मुंबई रेलवे स्टेशन पर जबरन वसूली मामले में तीन बर्खास्त GRP कर्मियों को गिरफ्तार किया गया। गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) की क्राइम ब्रांच ने पिछले साल मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर उगाही करने के आरोप में तीन बर्खास्त पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा उन्हें दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया गया था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) ललित रामचंद्र जगताप और हेड कांस्टेबल राहुल दत्ता भोसले और अनिल सीताराम राठौड़ के रूप में हुई है। ये तीनों कथित घटना के समय मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर तैनात थे। तीनों जीआरपी कमियों की गिरफ्तारी राजस्थान के एक निवासी से 30,000 रुपये की उगाही करने के आरोप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 10 अगस्त, 2024 की रात को घटी जब शिकायतकर्ता कमल कुमार सोनी और उनकी आठ वर्षीय बेटी राजस्थान जाने वाली ट्रेन में चढ़ने के लिए मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचे।

जीआरपी के जवानों ने शिकायतकर्ता के सामान की तलाशी ली

पुलिस ने बताया कि जीआरपी के दो जवानों ने कथित तौर पर कमल कुमार सोनी को रोका और उनके सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उन्हें कागज में लिपटा हुआ 14 ग्राम सोने का एक टुकड़ा और 31,900 रुपये नकद मिले। सोनी ने आरोप लगाया कि उन्हें एक ऑफिस में ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मियों ने दावा किया कि एक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

शिकायत के अनुसार, अधिकारियों ने कमल कुमार को पीटने, रात भर हिरासत में रखने और सोना जब्त करने की धमकी दी। अपनी ट्रेन छूट जाने के डर और अपने साथ यात्रा कर रही अपनी छोटी बेटी की चिंता के कारण कमल कुमार ने बार-बार जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने आखिरकार सोने का गहना तो लौटा दिया लेकिन उसे जाने देने से पहले 30,000 रुपये नकद अपने पास रख लिए।

जांचकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज के जरिए दो आरोपियों की पहचान की

राजस्थान लौटने के बाद कमल कुमार सोनी ने रतनगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। चूंकि कथित अपराध मुंबई में हुआ था इसलिए एफआईआर को जांच के लिए मुंबई जीआरपी को सौंप दिया गया। मामला जीआरपी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया जिसने जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज के जरिए दो आरोपियों की पहचान की जबकि तीसरे की पहचान जांच के दौरान हुई।

जांच के बाद, जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिकायतकर्ता और उसकी बेटी से कथित तौर पर जबरन वसूली और धमकी देने में उनकी संलिप्तता के प्रथम दृष्टया सबूत मिलने के बाद तीनों कर्मियों को निलंबित कर दिया। अभियुक्तों ने शुरुआत में सत्र न्यायालय के समक्ष अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया जिसने सितंबर 2025 में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जीआरपी कर्मियों को गिरफ्तार किया गया

इस दौरान उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि घटना के सीसीटीवी फुटेज में कमल कुमार या उनकी नाबालिग बेटी के चेहरों पर किसी प्रकार की परेशानी के लक्षण नहीं दिखाई दिए। महाराष्ट्र सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने समक्ष प्रस्तुत सामग्री की जांच की और तीनों आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जीआरपी क्राइम ब्रांच ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

महिला अधिकारियों से अभद्र व्यवहार: कर्नल बर्खास्त, 3 साल की जेल

भारतीय सेना की जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने महिला अधिकारियों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार और अभद्र व्यवहार के मामले में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (एएमसी) के एक कर्नल को दोषी ठहराते हुए सेना की सेवा से बर्खास्त करने और तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें