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किसी ने छुए ममता के पैर तो कोई अभिषेक बनर्जी का रहा करीबी, जानिए कौन हैं वो 3 IPS ऑफिसर जिसे लेकर केंद्र और दीदी में बढ़ी तकरार

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का आरोप है कि तीनों अफसर टीएमसी के करीबी हैं। कहा, "पहले भी उनकी भूमिका संदिग्ध दिख रही थी। ममता बनर्जी पुलिस के जरिए सरकार चला रही हैं।" हालांकि राज्य सरकार ने केंद्र के रवैए को "मनमाना" और "राजनीतिक प्रतिशोध" का हिस्सा बताया है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

पिछले दस दिसंबर को बंगाल दौरे के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पर कथित रूप से हमले के वक्त सुरक्षा में तैनात तीन वरिष्ठ पुलिस अफसरों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वरिष्ठ अफसरों के होते हुए भी उनके काफिले पर हमले से बंगाल सरकार पर सवाल उठने लगे। गृह मंत्रालय ने तीनों अधिकारियों को तुरंत प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली भेजने को कहा है। इसको लेकर सीएम ममता बनर्जी और केंद्र में ठन गई है।

हमले के दौरान मौजूद आईपीएस अधिकारियों राजीव मिश्रा आईजी (दक्षिण बंगाल), प्रवीण कुमार त्रिपाठी डीआईजी (प्रेसीडेंसी रेंज) और भोलानाथ पांडेय एसपी डायमंड हार्बर को जेपी नड्डा के काफिले की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का आरोप है कि तीनों अफसर टीएमसी के करीबी हैं। कहा, “पहले भी उनकी भूमिका संदिग्ध दिख रही थी। ममता बनर्जी पुलिस के जरिए सरकार चला रही हैं।” हालांकि राज्य सरकार ने केंद्र के रवैए को “मनमाना” और “राजनीतिक प्रतिशोध” का हिस्सा बताया है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को 12 दिसंबर को भेजे पत्र में कहा है कि यह आदेश पश्चिम बंगाल के “आईपीएस और आईएएस अधिकारियों” के साथ “जबरदस्ती और आतंकित” करने का साधन है। कहा कि “आपका मकसद साफ है कि आप उनको अपने पास बुलाकर दबाव बनाना चाहते हैं।”

आरोपी आपीएस अधिकारियों में राजीव मिश्र के बारे में कहा जा रहा है कि वे ममता बनर्जी के बेहद करीबी हैं। भाजपा के आईटी सेल ने एक पुराना वीडियो ट्वीट किया है। इसमें अगस्त 2019 में पूर्वी मिदनापुर में सीएम और कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के बीच अनौपचारिक बातचीत के दौरान मिश्रा ममता बनर्जी के पैर छूते हुए दिख रहे हैं। वीडियो फुटेज में सीएम ईंट की दीवार पर बैठे हुए कुछ अधिकारियों को केक खिलाते दिख रही हैं, जिसमें तत्कालीन सुरक्षा निदेशक विनीत गोयल और मिश्रा भी शामिल हैं। इस वायरल वीडियो से पश्चिम बंगाल पुलिस को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।

प्रेसीडेंसी रेंज के डीआईजी प्रवीण त्रिपाठी 2004 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। त्रिपाठी ने ममता बनर्जी के 10 साल के शासन में कुछ महत्वपूर्ण पद संभाले हैं। वे पश्चिम मिदनापुर जिले के एसपी थे, जब माओवादियों के खिलाफ ‘सफाई अभियान’ चलाया गया था, और 2011 में मिलिशिया प्रमुख किशनजी को मारने वाले ऑपरेशन का उन्हें श्रेय दिया जाता है। तब से इलाके में माओवादी हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है।

बाद में त्रिपाठी को पूर्व सीपी राजीव कुमार के तहत कोलकाता में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) के रूप में तैनात किया गया था। नौकरशाही और राजनीतिक हलकों में त्रिपाठी को कमिश्नर और सरकार के “करीबी” के रूप में देखा जाता है, कुछ आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि वह सीएम के भी करीबी थे।

2019 के आम चुनावों के बाद उन्हें संयुक्त सीपी के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया, और जनवरी 2020 में उन्हें प्रेसिडेंसी रेंज के डीआईजी के रूप में तैनात किया गया, जिसमें ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र डायमंड हार्बर शामिल है।

तीसरे अधिकारी भोला नाथ पांडे 2011 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और डायमंड हार्बर जिले में एसपी के रूप में तैनात हैं। फरवरी 2017 में डायमंड हार्बर को दक्षिण 24 परगना पुलिस जिले से अलग कर दिया गया था। सूत्रों के अनुसार पांडे 2018 के पंचायत चुनाव और 2019 के आम चुनावों के दौरान जिले के प्रभारी थे। उस समय काफी राजनीतिक हिंसा हुई थी। आरोप है कि इसमें भाजपा नेताओं को कथित रूप से जानबूझकर परेशान किया गया था।

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