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दिल्ली मेरी दिल्ली

दिल्ली में बीजेपी की राज्य इकाई में बड़ा फेरबदल हो रहा है। पुराने अध्यक्ष की टीम को धीरे-धीरे अलग किया जा रहा है। उनकी जगह नई टीम को जिम्मेदारी दी जा रही है।

Author Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | October 19, 2020 4:11 AM
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नेताओं की विदाई
भाजपा की नई टीम तैयार हो गई है। इस टीम के आते ही पुरानी टीम के चेहरों को निपटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। हाल ही में पार्टी के एक आनलाइन ग्रुप से पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी की टीम के कई सक्रिय चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। हालांकि इस ग्रुप को पार्टी का वैध ग्रुप न मानकर अब इस पूरे प्रकरण को टालने की भी कोशिशें शुरू कर दी हैं। जिन प्रमुख नेताओं की विदाई दी गई है। उनमें खुद मनोज तिवारी, जगदीश प्रधान, राजेश भटिया, रविंद्र गुप्ता, विक्रम बिधूड़ी, संजीव शर्मा, शाजिया इल्मी समेत अन्य नेता शामिल हैं।

अंंत समय में फैसला
कई बार प्रशासनिक फैसले भी समस्या की जड़ बन जाते हैं। नवरात्र शुरू होने के आखिरी कुछ घंटे पहले कालकाजी मंदिर को भी आम जनता के लिए खोलने का दिया गया निर्देश इसका नायाब उदाहरण है। हुआ यों कि दिल्ली सरकार ने कुछ मंदिरों को ही जनता के लिए खोलने की इजाजत दी थी। इसमें झंडेवालान मंदिर और छतरपुर मंदिर शामिल थे। कोविड-19 दिशानिर्देशों के पालन के शर्त पर इन्हें खोल दिया गया था लेकिन कालकाजी मंदिर के आवेदन को लटका दिया गया। जब दवाब पड़ा तो अंतिम क्षण में नवरात्र शुरू होने के 8-10 घंटे पहले उसे भी खोल दिया गया। अब कोविड बचाव की पूरी और पुख्ता व्यवस्था कैसे हो, इतनी जल्दी। सो, अफरातफरी मची। पुलिस-प्रशासन की मदद लेनी पड़ी, रात भर मंदिर के कारसेवक दौड़ भाग करते नजर आए। सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों को कलश स्थापन के लिए बुलाना पड़ा। किसी ने ठीक ही कहा-अगर शासन यही स्वीकृति एक हफ्ता पहले दे देता तो प्रबंधन की समस्या उत्पन्न न होती।

पुलिस की टीम गायब
आपराधिक वारदातों पर लगाम लगाने के लिए जोर-शोर से गली मुहल्ले में गश्त करनेवाली दिल्ली पुलिस की टीम गायब हो गई। पुलिस अधिकारियों ने फोटो खिंचवाए, मीडिया में प्रचार प्रसार किया और साइकिल को ठंडे बस्ते में थाने के कबाड़ में डाल दिया। बेदिल ने जब इसकी तहकीकात की तो पता चला कि यह तो बस दिखावा मात्र था, अगर ऐसा नहीं होता तो सड़क पर कभी तो नजर आते।

विरोध और गिरफ्तारी
बीते दिनों राजधानी में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों ने सड़कों पर उतर कर हल्ला बोला। विरोध-प्रदर्शन कर रहे नेता और बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलावाने की मांग कर रहे थे। नेता यह भी मांग कर रहे थे कि आरोपियों को जल्दी से गिरफ्तार किया जाए और उन्हें जल्दी से सजा मिले। पर राजधानी की सुरक्षा में तैनात बल ने उल्टा ही खेल कर दिया। विरोध-प्रदर्शन में शामिल नेताओं को कोविड-19 के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और घंटों थाने में बैठाकर रखा। घंटों थाने में पुलिस हिरासत में बैठे नेता मन नहीं मन यह सोचने को मजबूर थे कि गिरफ्तारी करने की मांग उनके लिए उल्टी ही साबित हो रही है। हालांकि, बाद में सभी को छोड़ भी दिया गया, जिसके बाद नेताओं ने राहत की सांसें लीं।

डॉक्टरों से सबक
नगर निगम संसाधन नहीं बढ़ाते बल्कि आरोप लगाने में विश्वास करते हैं। हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टर के वेतन वाली मांग ने निगम की पोल खोल दी। धरना, प्रदर्शन और दो-दो घंटे की हड़ताल के बाद कोविड रोगी को देखने से हाथ खड़ा करने के बाद अब निगम के नेताओं में यह चर्चा का विषय है कि दक्षिणी दिल्ली से सिविक सेंटर के किराय के अगर लाखों रुपए लिए जाते, निगम की जमीन पर चल रहे किराए के दफ्तर से पैसा वसूला जाता तो आज यह हालात नहीं होते और दिल्ली सरकार पर दोषारोपण के हालात पैदा नहीं होते।

नीति पर सवाल
औद्योगिक महानगर के संपूर्ण क्षेत्र को अधिसूचित बताकर तय भू-उपयोग से भिन्न काम करने वालों पर कार्रवाई करने की प्राधिकरण की प्रक्रिया पर चौतरफा हमला हो रहा है। एक तरफ जहां प्राधिकरण अधिकारी अनअर्जित जमीन पर रिहायशी कॉलोनी या मकान बनाने को अधिसूचित भू-उपयोग से इतर बताकर ढहाने की चेतावनी दे रहे हैं। वहीं, उनकी आंखों के आगे हो रहे तय भू उपयोग के उल्लंघन के मामले पर आंखें मूंदकर बैठने के आरोप हैं।

इसी कड़ी में सेक्टर- 48 के किनारे बने मार्बल मार्केट को बरसों बाद एनजीटी के आदेश के बाद हटाया गया है। दर्जनों की संख्या में यहां कारोबार करने वाले मार्बल कारोबारी प्राधिकरण से वैकल्पिक स्थान देने की मांग करते रहे। मांग पूरी नहीं होने पर अब यह पूरा बाजार दादरी सूरजपुर छलेरा (डीएससी) मार्ग पर सलारपुर गांव के पास स्थानांतरित हो गया है। दावा किया गया है कि जहां पर मार्बल मार्केट स्थानांतरित हुआ है, उस जमीन का अभी अर्जन नहीं हुआ है लेकिन समूचे शहर के अधिसूचित क्षेत्र होने की वजह से उस जमीन का भू-उपयोग गैर व्यावसायिक बताया गया है। ऐसे में वहां पर मार्बल मार्केट जैसी व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाना प्राधिकरण की नीति पर सवालिया निशान लगाता है।
बेदिल

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