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चुनावी दस्तक का रंग दिल्ली में कोरोनाकाल में भी साफ नजर आ रहा है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों में अब नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चे खोल दिए हैं, हर तरफ से हो रही मोर्चाबंदी में पुराने नेता सक्रिय हुए हैं।

Author नई दिल्ली | November 9, 2020 5:04 AM
Nationalदिल्ली मेरी दिल्ली।

चुनावी हित
चुनाव भी वाकई गजब की प्रक्रिया है, कुम्भकरणी नींद वालों को भी जगा देती है। अचानक नेताओं को अपनी जनता के हितों की चिंता हो जाती है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के चुनाव की घोषणा होने के बाद सिख सियासत में भी ये सब दिखने लगा है। पहले सिखों के मसले पर कम ही पार्टी चर्चा करती थीं। अब एक ही मुद्दे को सभी लोग कई-कई दिनों तक चर्चा में रख रहे हैं। और तो और देश के बाहर के मुद्दे भी समाज के सामने उठा रहे है। बीते दिनों पकिस्तान के करतारपुर गुरुद्वारा का ही मसला ले लें। एक दो नहीं, अमूमन सभी छोटे बड़े सिख गुट मसले को उठाते नहीं थकते। किसी ने ठीक ही कहा- भई चुनाव है, हित दिखने चाहिए।

सक्रियता बढ़ी
चुनावी दस्तक का रंग दिल्ली में कोरोनाकाल में भी साफ नजर आ रहा है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों में अब नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चे खोल दिए हैं, हर तरफ से हो रही मोर्चाबंदी में पुराने नेता सक्रिय हुए हैं। इस सक्रियता की वजह से नेताओं की खेमाबंदी भी नजर आने लगी है। हालांकि इस खेमाबंदी ने एक बार फिर से पुराने नेताओं को भी सक्रिय कर दिया है।

भीड़ बढ़ने लगी
दिल्ली में हर दिन कोरोना संक्रमण के मामले नया कीर्तिमान बना रहे हैं, लेकिन महीनों से घरों में बंद दिल्ली वालों के लिए अरमान अब कोरोना पर भारी पड़ रहे हैं। त्योहार का सीजन आते ही दिल्ली के बाजारों में लोगों की भीड़ बढ़ गई है और हालत यह है कि दो गज की दूरी से लेकर मास्क तक की अनिवार्यता भी खत्म सी होती नजर आ रही है। हर कोई कोरोना के डर की बात तो कर रहा है लेकिन परहेज की दीवार खड़ी करने से अब कतरा रहा है।

राजस्व को नुकसान
शहर में लोगों की शिकायतों के निस्तारण के लिए वॉट्सएप से खींची गई फोटो को आधार बनाकर आंखों में धूल झोंकी जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि शिकायत मिलने पर होने वाली कार्रवाई के साक्ष्य के रूप में कर्मचारी अपने उच्च अधिकारी या शिकायतकर्ता को फोटो भेजकर कार्रवाई होना सुनिश्चित कर रहे हैं। माफिया और सरकारी कर्मचारियों का गठजोड़ वॉट्सएप फोटो को ऐसी शिकायतों की काट बताकर सरकार को बड़े राजस्व का चूना लगा रहे हैं। इस कड़ी में त्योहारी सीजन के दौरान औद्योगिक महानगर में अवैध रूप से लगने वाले विज्ञापनों के बड़े बोर्डों की बाढ़ आ गई है। चूंकि वैध विज्ञापन के बोर्ड को प्राधिकरण तय शुल्क पर आबंटित करता है। शुल्क जमा होने के बाद ही संबंधित विज्ञापनकर्ता को वहां प्रचार की अनुमित मिलती है।

इन दिनों शहर के अधिकांश व्यस्त जगहों पर अवैध रूप में विज्ञापन माफिया ने अपने खंभे लगा दिए हैं। जिन पर शुल्क लेकर निजी कंपनियों का विज्ञापन किया जा रहा है। अवैध रूप में लगे ऐसे विज्ञापन बोर्डों की शिकायतें प्राधिकरण के कॉल सेंटर पर दर्ज कराने पर विभागीय कर्मचारी संबंधित विज्ञापनकर्ता को वहां लगे अवैध बोर्ड को हटाने को कहते हैं लेकिन उस स्थल के पास ही अन्य स्थान पर उसी बोर्ड को दोबारा लगाने की अनुमित दे रहे हैं। ऐसे में शिकायत मिलने वाले स्थान से बोर्ड हटने की वॉट्सएप फोटो को कार्रवाई का आधार बनाकर कर्मचारी अपने रिकार्ड में दर्ज कर रहे हैं। वहीं, पास ही अन्य स्थान पर ठीक उसी तरह वह बोर्ड लगवाकर अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मीडिया में प्रवेश
इस बार त्योहारों के बहाने भाजपा के प्रदेश नेताओं के परिवार के सदस्यों ने भी मीडिया में प्रवेश किया है। करवाचौथ पर मीडिया विभाग की तरफ से जारी फोटो में नेताओं के परिवार की फोटो भी जारी की गई। सूत्रों के मुताबिक ऐसे मौके कम ही होते हैं जब पार्टी के नेताओं से संबंधित परिवार के लोगों को जोड़ने की कोशिश की जाती है। इसे लेकर पार्टी के नेताओं में ही नाराजगी शुरू हो गई है।

मिल रहा सम्मान
बिल्ली के भाग से छींका टूटा यह कहावत इस समय पुलिस वालों पर सटीक बैठ रही है। कोरोना के बाद दिल्ली के पुलिस आयुक्त का कोरोना के साथ-साथ अपराध की समीक्षा पर लगातार बैठकें हो रही हैं। लेकिन इन बैठकों का नतीजा क्या है, यह तो पुलिस आयुक्त ही समझें, लेकिन इतना तय है कि इस दौरान पुलिस के उन सभी जवानों को सम्मान भी मिल रहा है जिन्हें सालों से इस तरह के सम्मान की कोई उम्मीद नहीं थी। इसे ही कहते हैं बिल्ली के भाग से छींका टूटा।
बेदिल

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