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डीजीसीए की गाइडलाइन्स, यात्रियों को हिंदी में दिए जाएं अखबार और मैगजीन

हिंदी और अंग्रेजी वर्चस्प विवाद के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइंसों के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं।

विमान में अखबार पढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो सोर्स इंस्टग्राम)

हिंदी और अंग्रेजी के वर्चस्प के विवाद के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइन्सों के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। जिसमें सभी विमानों में अंग्रेजी के साथ हिंदी के भी न्यूजपेपर और मैगजीन रखनी बात कही गई है। गाइडलाइन्स में कहा है गया कि विमान में यात्रियों को अंग्रेजी के साथ हिंदी के अखबार और मैगजीन भी पढ़ने के लिए ऑफर किए जाएं। मामले में डीजीसीए के ज्वाइंट डायरेक्टर ललित गुप्ता ने कहा कि विमानों में यात्रियों को हिंदी में पढ़ने की सामग्री उपलब्ध ना कराना सरकारी की पॉलिसी के खिलाफ होगा। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने डीजीसीए के इस फैसले का मजाक उड़ाते हुए लिखा, ‘डीजीसीए अब भारतीय विमानों में हिंदी प्रकाशन के अखबार और पत्रिकाएं यात्रियों को पढ़ने के लिए देना चाहता है।’ जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों एयर इंडिया ने इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए घरेलू विमानों में मांसाहारी खाना नहीं देने का फैसला लिया था। हालांकि बाद में एयर इंडिया द्वारा लिए इस फैसले पर खासा विवाद हुआ था। जिसमें कुछ लोगों द्वारा इसे धर्म से जोड़कर देखा गया था।

दूसरी तरफ इस दौरान एयर इंडिया के अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसला भोजन के लागत को कम करने के लिए लिया गया था। बयान में कहा गया, ‘इस कदम से बर्बादी और लागत घटाने में मदद मिलेगी और कैटरिंग सर्विस की सुविधाओं में भी सुधार आएगा।’ आंकड़ों के अनुसार यात्रिओं को मांसाहारी खाना ना दिए जाने से एयर इंडिया को सालाना करीब दस करोड़ रुपए की बचत होगी। रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया कैटरिंग पर करीब चार सौ करोड़ रुपए खर्च करता है। एयर इंडिया के इसी फैसले का विरोध किया गया था। एयर पैसेंजर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉक्टर सुधाकर रेड्डी ने इस फैसले को पक्षपाती करार दिया था। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। एयरलाइन एक ही एयरक्राफ्ट में यात्रियों के बीच भेदभाव कर रही है। यह बंटवारा क्लास पर आधारित है। हम इस मुद्दे को प्राधिकरण के सामने उठाएंगे।

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