अमेठी: इन गरीब और दिव्यांग भाइयों के लिए नहीं है कोई सरकारी योजना, दूसरी पीढ़ी भी पेड़ की छांव में ही रहने को मजबूर

माता-पिता भी बेहद गरीब और दिव्यांग थे। वे पेड़ के नीचे ही रहते थे। विरासत में आंख और शरीर से दिव्यांग अपने दोनों बेटों को पीपल के पेड़ के नीचे गुजर-बसर करने का ठिकाना भर दे गए। इनकी गृहस्थी में एक छोटा भगोना, टूटी-फूटी चारपाई और भीख मांगने का थैला भर है। बाकी शरीर पर फटे पुराने पैंट और शर्ट हैं।

Amethi, Government Schemes
अमेठी के इन दिव्यांग भाइयों की किस्मत में किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं लिखा है। न ही कोई सरकारी अफसर इन पर ध्यान ही देता है।

सरकारें गरीबों और लाचारों के लिए कई तरह की योजनाएं बनाती हैं, लेकिन उन योजनाओं का लाभ कुछ ही गरीबों को मिल पाता है। इस तरह के आरोप अक्सर लगते हैं। अमेठी के दो भाई शिवराम और श्रीराम दोनों आंख और शरीर से दिव्यांग हैं, इनके पास राशनकार्ड, निर्वाचन कार्ड, बैंक खाता, पैनकार्ड और आधार कार्ड आदि सभी तरह के जरूरी दस्तावेज हैं, लेकिन पात्र होते हुए भी इनके लिए सभी सरकारी योजनाओं के दरवाजे बंद हैं। शिवराम का पुश्तैनी ठिकाना तालाब का किनारा हैं।

आंख से दिव्यांग इनके माता-पिता भी जीवनभर पीपल के पेड़ के नीचे ही रहे और दो साल पहले दुनिया से चले गए। विरासत में आंख और शरीर से दिव्यांग अपने दोनों बेटों को पीपल के पेड़ के नीचे गुजर-बसर करने का ठिकाना भर दे गए। इनकी गृहस्थी में एक छोटा भगोना, टूटी-फूटी चारपाई और भीख मांगने का थैला है। बाकी शरीर पर फटे पुराने पैंट और शर्ट है।

अमेठी के खंड विकास अधिकारी विजय कुमार अस्थाना ने कहा कि यह बहुत बड़ी चूक है। दिव्यांग परिवार का दो पीढ़ियों से पेड़ के नीचे गुजर-बसर करना गंभीर चिंता का विषय है। वे खुद इसकी जांच करेंगे। शिवराम रामनगर बाजार के पीछे झारखंड मंदिर के पास तालाब के किनारे पटरी पर रहते है।

ऐसे बेबस और लाचार लोगों के लिए सरकार के पास ढेरों योजनाएं हैं, परन्तु इन गरीब और दिव्यांग भाइयों और इनके माता-पिता को एक का भी लाभ नहीं मिला। दूसरी पीढ़ी भी पेड़ की छांव में ही जीवन गुजारने को विवश है। भीख मांगकर ये लोग खुद को जिंदा रखे हुए हैं। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान भीख मिलना भी मुश्किल हो गया था।

जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत जंगल रामनगर ने 8 विधायक, 6 सांसद और केंद्र और प्रदेश को कई मंत्री दिए, लेकिन इनमें से किसी ने भी इनकी दोनों पीढ़ियों को एक आवास नहीं दे सका। रामनगर में सपा सरकार में लोहिया आवास योजना में करीब सोलह सौ आवास बने थे, लेकिन उनमें से एक भी दोनों भाइयों को नहीं मिला।

शिवराम जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के समुदाय से हैं। वह पिछले बारह साल से सभी अफसरों के दरवाजे पर सीटी बजा रहे हैं, लेकिन उनके दिव्यांगता को अशुभ मानकर सभी उन्हें दरवाजे से वापस कर देते हैं। जबकि इनके झोले में सभी जरूरी दस्तावेज हैं।

शिवराम ने बताया कि भीम कोटेदार से कभी-कभी थोड़ा बहुत सरकारी राशन मिल जाता है, जिससे वे जिंदा हैं। इनके माता-पिता पीपल के पेड़ के नीचे मर चुके हैं। अभी जैसे हालात हैं, अगर ऐसा ही आगे रहा तो शिवराम और श्रीराम भी किसी दिन दम तोड़ देंगे।

शिवराम के मुताबिक एडीओ पंचायत डॉ. मुकेश ने चंदा एकत्रकर एक कमरा बनवाने की बात कही थी, लेकिन वे तबादले पर बाजार शुकुल चले गए। बताया कि भीख मांग-मांग कर 640 रुपए जोड़े थे, उससे प्लास्टिक से अस्थाई छप्पर रख लिए हैं। अभी एक महीने पहले तक पेड़ के नीचे ही गुजर-बसर करते थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5.51 लाख परिवारों को आवास की चाभी सौंप चुके हैं, इसमें 16521 आवास अमेठी के थे, लेकिन शिवराम और श्रीराम का नाम उनकी सूची में नहीं था। हालांकि आरोप है कि उसमें कई ऐसे लोगों के नाम थे, जो जालसाजी कर आवास हासिल करने वाले कई नाम भी शुमार हैं।

राम केवल ने बताया कि कई परिवार में दूसरी और तीसरी बार आवास दिए जाने के मामले भी हैं। इस पर ग्राम विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने कहा कि आवास योजना बेघरों को छत मुहैया कराने के लिए है। दिव्यांग परिवार की अनदेखी से जुड़े सभी जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। वे खुद किसी दिन अमेठी के निरीक्षण पर दिव्यांग परिवार से मिलेंगे।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट