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PP 15 ही नहीं 16 से भी पीछे हटी भारतीय सेना, 50 सालों से कब्जे में था ये इलाका- लद्दाख के काउंसलर का दावा

काउंसलर का कहना था कि हम लोग यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और आखिर हमारे स्थानीय लोगों का भी तो हक बनता है लेकिन इस सब चीजों के बारे में हमें कुछ नहीं बताया जाता है।

PP 15 ही नहीं 16 से भी पीछे हटी भारतीय सेना, 50 सालों से कब्जे में था ये इलाका- लद्दाख के काउंसलर का दावा
भारतीय सेना (फोटो- पीटीआई)

भारत और चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में पेट्रोलिंग पॉइंट-15 (PP-15) के पास गोगरा हाइट्स-हॉट स्प्रिंग्स इलाके में डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस बिंदु पर काफी समय से गतिरोध बना हुआ था। हालांकि, इस डिसइंगेजमेंट पर लद्दाख के एक काउंसलर का दावा है कि हमारे सैनिक न केवल पीपी -15 बल्कि पीपी -16 से भी पीछे हट गए हैं, जहां पिछले 50 सालों से हमारा कब्जा था।

एनडीटीवी से बात करते हुए लद्दाख के काउंसलर Konchok Stanzin ने कहा, “हमारी सेना PP-16 से भी पीछे हटी है जहां करीब 50 सालों से परमानेंट पोस्ट थी। यह एक झटका है। यह चरागाह की भूमि होती थी जो अब बफर एरिया बन चुकी है। अब कौन सा एलएसी होगा और नया पोस्ट कहां होंगे ये साफ नहीं है।”

काउंसलर ने कहा कि करीब 30-40 किमी का इलाका बफर जोन बन गया है। कोंचोक स्टैंजिन ने कहा, “आज की तारीख में फिंगर 4 और फिंगर 3 के बीच का एरिया भी बफर जोन बन चुका है। पीपी-15 से लेकर रेजंगला तक का पूरा एरिया बफर जोन हुआ है और इन सब का स्थानीय लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा।”

नए एलएसी के बारे में अभी पता नहीं- कोंचोक स्टैंजिन

नए एलएसी को लेकर कोंचोक स्टैंजिन ने कहा, “पहले पीपी-16 पर हमारी पोस्ट है जिसे शिफ्ट कर रहे हैं तो कहीं न कहीं हमारी पोस्ट होगी। अब इसकी जानकारी सामने आएगी, लेकिन जिन इलाकों को हम खाली करके आ रहे हैं, वह तो बफर जोन बन गया है और वहां पर कोई पेट्रोलिंग नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि 16 राउंड की जो भी बातचीत हुई है, उसके बारे में स्थानीय नागरिकों को कुछ भी नहीं बताया जाता है। हालांकि हम लोग यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और हमारे स्थानीय लोगों का भी हक बनता है लेकिन इस सब चीजों के बारे में हमें कुछ नहीं बताया जाता है।”

काउंसलर ने डिसइंगेजमेंट प्रोसेस पर कहा, “इस प्रक्रिया से स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं। यह देश के लिहाज से सही हो सकता है कि बॉर्डर पर शांति होनी चाहिए लेकिन अपने तरफ की इतनी ज्यादा जमीन विवादित क्षेत्र में चले जाना यह स्थानीय लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा है।”

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First published on: 14-09-2022 at 09:23:42 pm
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