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दिल्ली मेरी दिल्ली

राजधानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस विभाग के कर्मचारियों के कंधों पर है, इन दिनों वे भी सुरक्षित नहीं हैं। बीते दिनों एक ऐसा ही वाकया सामने आया, जब बस में सवार बदमाशों ने एक सुरक्षा करने का दंभ भरने वाले विभाग के कर्मचारी का गश्त करने के दौरान अपहरण कर लिया।

Author नई दिल्ली | October 26, 2020 5:36 AM
दिल्ली मेरी दिल्ली

अपील का असर नहीं
कोरोना-काल के कारण अर्थव्यवस्था के खस्ताहाल होने और राजस्व संग्रह के कारण देशभर के सरकारी महकमों को खर्चों में कमी करने और बेहद जरूरी नहीं वाली परियोजनाओं पर फिलहाल रकम व्यय ना करने की अपील की गई है। इस अपील का औद्योगिक महानगर में असर नहीं दिख रहा है। हरियाली और साफ-सफाई, इन दोनों पर व्यय के अलावा बेफिजूली पर रोक नहीं लग पा रही है। आलम यह है कि रोजाना बाजारों समेत शहर के अन्य इलाकों में पहुंचने वाले सफाईकर्मी कैसे काम करते हैं, इसकी केवल फोटो खींचकर उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने में प्राधिकरण ने कर्मचारी नियुक्त कर रखे हैं।

इन कर्मचारियों को वेतन केवल फोटो खींचकर उच्चाधिकारियों और संबंधित मार्केट एसोसिएशन या आरडब्लूए पदाधिकारियों को वॉट्सएप के जरिए फोटो खींचकर भेजकर यह साबित करते हैं कि काम किया जा रहा है। जबकि पूर्व नौकरशाह समेत जानकारों का मानना है कि खर्चों में कटौती के लिए जरूरी है कि अतिरिक्त स्टाफ को हटाया जाए या फिर उनकी कहीं और तैनाती की जाए, ताकि उन्हें तन्ख्वाह के रूप में दी जाने वाली मोटी रकम की सार्थकता साबित हो।

सफाई कर्मचारी या हरियाली का रख-रखाव करने वाले कर्मचारियों की कार्यशीलता पर निगरानी संबंधित आरडब्लूए या मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारी अधिक बेहतरी से सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही खामी होने पर उच्चाधिकारियों को फोटो भेजकर या शिकायत देकर बेहतर सुधार करा सकते हैं।

खुद सुरक्षित नहीं
राजधानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस विभाग के कर्मचारियों के कंधों पर है, इन दिनों वे भी सुरक्षित नहीं हैं। बीते दिनों एक ऐसा ही वाकया सामने आया, जब बस में सवार बदमाशों ने एक सुरक्षा करने का दंभ भरने वाले विभाग के कर्मचारी का गश्त करने के दौरान अपहरण कर लिया। हैरानी की बात यह है कि अपने आप को स्मार्ट कहने वाले विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला तब प्रकाश में आया, जब घंटों बाद भी गश्त करने निकला कर्मी थाने नहीं पहुंचा और तो और उसकी कोई खोज खबर सहयोगियों तक ने भी घंटों तक नहीं ली।

हालांकि, एक दिन बाद अपहरण हुआ, कर्मी खुद जैसे-तैसे कर दिल्ली पहुंचा और उसने अपनी आप बीती सहयोगियों के साथ जिले के आला अधिकारियों को बताई। तब जाकर सभी ने राहत की सांसे ली। साथ ही अपनी लाज बचाने के लिए दबे जुबान अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में दो आरोपियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया है।

प्रदूषण पर सियासत
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने नया सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। इसमें एक तरफ आम आदमी पार्टी और दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी है। इस मामले में दोनों ही पार्टी एक दूसरे को निशाना बना रही हैं। प्रदूषण के साथ सियासी पारा भी चढ़ रहा है। पार्टियां दोषारोपण तो कर रही हैं, लेकिन इसका समाधान नहीं बता पा रहीं। इससे पूर्व डेंगू को लेकर ऐसा ही घमासान दिल्ली वालों के सामने आ चुका है। इसकी आड़ में दोनों ही दल निगम चुनाव की जमीन तैयार करते नजर आ रहे हैं।

साइकिल पर पुलिस
एक तरफ अपराधी हाई टेक हो रहे हैं तो दूसरी तरफ उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस परंपरागत साइकिल की सवारी पर आ रही है। बीते दिनों दिल्ली पुलिस की हुई ये पहल चर्चा के केंद्र बनती दिखी। हुआ यों कि बाहरी उत्तरी जिला पुलिस ने साइकिल गशत अभियान शुरू किया। जवान ही नहीं अफसर भी इलाके में साइकिल पर गशत करते नजर आए। गशत खत्म होते ही यहां चर्चा शुरू हो गई। किसी ने कहा कि पुलिस की इस पहल को देख तो अपराधी भी मुस्कुरा रहे होंगे।

भले ही ये पहल एक शुरूआत हो, लेकिन चर्चा हाईटेक अपराधी बनाम साइकिल पुलिस पर केंद्रित हो गई। एक राहगीर ने ठीक ही कहा-अगर भय से या वर्दी के डर से अपराधी खौफ ना खाए तो साइकिल के भरोसे उन्हें पकड़ना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है। तीसरे व्यक्ति की टिप्पणी भी कम चौंकाने वाली नहीं थी बल्कि उस पर तो सब ने ‘हां’ में सर हिला दिया। उसने कहा था कि अपराध कम हो ना हो पर पुलिस वालों के पेट जरूर कम हो जाएंग।
-बेदिल

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