन बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

 

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