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सारे शेयर बेच कर इंफोसिस से नाता तोड़ लेना चाहते हैं नारायणमूर्ति? कंपनी चलाने के तरीके से नहीं हैं खुश!

हालांकि एनआर नारायणमूर्ति ने इंफोसिस में अपनी हिस्सेदारी बेचने की खबर का खंडन किया है।

सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति। (Express photo)

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायाणमूर्ति कंपनी के मौजूदा कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं और वो अपने सभी शेयर बेच देना चाहते हैं। नारायणमूर्ति की इंफोसिस में 12.75 प्रतिशत हिस्सेदारी है जिसका बाजार भाव करीब 28 हजार करोड़ है। टाइम्स ऑफ इंडिया (टोओआई) की रिपोर्ट के अनुसार नारायणमूर्ति इंफोसिस के मौजूदा कामकाज के तरीके से नाखुश हैं। नारायणमूर्ति तीन साल पहले इंफोसिस से रिटायर हुए थे। नारायणमूर्ति ने अपने साथियों के साथ मिलकर 1981 में इंफोसिस की स्थापना की थी। 1993 में इंफोसिस लिस्टेड कंपनी बनी थी।

हालांकि एनआर नारायणमूर्ति ने टीओआई से इंफोसिस में अपनी हिस्सेदारी बेचने की खबर का खंडन किया है। वहीं इंफोसिस के दूसरे सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इंफोसिस की स्थापना नारायणमूर्ति, नीलेकणी, कृष गोपालकृष्णन, एसडी शिबुलाल और के दिनेश ने मिलकर की थी। इंफोसिस का सभी संस्थापक इस वक्त कंपनी में किसी भी अधिशासी या गैर-अधिशासी पद पर नहीं हैं।

इससे पहले इसी साल फरवरी में इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्का और नारायणमूर्ति के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। नारायणमूर्ति ने इंफोसिस के कामकाज के बदलते तरीके और बुनियादी मूल्यों में आने वाले बदलाव की आलोचना की थी। नारायणमूर्ति ने सिक्का समेत कंपनी के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा मोटी तनख्वाह लेने पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की थी। नारायणमूर्ति ने इंफोसिस के मौजूदा अधिग्रहण नीति पर भी सवाल उठाया था।

अभी हाल ही में नारायमणमूर्ति ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मोटी तनख्वाह वाले अधिकारियों को अपनी सालाना वेतन वृद्धि कम करनी चाहिए और कम वेतन वालों की नौकरी बचानी चाहिए। नारायणमूर्ति ने यह बयान उन खबरों के बाद दिया था जिनमें कहा गया था कि इंफोसिस के सीईओ सिक्का समेत कई शीर्ष पदाधिकारियों की तनख्वाह बढ़ी है, जबकि कंपनी कम वेतन वाले दर्जनों कर्मचारियों को निकालने वाली है। नारायणमूर्ति ने एक निजी चैनल से कहा था कि मुझे ऐसा लगता है कि हमारे लिए युवाओं की नौकरी बचाना संभंव है। अगर सीनियर मैनेजमेंट के लोग अपनी सैलरी में कुछ समायोजन करें और कम सैलरी लें तो नौकरियों को सुरक्षित रखना संभंव है।

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