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राजस्थान में राजनायिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट

राजस्थान में भाजपा सरकार ने अब एक बार फिर सरकारी बोर्ड और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां जल्द करने का भरोसा संगठन को दिया है।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान में भाजपा सरकार ने अब एक बार फिर सरकारी बोर्ड और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां जल्द करने का भरोसा संगठन को दिया है। राज्य में करीब दो साल से शासन कर रही अपनी ही सरकार में तवज्जो नहीं मिलने से भाजपा का एक बड़ा खेमा नाराज है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के बाद प्रदेश नेतृत्व ने पार्टी नेताओं के बीच सत्ता और संगठन में पद का शगूफा छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी पार्टी नेताओं को संकेत दिया है कि अब उन्हें और इंतजार नहीं करना पडेÞगा। इसके बावजूद पार्टी नेताओं को भरोसा नहीं हो रहा है कि उन्हें जल्द ही सरकार में कोई पद मिल जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के बाद तो यहां सरकार में खासी हलचल मच गई है। शाह ने मंत्रियों की बैठक लेकर उनके कामकाज का आकलन किया था। इस बैठक में कई मंत्रियों की शिकायत थी कि जिलों में नौकरशाही हावी हो गई है और कार्यकर्ताओं के कामों की अनदेखी हो रही है। इससे पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता हताश महसूस कर रहा है। इससे पार्टी और सरकार की छवि आम जनता में बिगड़ रही है। इसके बाद तय हुआ कि जिला समितियों में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को शामिल कर उन्हें सरकारी कामकाज से जोड़ा जाए। इसके साथ ही सरकार के निगम, बोर्ड और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियां कर नेताओं को उनकी कमान सौंपी जाए। इस मामले में प्रदेश भाजपा के प्रभारी अविनाश राय खन्ना और सह प्रभारी वी सतीश ने भी मुख्यमंत्री राजे से मंत्रणा कर ली है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी का भी कहना है कि सरकार जल्द ही निगम बोर्डो में राजनीतिक नियुक्तियां कर देगी।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मंशा है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की सरकार और संगठन में पूरी सुनवाई हो। इसके लिए उन्होंने अपने मंत्रियों को कई बार हिदायत दी। इसके बावजूद मंत्रियों का रवैया नहीं बदला और उनकी लगातार शिकायतें वसुंधरा राजे तक पहुंचती रहीं। जिला और मंडल स्तर के पदाधिकारियों के साथ ही विधायकों ने मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को शिकायत की। मंत्रियों का कहना है कि अफसर उनकी नहीं सुनते हैं। मंत्रियों की यहां हुई कार्यशाला में नौकरशाही की शिकायतों को सह प्रभारी वी सतीश ने गंभीर माना।

इसको लेकर संघ भी कई बार अपनी नाराजगी जता चुका है। भाजपा के विधायकों और सांसदों के साथ ही संघ पदाधिकारियों की शिकायत रही है कि नौकरशाह मुख्यमंत्री राजे तक सही जानकारी ही नहीं पहुंचा रहे हैं। जयपुर में मंदिरों को तोड़ने के मामले में तो संघ से जुडे लोग इस प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय की ढिलाई को ही जिम्मेदार मानते हैं। जिलों में तैनात अधिकारी भी मंत्रियों को तवज्जो नहीं देते हैं। इसको लेकर कई विधायकों ने पार्टी में भी आवाज उठाई है। मुख्यमंत्री जल्द ही नौकरशाही में बडे पैमाने पर बदलाव की तैयारी में हैं। इसमें बड़ी संख्या में आइएएस, आइपीएस और आरएएस अधिकारियों की अदला बदली तय है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार में राजनीतिक नियुक्तियां जल्द होने का संकेत मिलने के बाद पार्टी में इन दिनों खासी हलचल है। निगम, बोर्ड और आयोगों में खाली पडेÞ पदों पर भाजपा नेताओं की तैनाती पर विचार किया गया। ऐसी नियुक्तियां मलमास खत्म होने के बाद 15 जनवरी से शुरू होने की उम्मीद है। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी की जानकारी राष्ट्रीय नेतृत्व को भी है। सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही प्रदेश भाजपा की भी नई टीम का गठन होगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद अशोक परनामी अपनी कार्यसमिति बनाने की तैयारी में है। इसमें कई नेताओं को प्रदेश पदाधिकारी बनने का मौका मिलेगा। परनामी ने अपनी टीम में ऐसे नेताओं को रखने का फैसला किया है जिन्हें सरकार में पद नहीं मिलेगा।

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