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फंसे लोगों की कठिनाई: घर लौटने की चाहत में बाधक बन रहा एकांतवास का वनवास

एकांतवास में 14 दिन रहने का डर इतना ज्यादा है कि वह फिलहाल कुछ दिन और वहीं रहना बेहतर मान रहे हैं। साथ ही अपने परिचितों से लगातार फोन कर एकांतवास से बचने का रास्ता पूछ रहे हैं।

घर के लिए निकले श्रमिक और छात्र कठिनाइयों से बेचैन हैं।

20 मार्च को 12 दिन की छुट्टी लेकर झारखंड में अपने गांव गए सुदर्शन (बदला हुआ नाम) अब नोएडा सेक्टर- 45 स्थित छलेरा में वापस लौटने को छटपटा रहे हैं। पूर्णबंदी क ी अवधि लगातार बढ़ने से वह 2 अप्रैल को वापस नहीं लौट पाए। इस बीच जैसे तैसे करीब एक महीने तक गांव में समय काटने के बाद फिलहाल आने का बंदोबस्त होने पर भी कतरा रहे हैं। डर है कि नोएडा वापस लौटने के बाद उन्हें नोएडा में 14 दिन एकांतवास में रहना पड़ेगा।

एकांतवास में 14 दिन रहने का डर इतना ज्यादा है कि वह फिलहाल कुछ दिन और वहीं रहना बेहतर मान रहे हैं। साथ ही अपने परिचितों से लगातार फोन कर एकांतवास से बचने का रास्ता पूछ रहे हैं। यह बानगी अकेले सुदर्शन की नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में पूर्णबंदी के दौरान अपने गांव या अन्य जिलों में फंसे लोगों की है, जो वापस तो आना चाह रहे हैं लेकिन एकांतवास के बनवास को नहीं झेलना चाह रहे हैं।

बनाए जा रहे हैं केंद्र
उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में भले ही कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण बताकर दो सप्ताह के लिए बढ़ाई गई पूर्णबंदी की अवधि में सशर्त कुछ छूट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बावजूद लगातार नए एकांतवास और पृथक केंद्रों की संख्या बढ़ाना लोगों के मन में संदेह पैदा कर रहा है। ऐसी सूचनाएं लोगों के मन में डर पैदा कर रही हैं कि कहीं सरकार कुछ छिपा तो नहीं रही? या वास्तविक संक्रमितों की संख्या को कम तो नहीं बताया जा रहा? यदि ऐसा नहीं है तो फिर क्यों नए एकांतवास केंद्रों को लगातार बनाया जा रहा है। जबकि वर्तमान में प्रयोग में आ रही पृथक केंद्रों की संख्या का ही आंशिक इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाबत जानकार बताते हैं कि यह तैयारी आने वाले दिनों में संक्रमण की रफ्तार रोकने के लिए की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के कई लाख मजदूर, कामगार, छात्रों आदि अन्य प्रदेशों में फंसे हैं। पूर्णबंदी लागू होने और रेल, हवाई व सड़क परिवहन पर देशव्यापी रोक के कारण वे चाह कर भी यहां नहीं आ पाए हैं। पूर्णबंदी के लगातार आगे बढ़ने से अन्य राज्यों में फंसे लाखों लोगों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। स्थिति का आंकलन कर उत्तर प्रदेश सरकार बाहर फंसे लोगों की वापसी के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। ऐसे लोगों को आक्रोश या परेशान होकर पैदल चलकर प्रदेश वापसी का प्रयास ना करने से भी सचेत किया है।

जानकारों के मुताबिक अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वालों से संक्रमण फैलने के खतरे को दूर करने के लिए करीब छह लाख लोगों के लिए एकांतवास केंद्र, रैन बसेरे समेत सामुदायिक रसोई का प्रबंध करना होगा। दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर निकाला जा सकता है। लिहाजा ऐसे सभी लोगों के नाम, पता, मोबाइल नंबर समेत चिकित्सकीय रिपोर्ट भी मांगी गई है। गृह मंत्रालय ने भी नए दिशानिर्देश जारी करते हुए यह कहा है कि दूसरे राज्यों में फंसे, श्रमिक, कामगार, पर्यटक व छात्रों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर निकाला जा सकता है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी शुरूआत पहले ही कर दी थी। कोटा से छात्रों को निकालने के बाद प्रयागराज में फंसे प्रतियोगी छात्रों को भी उनके घर पहुंचाया गया है।

नोएडा में फंसे करीब 1200 विद्यार्थी जाएंगे अपने घर
पूर्णबंदी के तीसरे चरण की शुरूआत होने के साथ ही जिला प्रशासन ने शहर में फंसे विभिन्न जिलों और राज्यों के विद्यार्थियों को उनके घर पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके बाबत शुक्रवार देर रात जिला प्रशासन की तरफ से एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें तय किया गया कि नोएडा डिपो से करीब 1200 विद्यार्थियों को उनके घर पहुंचाया जाएगा। उत्तर प्रदेश रोडवेज के नोएडा डिपो में भी छात्रों को पहुंचाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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