तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद जारी है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों तृणमूल गुटों को चुनाव आयोग के सामने कार्रवाई में पक्ष रखने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद चुनाव आयोग को भी 3 महीने के भीतर इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए कहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने ये फैसला दिया।

17 सितंबर को चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए मूल पार्टी पहचान को निलंबित करके दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चिन्ह आवंटित किया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया है और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह आवंटित किया था। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में मान्यता दी गई है और उसे ‘लिफाफा’ का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। ये व्यवस्थाएं आगामी उपचुनावों पर लागू होंगी, जिनमें पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजिनगर में होने वाले उपचुनाव भी शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा था?

अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा था, “रिकॉर्ड पर उपलब्ध पूरी जानकारी पर विचार करने के बाद आयोग की राय है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं- एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों गुट अब खुद को टीएमसी पार्टी बता रहे हैं। इसलिए चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग द्वारा इस मामले का विस्तृत निर्धारण किया जाना जरूरी है।”

चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के साथ बैठक की थी। इस दौरान पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और उसके नाम तथा चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर विवाद बढ़ने के बीच आयोग ने बागी ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और चार अन्य प्रतिनिधि चुनाव आयोग के समक्ष पेश हुए थे। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी ने खुद अपने गुट का प्रतिनिधित्व किया था।

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर पलटवार किया है। बागडोगरा एयरपोर्ट पर पश्चिम बंगाल के मंत्री निशीथ प्रमाणिक और अर्जुन सिंह ने ममता बनर्जी के बयानों पर सवाल उठाते हुए उनकी मानसिक स्थिति को लेकर टिप्पणी की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…