बिहार सरकार ने राज्य के सभी 551 मॉडल स्कूलों को केसरिया रंग से रंगने के फैसला लिया है। अब सम्राट सरकार के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू (JD(U)) ने भी इस पर आपत्ति जताई है।

इन मॉडल स्कूलों का नाम बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन (कक्षा 9 से 12 तक) रखा गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बेगूसराय में आयोजित एक कार्यक्रम में इन 551 स्कूलों का उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बेगूसराय राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की धरती है, वहां से 551 सरस्वती विद्या निकेतन की शुरुआत कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग का शुभारंभ किया गया है।

सरकार के अनुसार, इन स्कूलों में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं, ई-लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, यहां छात्रों को JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग तथा लाइव इंटरैक्टिव कक्षाएं भी मिलेंगी।

लेकिन इन सभी स्कूलों को भगवा रंग से रंगने के फैसले की आलोचना हो रही है। इससे पहले स्कूलों को गुलाबी, आसमानी या पीले रंग से रंगा जाता था। बता दें कि बिहार शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर सभी संबंधित स्कूलों को तुरंत भगवा रंग अपनाने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले पर चिंता जताते हुए जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ”शिक्षा का कोई रंग नहीं होता। यह केवल संविधान की प्रस्तावना की भावना के अनुरूप होनी चाहिए ना कि स्कूलों की दीवारों पर किसी खास रंग के अनुसार।”

Saffron Schools Bihar
एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने भी शिक्षा को किसी रंग से नहीं जोड़ने की बात कही है। (Image Source: Express Photo)

उन्होंने एक और चिंता जताते हुए कहा कि कई स्कूलों की जमीन दान करने वालों के नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ के बोर्ड के नीचे लिखे जा रहे हैं। उनके मुताबिक, दानदाताओं के नाम नए स्कूल के नाम से पहले होने चाहिए ताकि उनके योगदान का उचित सम्मान हो। गौर करने वाली बात है कि जेडीयू बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सहयोगी पार्टी है।

वहीं एक मॉडल स्कूल के प्रधानाध्यापक ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि स्कूल प्रशासन को जितनी जल्दी हो सके, स्कूल की इमारतों को भगवा रंग से रंगने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानाध्यापक ने बताया, ”पहले स्कूलों के रंग को लेकर कोई तय निर्देश नहीं थे। कभी इमारतें पीले, कभी गुलाबी तो कभी आसमानी रंग से रंगी जाती थीं। पिछले कुछ समय से अधिकतर स्कूलों को गुलाबी रंग में रंगा जा रहा था। हालांकि, रंग चुनने का फैसला स्कूल के प्रधानाध्यापक पर छोड़ दिया जाता था।”

उन्होंने आगे कहा, ”अब शिक्षा विभाग के नए पत्र में साफ कहा गया है कि सभी मॉडल स्कूलों में एक जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके तहत स्कूल की बाहरी दीवारों को भगवा (केसरिया) रंग से रंगना होगा, कक्षाओं की अंदरूनी दीवारें सफेद होंगी और मुख्य प्रवेश द्वार को सुनहरे (गोल्डन) रंग से रंगा जाएगा।”

Samrat Choudhary
बिहार के मुख्यमंंत्री सम्राट चौधरी (Image Source: Express Photo)

विपक्ष ने सरकार के फैसले की आलोचना की

विपक्षी दलों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘शिक्षा के भगवाकरण की शुरुआत’ बताया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ”हमें पहले से ही इसका अंदेशा था। यह शिक्षा के भगवाकरण की शुरुआत है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शिक्षा मॉडल को लागू करने की कोशिश है। जिस दिन बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मॉडल स्कूलों का नाम बदलकर ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ रखा, उसी दिन हमें आरएसएस के एजेंडे की झलक मिल गई थी।”

वहीं बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा, ”बीजेपी रंग बदलने में माहिर है। अब वह शिक्षा को भी एक निश्चित रंग देने की कोशिश कर रही है जो लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बिहार अब नीतीश कुमार के बाद के दौर में प्रवेश कर चुका है। बीजेपी धीरे-धीरे आरएसएस के एजेंडे की ओर बढ़ रही है।”

बीजेपी ने किया बचाव

बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पाठक ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भगवा रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ”विपक्ष एक ऐसे बुनियादी ढांचा सुधार को बेवजह राजनीतिक रंग दे रहा है जिससे हजारों छात्रों को फायदा मिलेगा।”

इससे पहले बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी कह चुके हैं कि विपक्ष हर चीज़ को आरएसएस के नजरिए से देख रहा है जबकि उसे राज्य में लागू किए जा रहे बड़े शिक्षा सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।

बिहार में उच्च शिक्षा विधेयक पर घमासान, BJP-JDU विधायकों ने उठाए सवाल

बिहार सरकार उच्च शिक्षा को लेकर नया विधेयक विधानसभा में पेश करने जा रही है लेकिन बीजेपी और जेडीयू के नेताओं ने इसका विरोध किया है। बिहार की विधानसभा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बीजेपी और जेडीयू के नेताओं ने इस संबंध में पत्र भी लिखा है।

क्या है इस विधेयक में?

इस विधेयक के पास होने के बाद बिहार में चल रहे अंडरग्रेजुएट कॉलेज राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के नियंत्रण में आ जाएंगे। ये कॉलेज अभी बिहार के विश्वविद्यालयों से संबंद्ध हैं और राज्य में ऐसे कम से कम 500 कॉलेज हैं। पढ़ें पूरी खबर…