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पेट्रोल से महंगा डीजल! एक साल में 5.30 से 8.26 लाख करोड़ हो गई सरकार की कमाई

देश में डीजल की कीमत पेट्रोल को भी पीछे छोड़ चुकी है। डीजल की पहले के मुकाबले 9 फीसदी ऊंची कीमतों पर बिक रहा है। इससे सरकार की तिजोरी भी खूब गुलजार हो रही है।

पेट्रोल-डीजल पर यूपी में वैट बढ़ा दिया गया है। फोटो: फाइनेंनशियल एक्सप्रेस

देश में डीजल की कीमतें अब पेट्रोल को भी पीछे छोड़ चुका है। दैनिक आधार पर बदलने वाले मूल्य के क्रम में धीरे-धीरे डीजल की कीमतें पेट्रोल की तुलना में काफी तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि, पेट्रोल की कीमत भी ग्राहक को लिए ऐसा नहीं की राहत देने वाली हैं। अभी भी पेट्रोल की कीमत इसके असल मूल्य से दोगुनी है। ऐसे में सरकार की झोली भी खूब मालामाल हो रही है। गौरतलब है कि जीएसटी से मिलने वाले कुल अप्रत्यक्ष कर का आधा हिस्सा पेट्रोल और डीजल से आ रहा है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल की वास्तविक कीमत 33.91 रुपये प्रति लीटर है। जबकि, इसे ग्राहकों को 72.96 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार के द्वारा लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्यों के वैट में काफी अंतर है।

सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 2010 में नियंत्रण मुक्त कर दिया जबकि डीजल की कीमतों को 2014 में कर दिया गया। 16 जून 2017 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दैनिक आधार पर परिवर्तन होते रहे हैं। वर्तमान में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले कुल टैक्स 34.5 रुपये प्रति लीटर में एक्साइड ड्यूटी 20 रुपये, वैट चार्जेज 15.51 रुपये और डीलरों का कमीशन 3.56 रुपये है। इसमें वैट की कीमतें राज्यों के मुताबिक बदल जाती हैं। गौरतलब है कि 2014 के बाद से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 10 बार बढ़ाया गया। जबकि, इसमें कटौती मात्र दो बार ही की गई। आज के परिवेश में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्साइज ड्यूटी में इजाफा कर दिया और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2 रुपये प्रति लीटर सेस लागू कर दिया। इसके अलावा 1 रुपये प्रति टन कस्टम या आयात शुल्क कच्चे तेल पर लागू करके इसे सालाना 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया।

पेट्रोल-डीजल के जरिए केंद्र सरकार को काफी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो राज्य सरकारों को केंद्र के माफिक लाभ नहीं मिल पाया है। नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने 9 बार एक्साइड ड्यूटी बढ़ाई। जिसमें पेट्रोल 11.7 रुपये प्रति लीटर और डीजल 13.47 रुपये प्रति लीटर था। अक्टूबर, 2018 में एक्साइज ड्यूटी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई। इसके अलावा 2017 में भी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 2 की बढ़ोतरी को वापस लिया था। इन तमाम कवायदों के चलते केंद्र सरकार को एक्साइज ड्यूटी के जरिए पेट्रोल और डीजल से मिलने वाले रेवेन्यू में 2013-14 और 2016-17 के बीच 46 फीसदी का इजाफा हुआ।

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